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Donald Trump: ट्रंप को मिला नोबेल? सफेद सूट में व्हाइट हाउस पहुंचीं 'आयरन लेडी' मचाडो, क्यों मचा है बवाल?

Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो के बीच गुरुवार को व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस बैठक की सबसे बड़ी चर्चा मचाडो द्वारा ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) भेंट करना रही। ट्रंप ने इसे "आपसी सम्मान का सुंदर संकेत" बताते हुए सोशल मीडिया पर मचाडो की जमकर तारीफ की है।

अक्टूबर 2025 में लोकतंत्र के संघर्ष के लिए यह सम्मान पाने वाली मचाडो ने ट्रंप का भरोसा जीतने के लिए यह कदम उठाया है, क्योंकि माना जाता है कि ट्रंप स्वयं इस पुरस्कार के प्रबल दावेदार थे। हालांकि, व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि ट्रंप फिलहाल मचाडो के नेतृत्व को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं, फिर भी यह मुलाकात वेनेजुएला के राजनीतिक भविष्य के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकती है।

Donald Trump

व्हाइट हाउस में शक्ति प्रदर्शन, सफेद सूट में पहुंचीं मचाडो

मारिया कोरिना मचाडो गुरुवार को विशेष सुरक्षा घेरे के बीच व्हाइट हाउस पहुंचीं। सफेद सूट में सजी मचाडो की यह यात्रा वेनेजुएला में जारी तानाशाही और लोकतंत्र की बहाली के लिए अमेरिकी समर्थन जुटाने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने उनके साहस की सराहना करते हुए कहा कि मचाडो ने अपने देश की आजादी के लिए बहुत कुछ झेला है। ट्रंप ने इस उपहार को दोनों नेताओं के बीच गहरे भरोसे की मिसाल बताया।

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क्या ट्रंप बन जाएंगे आधिकारिक नोबेल विजेता?

मचाडो द्वारा मेडल भेंट किए जाने के बाद यह कानूनी सवाल खड़ा हो गया कि क्या ट्रंप अब नोबेल विजेता कहलाएंगे? इस पर नोबेल समिति और नोबेल पीस सेंटर ने स्थिति स्पष्ट कर दी है:

  • नियम: नोबेल शांति पुरस्कार न तो किसी को ट्रांसफर किया जा सकता है, न ही इसे साझा या वापस लिया जा सकता है।
  • दर्जा: मेडल भौतिक रूप से ट्रंप के पास रह सकता है, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में विजेता का दर्जा केवल मारिया कोरिना मचाडो का ही रहेगा।
  • अपील: समिति ने दोहराया कि एक बार पुरस्कार घोषित होने के बाद उसे बदलने का कोई प्रावधान नहीं है।

ट्रंप की नाराजगी और मचाडो की 'डिप्लोमेसी'

राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने से असंतुष्ट थे। उन्हें लगता था कि विश्व शांति के लिए उनके प्रयासों को नजरअंदाज किया गया। मचाडो ने अपना पदक ट्रंप को सौंपकर संभवतः उस नाराजगी को दूर करने और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अमेरिकी प्रशासन का पूर्ण समर्थन हासिल करने की रणनीतिक चाल चली है।

वेनेजुएला का संघर्ष और अमेरिकी रुख

मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला में लोकतंत्र की सबसे बुलंद आवाज रही हैं। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें हिस्सा लेने से रोक दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने मादुरो सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया। इसी संघर्ष के लिए उन्हें 2025 में नोबेल मिला। हालांकि, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने एक पेचीदा बयान देते हुए कहा कि ट्रंप मचाडो से मिलकर उत्साहित तो थे, लेकिन प्रशासन को अभी भी लगता है कि मचाडो के पास देश का नेतृत्व करने के लिए आवश्यक जनसमर्थन का अभाव हो सकता है।

वेनेजुएला के लिए क्या बदलेगा?

इस मुलाकात ने वेनेजुएला के संकट को अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से जीवित कर दिया है। ट्रंप का मचाडो को "साहसी महिला" कहना मादुरो सरकार के लिए एक चेतावनी की तरह देखा जा रहा है। अब दुनिया की निगाहें इस पर हैं कि क्या अमेरिका वेनेजुएला पर नए प्रतिबंध लगाएगा या मचाडो के नेतृत्व को औपचारिक मान्यता देकर वहां सत्ता परिवर्तन की नींव रखेगा।

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