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कैसे लाया जाता है अमेरिका में राष्‍ट्रपति के खिलाफ महाभियोग और क्‍या वाकई जा सकती है डोनाल्‍ड ट्रंप की कुर्सी

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    वॉशिंगटन।अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को उनके पूर्व वकील माइकल कोहेन की वजह से महाभियोग का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति के कैंपेन एडवाइजर रहे माइकल कापुतो की ओर से यह चेतावनी दी गई है। कोहेन से पहले ट्रंप के पूर्व कैंपेन मैनेजर पॉल मानाफोर्ट को भी वर्जिनिया के अलेक्‍जेंड्रिया कोर्ट में आठ वित्‍तीय अपराधों का दोषी करार दिया गया है। मानाफोर्ट को रूस से जुड़ी स्‍पेशल काउंसल रॉबर्ट मुलर की जांच के तहत हुए पहले ट्रायल में दोषी माना गया है। इन दोनों ही घटनाक्रमों के बाद अब डोनाल्‍ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की चर्चा भी तेज हो गई है। जानिए क्‍या होता है महाभियोग और क्‍या वाकई ट्रंप की विदाई इस महाभियोग के बाद तय है। ट्रंप से पहले पूर्व अमेरिकी राष्‍ट्रपति बिल क्लिंटन महाभियोग की प्रक्रिया से गुजर चुके थे।

    क्‍या होता है महाभियोग

    क्‍या होता है महाभियोग

    अमेरिकी संविधान के मुताबिक प्रतिनिधि सभा में बहुमत के बाद न सिर्फ राष्‍ट्रपति बल्कि किसी भी असैन्‍य अधिकारी या फि प्रांतीय सरकार के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। महाभियोग तब लाया जाता है जब इन पर देशद्रोह, घूस या फिर उच्‍च श्रेणी के अपराधों में शामिल होने का शक हो। सदन की न्‍यायिक समिति इन आरोपों की जांच करती है और फिर अगर जरूरत होती है तो फिर रजामंदी के बाद आरोप तय किए जाते हैं। इसके बाद सदन की तरफ से इन आरोपों पर वोटिंग होती है। अगर महाभियोग के पक्ष में वोट जाते हैं तो फिर आर्टिकल्‍स को सीनेट को सौंप दिया जाता है।

    दो तिहाई वोट जरूरी

    दो तिहाई वोट जरूरी

    सीनेट एक कोर्ट की तरह काम करती है और अमेरिका के चीफ जस्टिस इस कोर्ट की अध्‍यक्षता करते हैं। इसके बाद केस की सुनवाई के लिए सीनेटर्स के बीच से ही मैनेजर नियुक्‍त किए जाते हैं। आरोपी ट्रायल के दौरान अपना डिफेंस पेश कर सकता है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद सीनेट महाभियोग के हर आर्टिकल पर वोट करती है। अगर दो तिहाई सदस्‍य आरोपी को दोषी मानते हैं तो ही दोष सिद्ध हो सकता है। अगर डोनाल्‍ड ट्रंप के खिलाफ यह होता है तो फिर सीनेट उन्‍हें कोई भी सजा दे सकती है। हो सकता है कि ट्रंप को उनके ऑफिस से हटा दिया जाए या फिर उन्‍हें फेडरल अथॉरिटी को दोबारा हासिल करने से बैन कर दिया जाए। यानी हो सकता है कि वह दोबारा चुनाव न लड़ पाएं। हालांकि महाभियोग को लेकर अमेरिकी विशेषज्ञों के अंदर ही मतभेद हैं।

    क्‍या तय होगा ट्रंप पर महाभियोग

    क्‍या तय होगा ट्रंप पर महाभियोग

    अमेरिका के पूर्व कैंपेन एडवाइजर रहे ब्रायन कलास की मानें तो मंगलवार को भी हुआ है उसने ट्रंप को राजनीतिक और कानूनी तौर पर बड़े स्‍तर पर नुकसान पहुंचाया है। अब जबकि उनके पूर्व वकील मूलर जांच में सहयोग कर सकते हैं तो उन पर खतरा बहुत बढ़ गया है। उनका कहना है कि हो सकता है कि ट्रंप के खिलाफ महाभियोग को अंजाम दिया जाए या फिर हो सकता है कि वह अपना कार्यकाल ही न पूरा कर पाएं। उनकी मानें तो अब इन दोनों ही बातों की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि डेमोक्रेट्स और निर्दलीय प्रतिनिधियों के बीच भावना जोर पकड़ रही है कि वह अपराधियों से घिरे हुए हैं। नवंबर में होने वाले मध्‍यावर्ती चुनावों को ट्रंप के खिलाफ विशाल जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा है। इन चुनावों के बाद तय होगा कि ट्रंप के खिलाफ महाभियोग लाया जाए या नहीं। चुनावों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी की पकड़ मजबूत हो सकती है।

    नवंबर में डेमोक्रेट्स ने की थी कोशिश

    नवंबर में डेमोक्रेट्स ने की थी कोशिश

    पिछले वर्ष नवंबर में भी छह डेमोक्रेट्स राष्‍ट्रपति ट्रंप के खिलाफ पांच आरोपों के आधार पर महाभियोग लेकर आए थे। इनमें सबसे अहम था एफबीआई डायरेक्‍टर जेम्‍स कोमे को हटाना। इन डेमोक्रेट्स सांसदों का मानना था कि ऐसा करके ट्रंप ने रूस से जुड़ी एफबीआई की जांच को नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा डेमोक्रेट्स ने संविधान में मौजूद विदेशी और घरेलू नियमों के उल्‍लंघन का भी आरोप लगाया था। इन नियमों के तहत विदेशी सरकारों से राष्‍ट्रपति कोई तोहफा नहीं ले सकते हैं और न ही इन गिफ्ट्स के जरिए उनके ऑफिस को फायदा पहुंचाया जाना चाहिए। लेकिन सदन में रिपब्लिकन पार्टी के दबाव की वजह से यह प्रस्‍ताव असफल हो गया। साथ ही डेमोक्रेटिक पार्टी की नैंसी पेलोसी ने भी इसका समर्थन करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि यह बहुत ही इमैच्‍योर कदम है।

    महाभियोग से नहीं गई राष्‍ट्रपति की कुर्सी

    महाभियोग से नहीं गई राष्‍ट्रपति की कुर्सी

    अभी तक किसी भी अमेरिकी राष्‍ट्रपति को महाभियोग की वजह से अपना ऑफिस नहीं छोड़ना पड़ा है। विशेषज्ञों की मानें तो राष्‍ट्रपति के खिलाफ महाभियोग एक जटिल प्रक्रिया है और इसकी वजह से सरकार की मुश्किलें कई गुना तक बढ़ जाती है। मीडिया का दबाव बढ़ता है और व्‍हाइट हाउस दुनिया के सामने मजाक का पात्र बन सकता है। साल 1868 में एंड्रयू जॉनसन को उनके सेक्रेटरी ऑफ वॉर एडविन मैक्‍मास्‍टर्स को हटाने के वजह से महाभियोग का सामना करना पड़ा था। लेकिन एंड्रयू बच गए थे क्‍योंकि सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा था।

    आखिरी बार क्लिंटन ने किया था सामना

    आखिरी बार क्लिंटन ने किया था सामना

    वहीं रिचर्ड निक्‍सन ने वॉटरगेट स्‍कैंडल के सामने आने के बाद अपना इस्‍तीफा सौंप दिया था। हालांकि उस समय उनके खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई शुरू हो चुकी थी। साल 1998 में डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्‍ट्रपति रहे बिल क्लिंटन को महाभियोग का सामना करना पड़ा था लेकिन वह साल 1999 में सीनेट की ओर से लगाए गए आरोपों से बरी हो गए थे। इस तरह से उनकी कुर्सी भी बच गई थी। क्लिंटन को व्‍हाइट हाउस इंटर्न मोनिका लेंविस्‍की के साथ अफेयर की वजह से महाभियोग का सामना करना पड़ा था।

    क्‍या है ट्रंप की मुसीबत की वजह

    क्‍या है ट्रंप की मुसीबत की वजह

    मंगलवार को कोहेन को ट्रंप के लिए काम करने के दौरान टैक्‍स में धोखाधड़ी, बैंक को गलत स्‍टेटमेंट देने और कैंपेन के लिए जरूरी वित्‍तीय नियमों के उल्‍लंघन का दोषी पाया गया है। कोहेन को आठ आरोपों में दोषी माना गया है। ट्रंप के पूर्व कैंपेन मैनेजर पॉल मानाफोर्ट को भी वर्जिनिया के अलेक्‍जेंड्रिया कोर्ट में आठ वित्‍तीय अपराधों का दोषी करार दिया गया है। मानाफोर्ट को रूस से जुड़ी स्‍पेशल काउंसल रॉबर्ट मुलर की जांच के तहत हुए पहले ट्रायल में दोषी माना गया है। ट्रंप पर हमेशा से ही यह आरोप लगते आ रहे हैं कि उनकी टीम में झूठ और धोखा देने वाले लोगों को जगह मिल रही है। कोहेन और मानाफोर्ट से पहले ट्रंप के एनएसए यानी राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे माइकल फ्लिन और ट्रंप के विदेश नीति के सलाहकार रहे जॉर्ज पापाडोपोउलस ने भी यह स्‍वीकार किया था कि उन्‍होंने रूस के साथ ट्रंप के कैंप की करीबी को लेकर झूठ बोला था।

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    English summary
    The conviction of Donald Trump's former lawyer and the admission of guilt by another over a string of financial misdemeanours have once more raised the question of impeaching him.

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