Trump Canada Row: ट्रंप का बड़ा एक्शन! बोर्ड ऑफ पीस से बाहर हुआ कनाडा, क्या 1 बिलियन डॉलर बना विवाद की वजह?

Trump Canada Diplomatic Row: स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच जुबानी जंग अब एक गंभीर कूटनीतिक विवाद में बदल गई है।

ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए अपने ड्रीम प्रोजेक्ट 'बोर्ड ऑफ पीस' का औपचारिक ऐलान तो कर दिया, लेकिन इसमें अपने पड़ोसी देश कनाडा के लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं।

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कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को संबोधित करते हुए ट्रंप ने लिखा, "कृपया इस पत्र को कनाडा के शामिल होने के निमंत्रण की वापसी के रूप में स्वीकार करें।" ट्रंप ने यह फैसला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए साझा किया।

Trump Board of Peace Invitation: क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस'?

इस बोर्ड की शुरुआत इसी हफ्ते दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान हुई थी। शुरुआत में इसे गाजा में युद्धविराम और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए बनाया गया था, लेकिन अब इसको वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में किया गया है।

डोनाल्ड ट्रंप खुद इस संस्था के चेयरमैन होंगे। इस बोर्ड में 'स्थायी सीट' पाने के लिए सदस्य देशों को 1 बिलियन डॉलर (लगभग 8300 करोड़ रुपये) का योगदान देने के लिए कहा गया है। यही 1 अरब डॉलर की फीस पूरे विवाद की जड़ बना है। गौरतलब है कि बोर्ड ऑफ पीस को शुरुआत में एक अस्थायी निकाय बताया गया था, लेकिन बाद में इसके स्थायी स्वरूप और सदस्य देशों से भारी आर्थिक योगदान की मांग ने कई देशों को असहज कर दिया।

Mark Carney Davos Speech: 'विस्फोटक' भाषण बना विवाद की जड़?

इस कूटनीतिक दरार के पीछे पीएम मार्क कार्नी का वह भाषण बताया जा रहा है, जिसकी दावोस में काफी चर्चा हुई। कार्नी ने अपने संबोधन में अमेरिका के 'नियम-आधारित विश्व व्यवस्था' को तोड़ने और ट्रंप के आक्रामक व्यवहार की आलोचना की थी।

मार्क कार्नी ने अपने भाषण में कहा कि अमेरिका के प्रभुत्व वाली पुरानी व्यवस्था अब दरक रही है और मझोले देशों (जैसे कनाडा) को अब अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अपनी संप्रभुता और अलग पहचान पर ध्यान देना चाहिए। कार्नी के भाषण से भड़के ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा, "कनाडा सिर्फ अमेरिका की वजह से जिंदा है। मार्क, अगली बार कोई भी बयान देने से पहले यह याद रखना।"

Board of Peace 1 Billion Dollar Fee: कनाडा ने फीस देने से भी किया इनकार

कनाडा और अमेरिका के बीच तनाव का एक और बड़ा कारण 'बोर्ड ऑफ पीस' की भारी-भरकम फीस भी है। कनाडा के वित्त मंत्री फ्रैंकोइस-फिलिप शैम्पेन ने स्पष्ट कर दिया था कि कनाडा इस बोर्ड में सीट पाने के लिए 1 बिलियन डॉलर की राशि नहीं देगा। कनाडा का तर्क है कि जिस संस्था को अस्थायी रूप से गाजा के लिए बनाया गया था, उसे अब जबरन एक स्थायी अंतरराष्ट्रीय बॉडी का रूप दिया जा रहा है।

ट्रंप की "अमेरिका की वजह से जिंदा है" वाली टिप्पणी पर मार्क कार्नी ने गुरुवार को करारा जवाब दिया। उन्होंने क्यूबेक सिटी में कहा, "कनाडा अमेरिका की वजह से जिंदा नहीं है, बल्कि कनाडा इसलिए फल-फूल रहा है क्योंकि हम कनाडाई हैं।"

ट्रंप द्वारा निमंत्रण वापस लेना यह दर्शाता है कि दूसरे कार्यकाल में भी उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति सहयोगियों के साथ रिश्तों में दरार डाल सकती है। जहां एक ओर इजराइल, सऊदी अरब और तुर्की जैसे 35 देशों ने इस चार्टर पर हस्ताक्षर किए हैं, वहीं कनाडा और कई यूरोपीय देश ट्रंप की इस नई व्यवस्था से दूरी बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह टकराव अमेरिका-कनाडा संबंधों को और प्रभावित करता है या फिर दोनों देश किसी नए संतुलन की ओर बढ़ते हैं।

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