Earth news:जिस ऐस्टरॉइड ने Dinosaurs को विलुप्त किया,उससे कैसे महीनों तक हिली थी धरती ? जानिए
6.6 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी से 10 किलोमीटर से भी विशाल ऐस्टरॉइड आकर टकराया था। यही ऐस्टरॉइड डायनासोर के विलुप्त होने का कारण बना था। वैज्ञानिकों ने जो नए साक्ष्य जुटाए हैं, उससे मालूम होता है कि इस टकराव की वजह से पृथ्वी पर ऐसा भूकंप आया था जिससे यह कई हफ्तों से लेकर महीनों तक हिलती रही थी। शोध से पता चला है कि इस भयानक भूकंप की वजह जो एनर्जी रिलीज हुई थी वह अनुमानित तौर पर 1023 जूल तक हो सकती है। यह कितनी ज्यादा ऊर्जा थी इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इससे पैदा हुए भूकंप की तीव्रता 2004 में सुमात्रा में आए 9.1 की तीव्रता के भूकंप से भी 50,000 गुना ज्यादा थी।

ऐस्टरॉइड की वजह से डायनासोर यूं ही विलुप्त नहीं हुआ था
डायनासोर को मिटाने वाले ऐस्टरॉइड के पृथ्वी से टकराने वाले शोध से जुड़े वैज्ञानिक हरमन बरमुडेज इस 'भयानक भूकंप' से जुड़े साक्ष्यों को आने वाले रविवार यानि 9 अक्टूबर को डेन्वर में होने वाले जीएसए कनेक्ट की मीटिंग में पेश करने वाले हैं। इसी साल बरमुडेज जीएसए ग्रैजुएट स्टूडेंट रिसर्च ग्रांट के सपोर्ट से टेक्सास के अलबामा और मिसिसिपी में भी इससे संबंधित डेटा जुटाने के लिए पहुंचे थे। इससे उन्हें कोलंबिया और मेक्सिको में अपने पहले किए गए कार्यों से इसके विनाशकारी प्रभावों पर जुटाई हुई जानकारी की पुष्टि करने में सहायता मिली है।

बहुत ही विनाशकारी थी वह टक्कर
2014 में जब वे कोलंबिया के गोरगोनिला द्वीप में फिल्ड वर्क कर रहे थे तो उन्हें गोले को रूप में डिपॉजिट मिले थे, जो तलछट में शीशे के छोटे-छोटे मनके के रूप में थे (बड़े 1.1 एमएम के थे )। इसके साथ ही ऐस्टरॉइड के टकराव की वजह से पैदा हुए शार्ड की मौजूदगी भी मिली थी। शीशे की गोलियां ऐस्टरॉइड के प्रभाव से पैदा हुई गर्मी और दबाव के चलते बनी थीं जो कि गुरुत्वाकर्षण की वजह से बाद में सतह के नीचे चले गए थे। गोरगोनिला द्वीप के तट पर मौजूद चट्टान भी समुद्र के 2 किलोमीटर भीतर की स्थिति बताते हैं। इसका प्रभाव इतना विनाशकारी था कि शहर के आकार के ऐस्टरॉइड टकराने वाली जगह से करीब 3,000 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में महासागर की सतह पर रेत, मिट्टी और छोटे समुद्री जीव जमा हो गए थे।

हफ्तों से महीनों तक हिलती रही थी धरती
बरमुडेज के मुताबिक समुद्र की सतह से 10-15 मीटर नीचे जमा मिट्टी और बलुआ पत्थर उस टक्कर के बाद धरती के कांपने की गवाही देते हैं। उन्होंने वहां मौजूद साक्ष्यों के आधार पर पाया है कि धरती के हिलने की अवधि हफ्तों से महीनों तक रही थी, जिसके प्रमाण समुद्र के अंदर मौजूद हैं। बाद में उस जगह पर समुद्री पौधे भी निकलने शुरू हुए। बरमुडेज बताते हैं, 'जिस सेक्शन को गोरगोनिला द्वीप में मैंने खोजा है वह के-पीजी बाउंडरी पर शोध के लिए बेहतरीन जगह है, क्योंकि यह सबसे बेहतरीन तरह से संरक्षित जगहों में से एक है और यह समुद्र के अंदर काफी गहराई में मौजूद है, जिसके चलते यह सुनामी के प्रभाव में भी नहीं आ सके थे।'

भयानक भूकंप ने धरती का स्वरूप ही बदल दिया था
भयानक भूकंप की वजह से धरती का जो स्वरूप बदला था, उसके साक्ष्य मेक्सिको और अमेरिका में भी संरक्षित हैं। मेक्सिको में El Papalote में इस वैज्ञानिक को टकराव की वजह से पिघलने के सबूत मिले हैं। ज्यादा तीव्रता की वजह से पानी में घुले हुए गाद तरल की तरह बहने शुरू हो गए थे। मिसिसिपी, अलबामा, और टेक्सास में उन्हें फॉल्ट और क्रैक मिले हैं, जो उस भयानक भूकंप से जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने कई जगहों पर सुनामी की वजह से जमा हुए पदार्थों को भी दर्ज किया है। जो कि ऐस्टरॉइड के टकराने की वजह से पैदा हुए थे; और हमेशा-हमेशा के लिए अपनी पहचान छोड़ गए थे।

कई किलोमीटर ऊंची उठी थी सुनामी की लहरें
वैज्ञानिक ने पाया है कि उस विशाल क्षुद्रग्रह का प्रभाव इतना भयंकर था कि इतनी ऊंची सुनामी की लहरें उठी कि पूरी दुनिया में फैल गई थी। अनुमान के मुताबिक डायनाोर को खत्म करने वाला ऐस्ट्रॉयड 10 किलोमीटर से ज्यादा चौडा था, जो धरती से 43,500 किलो मीटर की रफ्तार से टकराया था। इसकी वजह से डायनासोर ही नहीं पृथ्वी से करीब जो-तिहाई जीव खत्म हो गए थे। इसकी टक्कर की वजह से सिर्फ ढाई मिनट बाद ही 4.5 किलोमीटर तक ऊंची सुनामी की लहरें उठा थीं। इसी के प्रभाव से जो भी मलबा आसमान की ओर उछला था वह वापस धरती से दब गया था। (तस्वीरें-प्रतीकात्मक)
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