एरिक गार्सेटी को ही अमेरिका ने भारत का राजदूत क्यों चुना? जानिए बाइडेन के दूत की सोच क्या है
एरिक गार्सेटी के पास भारत में काम करने के लिए महज दो सालों का ही वक्त होगा, अगर बाइडेन की सत्ता में वापसी नहीं होती है तो। ऐसे में एरिक के पास खुद को जमाने का मौका भी नहीं होगा।

Eric Garcetti News: जनवरी 2021 में जो बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे और उसके बाद से भारत में अमेरिका का कोई राजदूत नहीं था। लेकिन, दो साल बीतने के बाद आखिरकार अमेरिका ने भारत में अपने राजदूत को नियुक्त कर दिया है। ये आश्चर्यजनक ही है, कि रणनीतिक पार्टनर होने के बाद भी अमेरिका का राजदूत भारत में नहीं था, लेकिन अब जब बाइडेन ने अपने वफादार एरिक गार्सेटी को भारत में अपना राजदूत नियुक्त कर दिया है, तो फिर सवाल ये उठ रहे हैं, कि अपने दो साल के छोटे कार्यकाल के दौरान एरिक गार्सेटी भारत में क्या-क्या काम कर पाएंगे?
एरिक गार्सेटी का होगा छोटा कार्यकाल
भारत में अंतिम अमेरिकी दूत केनेथ जस्टर थे, जिन्हें डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नियुक्त किया था और उन्होंने जनवरी 2021 में बाइडेन के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद पद छोड़ दिया था। अमेरिकी सीनेट में जब एरिक गार्सेटी के नाम पर मुहर लगाई, तो उसके बाद गार्सेटी ने कहा, कि वह भारत में अमेरिका के महत्वपूर्ण हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए अपनी सेवा शुरू करने के लिए 'तैयार और उत्सुक' हैं। भारत में नए अमेरिकी राजदूत ने एक बयान में कहा, कि "मैं सीनेट के फैसले से काफी रोमांचित हूं, जो एक महत्वपूर्ण पद के लिए निर्णायक और द्विदलीय फैसला है, खासकर उस पद के लिए, जो काफी लंबे वक्त से खाली है"। उन्होंने आगे कहा, "अब कड़ी मेहनत शुरू होती है। मैं इस पूरी प्रक्रिया में विश्वास और समर्थन के लिए राष्ट्रपति बाइडेन और व्हाइट हाउस का और सभी सीनेटरों का - चाहे उन्होंने मुझे वोट दिया हो या नहीं, उनके विचारशील विचार के लिए बहुत आभारी हूं"। वहीं, भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूत के रूप में गार्सेटी की पुष्टि का स्वागत किया और कहा, कि वह बहुआयामी द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए उनके साथ काम करने को उत्सुक है।

गार्सेटी भारत को लेकर क्या सोचते हैं?
नॉमिनेशन के दौरान एरिक गार्सेटी ने सीनेट में दिए गये इंटरव्यू के दौरान कहा था, कि "भारत में अमेरिकी सुरक्षा और समृद्धि के भविष्य के लिए कुछ राष्ट्र अधिक महत्वपूर्ण हैं। अगर मुझे चुना जाता है, तो मैं इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तत्पर हूं"। उन्होंने कहा, कि भारत और अमेरिका के बीच की साझेदारी मौलिक है और मजबूती से जमी हुई है और अगर मेरे नाम पर मुहर लगती है, तो तो मैं हमारी महत्वाकांक्षी द्विपक्षीय साझेदारी को आगे बढ़ाने का प्रयास करूंगा। मुक्त, खुले और समावेशी भारत-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के बीच की साझेदारी को आगे ले जाने के लिए मैं काम करूंगा और मेरी कोशिश इस साल दोनों देशों के बीच के द्विपक्षीय व्यापारिक भागीदारी के रिकॉर्ड को तोड़ने की उम्मीद करूंगा। आपको बता दें, कि 2021-22 में भारत और अमेरिका के बीच सालाना व्याार करीब 120 अरब डॉलर था।
'बाजार बाधाओं को दूर करने की कोशिश'
एरिक गार्सेटी ने सीनेट इंटरव्यू के दौरान कहा था, कि अगर मेरे नाम की पुष्ट हो जाती है, तो मैं बाजार बाधाओं को दूर करने की कोशिश करूंगा और मुफ्त व्यापार बढ़ाने की दिशा में काम करूंगा, ताकि मध्यवर्गीय अमेरिकी लोगों के लिए रोजगार के नये अवसर पैदा हो सके और दोनों देशों के बीच महत्वाकांक्षी आर्थिक साझेदारी का समर्थन हो सके। इसके साथ ही उन्होंने कहा, कि "हम सभी जानते हैं, कि भारत कठिन पड़ोसियों के बीच स्थिति है, और यदि मेरे नाम की पुष्टि हो जाती है, तो मेरी कोशिश भारत को मजबूत करने की होगी, ताकि भारत आतंकवाद का मुकाबला कर सके, आक्रामकता का मुकाबला कर सके और अपनी संप्रभुता की रक्षा कर सके। इसके साथ ही उन्होंने कहा, कि 'मेरी कोशिश भारत की क्षमता को मजबूत करने की होगी।' इसके साथ ही उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष साझेदारी, जलवायु परिवर्तन साझेदारी, विज्ञान साझेदारी को विस्तार देने की बात कही। आपको बता दें, कि भारत में अमेरिका के करीब साढ़े 9 लाख लोग रहते हैं, वहीं अमेरिका के भारत में चार वाणिज्य दूतावास भी हैं, जिनमें हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं।
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