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चीन में 'ड्रैगन मैन' की विशालकाय खोपड़ी पर खुलासा, क्या फिर से लिखी जाएगी मानव सभ्यता की कहानी?

पिछले एक हफ्ते में मानव सभ्यतो को लेकर दो बेहद महत्वपूर्ण खोज हुए हैं। इससे पहले इजरायल के तेल अवीव में भी इंसानों की एक नई प्रजाति की खोज की गई है। वहीं, चीन में तो किसी विशालकाय मानव की खोपड़ी मिली है।

बीजिंग/नई दिल्ली, जून 26: करीब 90 साल पहले एक चीनी कुएं से मिली एक विशालकाय जीवाश्म खोपड़ी की खोज ने वैज्ञानिकों को मानव विकास की कहानी को फिर से लिखने के लिए मजबूर किया है। ये इंसानी खोपड़ी आम इंसानों की तुलना में काफी बड़ी है और अब पता चल रहा है कि ये इंसानों की एक नई प्रजाति है, जिसे फिलहाल ड्रैगन मैन कहा जा रहा है। अवशेषों के विश्लेषण से पता चला है कि इसकी वंशावली निएंडथरल को आधुनिक इंसानों के नजदीकी संबंधी होने की बात से पर्दा हटा सकती है।

'ड्रैगन मैन' पर खुलासा

'ड्रैगन मैन' पर खुलासा

चीनी शोधकर्ताओं ने इस असाधारण जीवाश्म खोपड़ी को एक नई मानव प्रजाति, होमो लोंगी या "ड्रैगन मैन" नाम दिया गया है, हालांकि दूसरे विशेषज्ञ चीनी रिसर्चर द्वारा दिए गये इस नाम को लेकर काफी सतर्क हैं। लंदन में प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के रिसर्च प्रोफेसर क्रिस स्ट्रिंगर ने कहा कि 'मुझे लगता है कि यह पिछले 50 सालों की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक है," यह एक आश्चर्यजनक रूप से संरक्षित किया गया जीवाश्म है। आपको बता दें कि इस खोपड़ी की खोज करीब 85 से 90 साल पहले की गई थी और फिर इसे संरक्षित कर दिया गया था। 2018 में फिर से इस खोपड़ी को लेकर रिसर्च शुरू हुआ था।

कहां थी 'ड्रैगन मैन' की खोपड़ी

कहां थी 'ड्रैगन मैन' की खोपड़ी

पिछले एक हफ्ते में मानव सभ्यतो को लेकर दो बेहद महत्वपूर्ण खोज हुए हैं। इससे पहले इजरायल के तेल अवीव में भी इंसानों की एक नई प्रजाति की खोज की गई है। वहीं, चीन में तो किसी विशालकाय मानव की खोपड़ी मिली है। रिपोर्ट के मुताबित ड्रैगन मैन की खोपड़ी को 1930 के दशक में हेइलोगजियांग नाम के प्रांत के एक शहर में खोजा गया था। लेकिन उस वक्त जापानी सेना से बचाने के लिए खोपड़ी को एक कुएं में छिपाकर रख दिया गया था, दो 85 सालों तक यूं ही कुएं में दबी रही। 2018 में बेबेई जियो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को इस इंसानी जीवाश्म पर खोज करने के लिए कहा गया था। रिसर्च के दौरान कार्बन डेटिंग के जरिए जब रिसर्च की गई तो पता चला कि ये विशालकाय इंसानी खोपड़ी करीब एक लाख 46 हजार साल पुरानी है। इस खोपड़ी में आदिम और अत्याधुनिक विशेषताओं का एक अनूठा मिश्रण है। ये खोपड़ी चेहरे के साथ, खासकर अधिक बारीकी से होमो सेपियन्स जैसा दिखता है, जिसमें एक विशाल दाढ़ बनी हुई है।

खोपड़ी पर खुलासा

खोपड़ी पर खुलासा

द इनोवेशन जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक. ड्रैगन खोपड़ी करीब 23 सेंटीमीटर लंबी और 15 सेंटीमीटर चौड़ी है और ये सामान्य इंसान की तुलना में काफी ज्यादा बड़ी खोपड़ी है। आधुनिक मानव मस्तिष्क की तुलना में इस खोपड़ी में 1420 मिलीलीटर जगह ज्यादा है। स्ट्रिंगर ने अपनी रिसर्च के दौरान कहा कि 'खोपड़ी के विश्लेषण से पता चला है कि इसकी भौंहे बड़ी बड़ी होंगी, चेहरा चौकोर और काफी बड़ा होगा। आंखें काफी बड़ी बड़ी होंगी। लेकिन, इतने बड़े आकार के बाद भी ये खोपड़ी सामान्य इंसानों की तुलना में नाजुक है। इसका सिर काफी बड़ा रहा होगा।'। शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि ये खोपड़ी करीब 50 साल उम्र के एक पुरुष की थी, जो एक प्रभावशाली शारीरिक बनावट का रहा होगा। उनकी चौड़ी, उभरी हुई नाक की वजह से उसके शरीर में काफी ज्यादा मात्रा में हवा जाती होगी। जिससे पता चलता है कि वो इंसान काफी मेहनत वाले काम करते होंगे। जबकि शरीर के विशाल आकार से वो क्रूर ठंढ का सामना करते होंगे। हेबेई के एक जीवाश्म विज्ञानी प्रोफेसर ज़िजुन नी ने कहा कि "ऊंचाई का अनुमान लगाना कठिन है, लेकिन विशाल सिर आधुनिक मनुष्यों के औसत से अधिक ऊंचाई से मेल खाना चाहिए।"

होमोसेपियन्स से काफी अलग

रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि हार्बिन क्रेनियन एक पुरातन मानवों के स्वरूप को दिखा रहा है, जो पुरातन और विकसीत होती सभ्यते का मिला-जुला रूप है, जो उसे उससे पहले अस्तित्व में आए मानव, जिन्हें होमोसेपियन्स कहा जाता है, उससे अलग करता है। इस खोपड़ी का नाम लॉन्ग जियांग से लिया गया है, जिसका मतलब ड्रैगन रिवर होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि उस वक्त धरती पर काफी ज्यादा ठंढ़ थी, लिहाजा उस समय के इंसान काफी ज्यादा ठंढ़ को बर्दाश्त करते होंगे। वैज्ञानिकों का मानना है कि होमो लोंगी बेहद कठोर वातावरण में रहा करते थे और वो पूरे एशिया में फैले थे।

कैसे बनाया गया वंश वृक्ष?

कैसे बनाया गया वंश वृक्ष?

रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों की टीम ने क्रैनियम की बाहरी आकृति पर रिसर्च करीब 600 से ज्यादा गुणों के आधार पर किया है और फिर कम्प्यूटर मॉडल में लाखों सिम्यूलेशन चलाए गये, ताकि ये जीवाश्म धरती पर मौजूद किसी दूसरे इंसानी जीवाश्म से मेल खा जाए और फिर वंशवृक्ष का निर्माण कर सके। वैज्ञानिक स्ट्रिंगर के मुताबिक रिसर्च में पता चला है कि हार्बिन और चीन के दूसरे जीवाश्म निएंडरथाल और होमोसेपियन्स के बाद के इंसानों में तीसरी पीढ़ी के थे। रिसर्च के मुताबिक यदि होमो सेपियन्स पूर्व एशिया तक पहुंचे थे, तब होमों लोंगी वहां मौजूद थे, तो उनमें आपस में मिश्रण से तीसरी प्रजाति का निर्माण हो सकता है। हालांकि, अभी तक ये स्पष्ट नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि इंसानी सभ्यता के शुरू होने को लेकर अभी सैकड़ों रहस्य बरकरार हैं और अभी कई सालों तक हमें अपनी इंसानी विकास की थ्योरी में परिवर्तन करना पड़ेगा।

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