दुनिया अवैध पाकिस्तानियों से परेशान, पाकिस्तान को अवैध अफगानों से दिक्कत, तालीबान ने दी चेतावनी
पाकिस्तानी सरकार ने अफगानिस्तान के नागरिकों को पाकिस्तान छोड़ने की डेडलाइन दी गई, जो 31 अक्टूबर को खत्म हो गई। जिसके बाद पुलिस इन लोगों के खिलाफ एक्शन ले रही है। केयरटेकर गवर्नमेंट के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों को जबरदस्ती अफगानिस्तान भेजा जाएगा।
पाकिस्तान सरकार ने अफगानी लोगों देश छोड़ने का जो वक्त दिया था, वो 31 अक्टूबर के खत्म होने के साथ ही खत्म हो गया है। अब पाकिस्तानी पुलिस देश में अवैध रूप से रहने वाले अफगान नागरिकों को हिरासत में ले रही है।

अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बिना कागजात के देश में रहने वाले अफगानों को गिरफ्तार करने और निर्वासित करने के लिए अभियान चलाया है, और दर्जनों लोगों को सरकार द्वारा निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद वापस भेज दिया है।
पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री सरफराज बुगती ने कहा कि बुधवार को 64 अफगानों को गिरफ्तार किया गया, हिरासत में लिया गया और उन्हें निर्वासित किया गया।
बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों पर कार्रवाई का ज्यादातर असर पाकिस्तान में बिना कागजात के रहने वाले करीब 20 लाख अफगानों पर पड़ रहा है, हालांकि सरकार का कहना है कि इसका लक्ष्य सभी गैर-दस्तावेज या अपंजीकृत विदेशियों को निशाना बनाना है।
खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान ने अफगानों को निष्कासित करने के फैसले की निंदा की है और इसे "अमानवीय" बताया है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए तालिबान के विदेश मामलों के डिप्टी मिनिस्टर मोहम्मद अब्बास स्टानिकजई ने कहा- पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ हम एक्शन लेंगे। पाक सरकार का यह फैसला गलत और अमानवीय है। उन्हें अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
अब्बास स्टानिकजई ने आगे कहा कि वे पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक तरीकों से इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि, यदि राजनयिक चैनलों का उपयोग करने से काम नहीं चलता है, तो तालिबान अफगान शरणार्थियों के साथ पाकिस्तान के व्यवहार का जवाब देगा।
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने अफगान शरणार्थियों की मेजबानी करने वाले देशों से भी आह्वान किया कि वे उन्हें जबरन निर्वासित न करें क्योंकि प्रवासियों के पास अभी तक इसके लिए कोई तैयारी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक अब तक कम से कम 1,65,000 बिना दस्तावेज वाले अफगान नागरिक अपने देश लौट चुके हैं।
इससे पहले बुधवार को अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान से आग्रह किया था कि वह देश में मौजूद गैर-दस्तावेज अफगानों को देश छोड़ने के लिए और अधिक समय दे, क्योंकि अचानक भारी संख्या में हजारों लोगों के पाकिस्तान से पलायन के कारण सीमा चौकियों पर दबाव बढ़ रहा है।
पाकिस्तान ने क्यों लिया ये फैसला?
पाकिस्तान का कहना है, कि देश में करीब 17 लाख अफगान शरणार्थी अवैध ढंग से रहते हैं और पाकिस्तान में होने वाले आतंकी हमलों के लिए वो जिम्मेदार हैं। दरअसल अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद स्थानीय तालिबान ने पाकिस्तान में कई बड़े हमलों को अंजाम दिया है।
इन्हीं खतरों से निपटने के लिए पाकिस्तान शरणार्थियों को देश से बाहर निकालने पर जोर दे रही है। हालांकि पाकिस्तान ने इसका कोई सबूत नहीं दिया है कि अफगानिस्तान में होने वाले हमलों में अफगानी लोगों का हाथ है।
हैरानी की बात है कि जिस पाकिस्तान के लोग अवैध रूप से पूरी दुनिया में बसे हुए हैं और गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। वह पाकिस्तान, आतंकवाद से पीड़ित कमजोर अफगानी लोगों को देश से निकाल रहा है।
सितंबर महीने में पाकिस्तान सरकार की सीनेट की स्थाई समिति में बताया गया था कि विदेश में पाकिस्तान के नागरिक बड़ी संख्या में भीख मांगने के काम से जुटे हैं, जिस वजह से उन्हें जेल भी जाना पड़ता है।
प्रवासी पाकिस्तानी मंत्रालय के सचिव जीशान खानजादा ने स्टैंडिंग कमेटी को बताया कि पाकिस्तान के लगभग 10 लाख नागरिक विदेशों में हैं जिनमें से एक बड़ी संख्या भीख मांगने में जुटी है। खानजादा ने चौंकाने वाला खुलासा किया था कि पाकिस्तान के ये लोग वीजा लेकर अन्य देशों में जाते हैं और वहां भीख मांगने लगते हैं।












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