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अरे विदेशों में भी तो देखिए दिवाली का उत्साह

नई दिल्ली (विवेक शुक्ल)। दीपावली का पर्व अकेले भारत में ही धूमधाम से नहीं मनाया जाता बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में दीप पर्व अपनी छटा बिखेरता है। जिन देशों में हिंदुओं और सिखों की बड़ी आबादी है, वहां तो रोशनी का जलसा देखते ही बनता है। श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी, मॉरीशस, केन्या, तंजानिया, दक्षिण अफ्रीका, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो, नीदरलैंड्स, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में दीपावली मनाई जाती है।

diwali

कैरेबियाई देशों में त्रिनिदाद और टोबैगो में बड़ी संख्या में भारतीय बसे हैं और वहां खूब धूमधाम से दीपावली मनाई जाती है। लोग घरों में पूजा करते हैं और रोशनी से घर जगमगा उठते हैं।सागर तट से करीब 6कि.मी. की दूरी पर स्थित त्रिनिदाद और टोबेगो की लगभग 13 लाख की आबादी में से 22.5 प्रतिशत हिन्दू हैं। त्रिनिदाद के उच्चायुक्त पंडित मणिदेव प्रसाद ने बताया कि 1845 में भारतवंशियों की पहली टुकड़ीत्रिनिदाद पहुंची थी। उसी वर्ष से वहां दीवाली का उत्सव मनाया जाता है।

त्रिनिदाद और टोबेगो

त्रिनिदाद और टोबेगो में दीपावली के पर्व पर राष्ट्रीय अवकाश होता है। बताते चले कि महानबल्लेबाजब्रायनलारा का संबंध त्रिनिदाद से ही है। त्रिनिदाद के करीबी देशगुयाना में भी हिन्दुओं की तादाद खासी है। वहां पर भी आलोक पर्व को बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है। गुयानाके तत्कालीन राष्ट्रपति छेदी जगन को इस बात का गौरव हासिल है कि वे पहले भारतीय मूल के शख्स थे,जिन्हें देश से बाहर राष्ट्राध्यक्ष बनने का गौरव मिला। वे 1961 में गुयाना के राष्ट्रपति बने थे।

त्रिनिदाद और टोबेगो और गुयानामें त्योहारों की धूम गणेश जयंती के साथ ही शुरू होती है। गणेश जयंती के बाद 15 दिनों तक पितृपक्ष, उसके बाद नवरात्रि, रामलीला आदि उत्सव मनाए जाते हैं। फिर मनाई जाती है दीपावली। त्रिनिडाड के पूर्व प्रधानमंत्री वासुदेव पांडे बताते हैं कि त्रिनिडाड के किसी भी छोटे-बड़े शहर कादीपावली पर नजारा भारत के किसी गांव की तरह का होता है। भारत के विपरीत घरों और अन्य इमारतों पर लोग तेल के दीये जलाए जाते हैं।

जब ये सारे दीपावली की रात को एक साथ प्रकाशमय होते हैं,तो मंजर अदभूत होता है। वहां पर बिजली के बल्ब लगाकर आलोक सज्जा करने का सिलसिला नहीं शुरू हुआ है। पोर्ट ऑफ स्पेन शहर के तो एक बड़े चौराहे का नाम ही दिवालीस्ट्रीट है। अंग्रेज भारत के मुखय रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को गन्ने के खेतों में खेती करवाने के लिए इन देशों में लेकर गए थे।

जैसे-जैसे भारतीय प्रवासियों की संख्या बढ़ रही है वैसे-वैसे दीपावली मनाने वाले देशों की संख्या भी बढ़ रही है। कनाडा में तेज आवाज वाले पटाखे छोड़ने पर रोक है। यहां अलग-अलग केंद्र हैं, जहां पर भारतीय अपने त्योहार मनाने के लिए एकत्र होते हैं। दीपावली वाले दिन भारतीय अपने घरों को रोशनी से सजाते हैं और शाम को दीपावली उत्सव के लिए इकट्ठे हो जाते हैं। कई बार तो हमने भारतीय दूतावास में भी दीपावली मनाई है।

नेपाल में पांच दिन की दीवाली

नेपाल के काठमांडो में दीपावली का पर्व पांच दिन मनाया जाता है। परंपरा वैसी ही है जैसी भारत की है। थोड़ी भिन्नता भी है। पहले दिन कौवे को, दूसरे दिन कुत्ते को भोजन कराया जाता है। लक्ष्मी पूजा तीसरे दिन होती है। इस दिन से नेपाल संवत शुरू होता है इसलिए व्यापारी इसे शुभ दिन मानते हैं। चौथा दिन नए साल के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन महापूजा होती है और बेहतर स्वास्थ्य की कामना की जाती है।

पांचवा दिन भाई टीका होता है, जब बहनें भाइयों का तिलक करती हैं।अगर बात अफ्रीकी देश मारीशस की करें तो वहां भारतवंशीदीपावली पर लक्ष्मी पूजन पूरी विधि के अनुसार ही करते हैं। भारत के विपरीत वहां पर मिठाइयां घरों में ही पकाने की ही रिवायत है। सबसे गौरतलब बात यह है कि दिवाली के दिन भारतवंशीपरम्परगत भारतीय वेषभूषा मे ही होती हैं।

दक्ष‍िण अफ्रीका में दीवाली

अगर बात दक्षिण अफ्रीका की करें तो भारतीय समुदाय बहुल इलाकों जैसे जोहांसबर्ग के निकट लेनासिया और चैट्सवर्थ और डरबन के फोनेक्स में दीपावली बहुत ही भव्य तरीके से मनाई जाती है। दक्षिण अफ्रीका के भारतीय मूल के लोगों में दीपावली

के त्योहार की तैयारियां काफी जोर-शोर से चलती हैं। भारतीय मूल के लोग महंगी मिठाइयां, लैंप्स और उपहार खरीद कर रोशनी का उत्सव मनाने के लिए एकत्र हो रहे हैं।श्रीलंका में तमिल समुदाय के लोग इस दिन तेल स्नान के बाद नए कपड़े पहनते हैं और ‘पोसई' (पूजा) कर बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है। शाम को पटाखे छोड़े जाते हैं।

मलेश‍िया कैसे रह सकता है पीछे

अगर बात मलेशिया की करें तो वहांपर हिंदू सूर्य कैलेंडर के सातवें माह में दीपावली मनाई जाती है।उल्लेखनीय है कि मलेशिया में लगभग 20 लाख भारतीय हैं, जिनमें से अधिकांश हिंदू हैं। ये सभी ब्रिटिश काल में यहां आए थे। सिंगापुर में इस दिन सरकारी छुट्टी रहती है। वहां की दीपावली देखकर लगता है जैसे ‘नन्हे भारत' में दीपावली मनाई जा रही है। वहां ‘हिन्दू एंडार्समेंट बोर्ड ऑफ सिंगापुर' कई सांस्कृतिक आयोजन करता है।

ब्रिटेन में भी दीप पर्व मनाया जाता है और लीसेस्टर में तो बहुत बड़ा आयोजन होता है। अमेरिका में वर्ष 2009 में पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर बराकओबामा ने व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में दीवाली का परंपरागत दीया जलाया था।

ऑस्ट्रेलिया में विष्णु मंदिर में रौनक

ऑस्ट्रेलिया में भी दीपावली की धूम रहती है और मेलबोर्न में तो श्री शिवविष्णु मंदिर में दीपावली की रौनक देखते ही बनती है। न्यूजीलैंड में भी रह रहे भारतीय रोशनी का पर्व मनाते हैं।वजह बताने की जरूरत नहीं है कि इन दोनों देशों में खासी तादाद में भारतवंशी हैं। दोनों में हीदीपावली पर सार्वजनिक अवकाश रहता है उधर, मारीशस में दीपावलीसे एक हफ़्ता पहले से ही बाजार भारतवंशियों की तरफ से की जाने वाली खरीददारी के कारण अटने लगते हैं। मारीशस में भारतवंशीदीपावलीके साथ-साथ शिवरात्रि को भी बड़े मन से मनाते हैं। तो आपके साथ दीवाली दुनिया के तमाम भागों में भारतवंशी पूरी श्रद्धा के भाव के साथ मनाएँगे।

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