Egypt Elections: तीसरी बार मिस्र के राष्ट्रपति बनेंगे अब्देल फतह अल-सिसी, जानिए क्यों है ये ऐतिहासिक जीत?

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने एक बार फिर से चुनाव जीत गए हैं। 10 से 12 दिसंबर के बीच हुए चुनाव में वोटों की गिनती के बाद एक बार फिर से उन्हें विजेता घोषित किया गया है। सीसी का तीसरा कार्यकाल अप्रैल 2024 से शुरू होगा।

मौजूदा राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के सामने कोई भी कद्दावर प्रतिद्विंदी उम्मीदवार नहीं होने से उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। अल-सीसी पहली बार 2014 में राष्ट्रपति बने थे।

el-Sisi declared victorious in Egypt election

राष्ट्रीय चुनाव प्राधिकरण ने सोमवार को कहा कि अल-सिसी को चुनाव में 89.6 प्रतिशत वोट मिले। अल-सीसी को लगभग 4 करोड़ मिस्रवासियों ने वोट दिया। प्राधिकरण प्रमुख हेज़म बदावी ने कहा कि इस बार चुनाव में सबसे अधिक 66.8 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।

अल-सिसी के खिलाफ तीन उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें बाद वामपंथी झुकाव वाली विपक्षी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख फरीद जहरान, एक सदी पुरानी वफद पार्टी के अध्यक्ष अब्देल-सनद यामामा और रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी के प्रमुख हेजेम उमर थे। हालांकि इनमें से कोई भी हाई प्रोफाइल नहीं था।

रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी का नेतृत्व करने वाले हेज़म उमर को 4.5 प्रतिशत वोट मिले। फरीद जाहरान को3 फीसदी वोट मिले। चुनाव से पहले सबसे प्रमुख संभावित उम्मीदवार ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। उनका आरोप था कि उनके अभियान में बाधा डाली जा रही है और उनके दर्जनों समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

सिसी 2013 में देश के पहले लोकप्रिय रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को अपदस्थ करने के बाद सत्ता में आए थे। इसके बार 2018 में उन्हें दोबारा चुना गया। पिछले दोनों चुनावों में उन्होंने 97 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे। मिस्र के संविधान के मुताबिक एक व्यक्ति सिर्फ 2 बार ही राष्ट्रपति बन सकता था, लेकिन अल-सिसी ने संसोधन कर इसमें बदलाव करवाया।

अल-सिसी ने राष्ट्रपति पद की कार्यकाल को चार से बढ़ाकर छह साल कर दिया और कार्यालय में लगातार कार्यकाल की सीमा को दो से बढ़ाकर तीन कर दिया। सीसी ने 10 साल पहले जब सत्ता संभाली थी तभी उन्होंने विपक्ष को खत्म करना शुरू कर दिया था।

1952 के बाद से फौज से देश की सत्ता संभलाने वाले अल-सीसी पांचवे राष्ट्रपति हैं। अपने इस्लामी पूर्ववर्ती, मोहम्मद मुर्सी को सेना द्वारा उखाड़ फेंकने के एक साल बाद राष्ट्रपति बने अल-सीसी ने देश में विशाल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भारी रकम खर्च किया। देश में सड़कों का विस्तार किया गया और फ्लाईओवर बनाए गए हैं।

अल-सीसी ने काहिरा के पास अरबों डॉलर की लागत से एक नई राजधानी का निर्माण भी किया है। हालांकि राष्ट्रपति के इस फैसले का खूब विरोध भी हुआ है। विरोधियों का कहना है कि इस "वित्तीय नासमझी" की वजह से देश के अधिकांश आर्थिक संसाधन खत्म हो गए देश की अर्थव्यवस्था पंगु बन गई और मिस्र अभूतपूर्व कर्ज में डूब गया है।

हालांकि राष्ट्रपति अल-सीसी के समर्थकों का मानना है कि राष्ट्रपति की परियोजनाओं से देश में विकास के अवसर बढ़ेंगे। उनका मानना है कि आने वाले समय में लोगों का जीवन आसान बनेगा और इससे आवश्यक विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, जिससे अंततः अधिक समृद्ध समय की शुरुआत होगी।

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