ट्रंप की टैरिफ धमकी पर निक्की हेली ने दी सलाह- भारत जैसे मजबूत सहयोगी से रिश्ते खराब ना करें
Donald Trump tariffs against India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर लगातार भारी टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं। 5 अगस्त को एक बाद फिर ट्रंप ने भारत पर अगले 24 घंटों के भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। भारत पर नए टैरिफ दरें लगाने की धमकी के बाद पूर्व दक्षिण कैरोलिना की गवर्नर निक्की हेली ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हेली ने ट्रंप से अपील की है कि वे भारत जैसे मजबूत सहयोगी देश के साथ अपने संबंधों को खराब न करें।
रिपब्लिकन नेता निक्की हेली, जिन्होंने ट्रंप के पहले कार्यकाल में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी दूत के रूप में काम किया था, ने भारत का समर्थन करते हुए कहा कि चीन के रूस के साथ घनिष्ठ संबंध होने के बावजूद ट्रंप प्रशासन उसे "छूट" दे रहा है।

हेली बोलीं- अमेरिका चीन को छूट ना दें
हेली ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, "भारत को रूस से तेल नहीं खरीदना चाहिए। लेकिन चीन, जो हमारा विरोधी है और रूसी व ईरानी तेल का नंबर एक खरीदार है, उसे 90 दिनों की टैरिफ छूट मिली है। चीन को छूट न दें और भारत जैसे मजबूत सहयोगी के साथ अपने संबंधों को खराब न करें।"
24 घंटों में भारत पर नए भारी टैरिफ लगाने की ट्रंप ने दी है धमकी
यह बयान ट्रंप के उस ऐलान के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगले 24 घंटों में वे भारत पर नए भारी टैरिफ लगाएंगे। ट्रंप ने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस से तेल खरीदने के कारण वे भारत के खिलाफ टैरिफ "काफी बढ़ा" देंगे। ट्रंप ने यह भी कहा, "उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि रूसी युद्ध मशीन द्वारा यूक्रेन में कितने लोग मारे जा रहे हैं। इसी कारण से, मैं भारत द्वारा अमेरिका को भुगतान किए जाने वाले टैरिफ को काफी बढ़ा दूंगा।"
इस बयान के बाद, भारत ने अमेरिका और यूरोपीय संघ पर नई दिल्ली को "अनुचित और निराधार" तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाया। भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका और यूरोपीय संघ के रूस के साथ व्यापारिक संबंधों के इतिहास पर सवाल उठाए।
भारत के सपेार्ट में उतरा रूस, दी चेतावनी
इस बीच, मंगलवार को रूस भी भारत के बचाव में आया। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा कि रूसी व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ कोई भी बयान "धमकी" माना जाएगा। पेस्कोव ने आगे कहा, "हमें कई ऐसे बयान सुनने को मिलते हैं जो वास्तव में धमकी हैं, देशों को रूस के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ने के लिए मजबूर करने का प्रयास हैं। हम ऐसे बयानों को कानूनी नहीं मानते।"












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