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45 सालों से ईरान ने नहीं खरीदे विमान, जा चुकी हैं हजारों जान.. US कैसे तोड़ चुका है एविएशन इंडस्ड्री की कमर?

Ebrahim Raisi Plane Crash: ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और ईरानी विदेश मंत्री होसैन अमीराब्दुल्लाहियन की हेलीकॉप्टर क्रैश में हुई मौत ने खोखला होते जा रहे ईरान की असली कहानी को दुनिया के सामने ला दिया है। परमाणु बम बनाने की जिद ने इस शिया इस्लामिक देश को कटोरा पकड़ने के हाल में ला दिया है।

और राष्ट्रपति की मौत के पीछे की असली कहानी भी अमेरिका का ही एक फैसला है। अमेरिकी प्रतिबंधों ने ना सिर्फ ईरान की अर्थव्यवस्था को, बल्कि ईरान के सैन्य भंडार को भी गहरा नुकसान पहुंचाया है।

us sanctions behind Iran s aviation crisis

दरअसल, अमेरिका में बने दो-ब्लेड वाली BELL 212 हेलीकॉप्टर, जिसमें राष्ट्रपति रईसी यात्रा कर रहे थे, वो हेलीकॉप्टर कई दशक पहले बनाई गई थी और उसका मेंटिनेंस भी कई सालों से नहीं किया गया था। दरअसल, 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान पर लगे विदेशी प्रतिबंधों ने इसे बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया है और ईरान के लिए अपने विमानों और हेलीकॉप्टर्स के लिए कलपुर्जे खरीदना मुश्किल हो गया है।

जबकि, हेलीकॉप्टर हो या फाइटर जेट या फिर सामान्य हवाई जहाज, इनकी लगातार मरम्मत और सुरक्षित रखरखाव की जरूरत होती है। इनके कलपुर्जों को लगातार बदलना पड़ता है।

करीब 45 साल पहले अमेरिका ने पहली बार ईरान को प्रतिबंधों के जाल में बांधा था और उसके बाद से ईरानी अर्थव्यवस्था का लगातार पतन हुआ है, खासकर उसकी एयरलाइंस इंडस्ट्री को गहरा धक्का लगा है। लेकिन ईरान के तनावपूर्ण भू-राजनीतिक पड़ोस और विशेष रूप से इजराइल और अमेरिका के साथ उसके तनावपूर्ण संबंधों की वजह से ईरान के लिए अपनी एविएशन इंडस्ट्री के हालात सही करना मुमकिन नहीं हो पाया, जिसकी वजह से अभी तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।

आइये देखते हैं, कि 1979 में इस्लामिक क्रांति होने के बाद से ईरान ने कितने खतरनाक विमान दुर्घटनाओं को सहा है।

ईरान की सबसे बड़ी विमानन घटनाएं

जिनेवा स्थित ब्यूरो ऑफ एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट आर्काइव्स (बी3ए) के मुताबिक, 1979 से 2023 के बीच, यानि करीब 44 सालों में ईरान में 253 विमान दुर्घटनाएं हुईं हैं, जिनमें 3,335 लोगों की जान जा चुकी है।

21 जनवरी 1980: ईरान एयर का बोइंग 727-100 तेहरान में अल्बोरज़ रेंज में एक पहाड़ की ढलान से टकरा गया, जिससे उसमें सवार सभी 128 लोगों की मौत हो गई। माना जाता है, उस हादसे के पीछे की वजह विमान के इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) का फेल हो जाना था। जिसकी वजह से रात के वक्त पायलट कुछ देख नहीं पा रहा था।

3 नवंबर 1986: ईरान की वायु सेना के लड़ाकू परिवहन विमान C-130 हरक्यूलिस का अल्टीमीटर खराब हो गया, जिसकी वजह से विमान धरती से कितनी ऊंचाई पर उड़ रहा है, इसका पता लगना पायलट को बंद हो गया। जिसकी वजह से विमान न्यूनतम सुरक्षित ऊंचाई (1,981 मीटर) से नीचे आ गया और फिर सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में एक पहाड़ी ढलान से टकरा गया। इस हादसे में 96 सैनिकों समेत 103 लोगों की मौत हो गई थी।

13 जुलाई 1988: इस दिन ईरानी इतिहास का सबसे भयानक विमान दुर्घटना हुआ था। जब, ईरानी एयर की फ्लाइट एयरबस A300 केशम द्वीप से गुजर रहा था, और जिसपर अमेरिकी नौसेना के क्रूजर यूएसएस विन्सेनेस ने लड़ाकू विमान समझकर मिलाइल दाग दी थी। इस घटना में विमान में सवार सभी 290 लोगों की मौत हो गई थी।

12 फरवरी 2002: ईरान एयरटूर का टुपोलेव टीयू-154 खुर्रमाबाद में एक पहाड़ी ढलान से टकरा गया, क्योंकि चालक दल को यह एहसास नहीं हुआ, कि विमान अपने रास्ते से भटक गया है, जिससे चार स्पेनिश नागरिकों सहित सभी 119 यात्रियों की मौत हो गई।

19 फरवरी 2003: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा संचालित इल्युशिन II-76 विमान लैंडिंग के समय करमान हवाई अड्डे के पास एक पहाड़ से टकरा गया, जिससे विमान में सवार सभी 275 लोगों की मौत हो गई। खराब हो चुके विमान के सिस्टम की वजह से पायलट ने समय से पहले ही प्लेन को जमीन पर उतरना शुरू कर दिया था।

15 जुलाई 2009: कैस्पियन एयरलाइंस द्वारा संचालित टुपोलेव टीयू-154 तेजी से नीचे उतरने के बाद क़ज़विन में एक खुले मैदान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे विमान में सवार सभी 168 लोगों की मौत हो गई। दुर्घटना के लिए कई तकनीकी खामियां जिम्मेदार थीं और सबसे खतरनाक था, विमान के इंजन के खराब हो जाना।

8 जनवरी 2020: यूक्रेन के ध्वजवाहक, यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस द्वारा संचालित बोइंग 737-800 को तेहरान के सबाशहर में उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद दो मिसाइलों से मार गिराया गया, जिसमें सवार 176 लोग मारे गए। विमान को गलती से "दुश्मन का लक्ष्य" समझ लिया गया था, जिसे बाद में सरकार ने "मानवीय भूल" बताया।

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प्रतिबंधों ने ईरान के विमानन क्षेत्र को कैसे जर्जर किया?

1979 में प्रतिबंध लगाए जाने के कुछ ही समय बाद, ईरान सरकार विमानों के पार्ट्स खरीदने में असमर्थ हो गई, जिससे ईरान का विमानन क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ था। लिहाजा, 1980, 1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में ईरान को कई घातक विमान दुर्घटनाओं में वृद्धि का सामना करना पड़ा।

ईरानी विमानन के खिलाफ लगाए गये अमेरिकी प्रतिबंधों में 10 प्रतिशत से ज्यादा अमेरिकी मदद से बने किसी भी विमान या विमान उपकरण को ईरान नहीं खरीद सकता है। इसके अलावा, ईरान किसी भी पश्चिमी देश से ना तो हेलीकॉप्टर्स खरीद सकता है और ना ही यात्री हवाई जहाज। इसके अलावा, ईरान के पास पहले से भी जो हवाई जहाज या हेलीकॉप्टर्स मौजूद हैं, उनके पार्ट्स भी वो नहीं खरीद सकता है।

वहीं, ईरान ने अतीत में रूस से भी जो फाइटर जेट्स खरीदे हैं, उनमें अमेरिकी पार्ट्स लगे हैं। इसलिए, रूस के साथ काफी मजबूत संबंध होने के बाद भी ईरान उनके पार्ट्स नहीं खरीद सकता है।

वाशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2019 तक ईरान की 23 एयरलाइंस कंपनियों के पास कुल 300 यात्री हवाई जहाज थे, लेकिन उनमें से सिर्फ 156 विमान ही उड़ने लायक बचे थे। यानि, आधे हवाई जहाज उड़ने के काबिल ही नहीं रहे हैं।

लगातार मरम्मत की जरूरत ने ईरान में हवाई जहाज के टिकट की कीमतें बढ़ा दी हैं, और छोटी विमान कंपनियों पर आर्थिक दबाव भी डाला है। विमान को मरम्मत के लिए विदेश भी नहीं भेजा जा सकता है, लिहाजा उनकी मरम्मत सीमित जानकारी के साथ देश में ही की जाती है।

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को फिर दिया झटका

साल 2015 में ईरान ने प्रतिबंधों से बाहर निकलने के लिए अमेरिका के साथ ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शिन (JCPOA) पर साइन कर गिए, जिसकी शर्त ये थी, ईरान परमाणु बम बनाने वाली सामग्रियों को उत्पादन नहीं करेगा। ईरान ने इस शर्त को मान लिया था और बदले में अमेरिका ने ईरान के एविएशन इंडस्ट्री से कई तरह के प्रतिबंध हटा लिए।

जिसके बाद ईरान, एयरबस और बोइंग जैसे विदेशी निर्माताओं से विमान खरीदने में सक्षम हो गया।

लेकिन, 2018 में अमेरिका ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस समझौते को एकतरफा तोड़ दिया और ईरान पर फिर से कई तरह से प्रतिबंध लगा दिए। वाशिंगटन इंस्टीट्यूट के मुताबिक, जब ईरान पर प्रतिबंध हटा लिया गया था, उस वक्त उसने पश्चिमी देशों की कंपनियों को 200 हवाई जहाजों के निर्माण के ऑर्डर दिए थे। लेकिन, उन तीन सालों में ईरान को सिर्फ 3 एयरबस हवाई जहाज और 13 एटीआर टर्बोप्रॉप - छोटे विमान ही मिल सके।

अमेरिका ने ईरान के ऊपर लगाए गये प्रतिबंधों को अभी तक नहीं हटाया है, जिससे ईरान के लिए अपनी एविएशन इंडस्ट्री को सुधारना मुश्किल है।

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