Eid 2026: UAE, Qatar और Kuwait में ईद की नमाज पर संकट, धमाकों के बीच कैसे होगी? जानें नियम
Eid 2026: अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ रमजान के महीने में जो युद्ध शुरू किया है अब उसका असर पूरे अरब इलाके पर साफ-साफ दिख रहा है। हालात ये हैं कि अब ईद का त्योहार मनाना भी मुश्किल हो गया है। कई देशों में पाबंदियां हैं तो कुछ ने ईद को लेकर नए सिरे से गाइडलाइन्स जारी कर दी हैं। ज्यादातर जगहों पर नमाज अब खुले मैदानों या फिर ईदगाह में नहीं, बल्कि सिर्फ मस्जिदों के अंदर ही अदा की जाएगी। यह फैसला नमाजियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
दुबई के इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज डिपार्टमेंट ने शारजाह के इस्लामिक अफेयर्स डिपार्टमेंट के साथ मिलकर यह फैसला लिया है। सरकारी मीडिया कार्यालय ने सोशल मीडिया पर लोगों से अपील की है कि वे सभी गाइडलाइंस का पालन करें और समय से पहले मस्जिद पहुंचें।

क्यों लिया इनडोर नमाज का फैसला?
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रही जंग के कारण दुबई समेत UAE के कई इलाकों में सुरक्षा जोखिम बढ़ गए हैं। ईरान की तरफ से UAE पर पिछले 15 दिनों से लगातार बमबारी हो रही है। शायद ही ऐसा कोई दिन गया हो जब IRGC ने UAE को निशाना न बनाया हो। रिपोर्ट के मुताबिक, UAE की एयर डिफेंस सिस्टम ने अब तक 314 बैलिस्टिक मिसाइल, 15 क्रूज मिसाइल और 1,672 ड्रोन को इंटरसेप्ट किया है। UAE में अब तक 2 सैनिक और 6 आम नागरिक ईरानी हमलों में मारे जा चुके हैं। अब ऐसे में खुले में नमाज होती है तो लोगों के लिए बड़ा खतरा है।
कब है ईद 2026?
UAE और पूरे अरब जगत में ईद-उल-फितर 20 मार्च को होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम फैसला चांद दिखने पर ही होगा। अगर 29वें रोज़े के दिन चांद दिख गया तो ईद 19 मार्च को होगी, नहीं तो 20 मार्च को।
सिर्फ UAE नहीं, पूरे Gulf में बदलाव
यह फैसला सिर्फ UAE तक सीमित नहीं है। कुवैत और कतर ने भी इसी तरह के नियम लागू किए हैं। तीनों देशों ने मिलकर एक तरह से यह ट्रेंड सेट किया है कि इस बार ईद की नमाज सिर्फ मस्जिदों के अंदर ही होगी। लिहाजा हमलों के बीच खाड़ी देशों को अपनी सदियों पुरानी परंपरा बदलनी पड़ रही है। वहीं, नमाज के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
नमाजियों के लिए जरूरी बातें
• समय से पहले पहुंचे
• नियमों का पालन करें
• मस्जिद के बाहर भीड़ न लगाएं
• सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें
परंपराओं को किया एडजस्ट
UAE, कुवैत और कतर का यह फैसला दिखाता है कि कैसे बदलते हालात में परंपराओं को एडजस्ट किया जा रहा है। यह एक ऐसा कदम है जो सुरक्षा, व्यवस्था और धर्म- तीनों के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश करता है।
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