भारत को G7 में शामिल करने के प्लान पर गुस्साया चीन, कहा-हमारे खिलाफ घेराबंदी असफल रहेगी
बीजिंग। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंगलवार को फोन पर बात की है। इस बातचीत में उन्होंने भारत को जी7 संगठन के लिए आमंत्रित किया है। ट्रंप ने पीएम मोदी को ऐसे मौके पर यह आमंत्रण दिया है जब एक तरफ भारत कोरोना वायरस से जंग लड़ रहा है तो दूसरी तरफ लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन के साथ तनाव चरम स्तर पर पहुंच चुका है। ऐसे में चीन को ट्रंप के इस प्रस्ताव पर मिर्ची लगेगी यह बात लाजिमी थी। अब चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से ट्रंप के प्रस्ताव पर बयान देकर नाराजगी आधिकारिक तौर पर बयां कर दी गई है।
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क्या है G7 और क्या है इसका मकसद
चीन की तरफ से कहा गया है कि उसके खिलाफ 'एक छोटा घेरा' बनाने की जो कोशिशें चल रही हैं, वे सभी पूरी तरह से असफल और अलोकप्रिय रहेंगी। ट्रंप ने इस संगठन में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, रूस और साउथ कोरिया को भी इनवाइट किया है। जी7 उन सात देशों का संगठन है जिनकी अर्थव्यवस्थाएं विकसित हैं। इस संगठन में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम (यूके), फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा जैसे देश शामिल हैं। हर वर्ष इस संगठन में शामिल देशों के मुखिया वैश्विक मुद्दों, जिससें जलवायु परिवर्तन, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था शामिल हैं, पर चर्चा के लिए इकट्ठा होते हैं। ट्रंप ने इस वर्ष कोरोना वायरस की वजह से जी7 सम्मेलन को सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है।
चीन बोल-कोशिशें असफल रहेंगी
ट्रंप की इच्छा है कि 'पुराने' पड़ चुके इस संगठन को जी10 या फिर जी11 तक लेकर जाना चाहिए जिसमें भारत समेत तीन देशों करे भी जगह दी जानी चाहिए। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की तरफ से मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप के भारत समेत तीन देशों को संगठन में शामिल करने की योजना के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया मांगी गई। झाओ ने कहा, 'चीन मानता है कि सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों और कॉन्फ्रेंसेज को देशों के बीच आपसी भरोसे को बढ़ाने में मदद करनी चाहिए, दुनिया में शांति और विकास में बढ़ावा देना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा, 'हम मानते हैं कि यह दुनिया में अधिकांश देशों के पास भारी बहुमत है और उनका रोल काफी अहम हो जाता है। चीन के खिलाफ कोई भी घेराबंदी पूरी तरह से असफल और अलोकप्रिय रहेगी।'












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