कोरोना के बीच नए वायरस ने दी दस्तक, मंकीपॉक्स से दहशत में दुनिया!

लंदन, जून 12: पिछले डेढ़ साल के ज्यादा के वक्त से पूरी दुनिया चीन से निकले कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है। कोरोना ने भारत के साथ-साथ दुनिया भर के देशों में अपना कहर बरपाया है। इस बीच कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट लोगों की नींद उड़ा रहे हैं। इस बीच वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों समेत लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कोरोना से लड़ रहे विश्व के लिए अब नई टेंशन सामने आ गई है यानी की कोरोना के साथ अब एक नए वायरस ने भी दस्तक दे दी है, जिसका नाम मंकीपॉक्स है।

ब्रिटेन के वेल्स से सामने आए दो मामले

ब्रिटेन के वेल्स से सामने आए दो मामले

मंकीपॉक्स वायरस के दो मामले ब्रिटेन के वेल्स से सामने आए हैं, जिसके बाद वहां के लोगों में दहशत फैल गई है। मंकीपॉक्स को लेकर वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह वायरस ज्यादातर अफ्रीका में देखने को मिलता है। वहीं मंकीपॉक्स का प्रकोप आम तौर से मध्य और पश्चिम अफ्रीका में ज्यादा देखने को मिलता है। हालांकि इस वायरस को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि ये संक्रामक नहीं है, लेकिन पब्लिक हेल्थ वेल्स और पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड दोनों नए केस पर अपनी निगरानी बनाए हुए हैं।

इंग्लैंड के अस्पताल में कराया भर्ती

इंग्लैंड के अस्पताल में कराया भर्ती

बता दें कि इस हफ्ते ब्रिटेन के उत्तरी वेल्स में दुर्लभ बीमारी मंकीपॉक्स के दो मामलों का पता चला है। पब्लिक हेल्थ वेल्स के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हाल ही में एक ही घर के दो सदस्य प्रभावित हुए थे और दोनों मरीजों को एहतियात के तौर पर इंग्लैंड के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पीएचडब्ल्यू में हेल्थ प्रोटेक्शन में रिचर्ड फर्थ कंसल्टेंट ने एक बयान में कहा कि निगरानी और संपर्क ट्रेसिंग चल रही है और आम जनता के लिए जोखिम बहुत कम है।

जानिए क्या है मंकीपॉक्स वायरस

जानिए क्या है मंकीपॉक्स वायरस

मंकीपॉक्स एक वायरस है जो जानवरों से मनुष्यों में फैलता है, जिसमें चेचक के रोगियों ही समान लक्षण होते हैं, हालांकि यह चिकित्सकीय रूप से कम गंभीर होता है। जैसा कि डब्ल्यूएचओ ने बताया है कि यह दुर्लभ बीमारी मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावन क्षेत्रों में होती है और कभी-कभी अन्य क्षेत्रों में निर्यात की जाती है। 11 अफ्रीकी देशों से मंकीपॉक्स के मानव मामले सामने आए हैं। इस वायरस के लक्षणों में बुखार, फुंसी और बढ़े हुए लिम्फ नोड्स शामिल हैं। इंसानों में जंगली जानवरों जैसे चूहे या बंदरों से फैलता है।

इस वायरस से हो सकती है मौत

इस वायरस से हो सकती है मौत

हालांकि यह भी सामने आया है कि यह बीमारी एक दूसरे शख्स में भी फैल सकती है यानी की वायरस का ट्रांसमिशन हो सकता है। यहां तक की यह भी हो सकता है कि इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या के 10वें हिस्सा भी मौत भी हो जाए। वहीं इस बीमारी की चपेट में आने के बाद हाई टेंपरेचर, सिर दर्द, मांसपेशी में दर्द, पीठ में दर्द, सूजन, ठंड लगना और थकान महसूस करना होती है। यह वायरस 14 से 21 दिनों यानी की दो से तीन हफ्तों तक रहता है।

इस वायरस की ना कोई दवा ना वैक्सीन

इस वायरस की ना कोई दवा ना वैक्सीन

वहीं अगर दवा या वैक्सीन की बात करें तो सेंटर फोर डिजीज एंड कंट्रोल ने बताया है कि अब तक इसकी कोई स्पेशल दवा नहीं बनी और ना इस वायरस के लिए कोई वैक्सीन विकसित हुई है। लेकिन उसे चेचक की दवा सिडोफोविर, ST-246 और वीआईजी से काबू में कर सकते हैं। बता दें कि मंकीपॉक्स का पहला मामला 1970 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में पहचाना गया था। 39 साल बाद 2017 में नाइजीरिया में फिर 2003 में अमेरिका में मंकीपॉक्स के मामलों की पुष्टि हुई थी। हाल ही में मंकीपॉक्स को सितंबर 2018 में इजराइल ले पाया गया। वहीं सितंबर 2018 में यूके। वहीं मई 2019 में सिंगापुर के लिए नाइजीरिया के यात्री मंकीपॉक्स से बीमार पड़ गए थे।

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