सूर्य से 50 गुना बड़े तारे की खोज

नासा ने इयरेंडल की यह तस्वीर जारी की है जिसे तीर के निशान से दिखाया गया है

वॉशिंगटन,31 मार्च। हालांकि यह चमकदार नीला तारा पहले ही खत्म हो चुका है, यह इतना बड़ा था कि बनने के कुछ करोड़ साल बाद ही छोटे छोटे टुकड़ों में बंट गया. इसके तुरंत टूटने की घटना अनोखी थी और इसी वजह से एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने इसे हबल अंतरिक्ष दूरबीन की मदद से देखा. सुदूर तारों से निकले प्रकाश को हम तक पहुंचने में बहुत लंबा समय लग जाता है.

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इस तारे पर हुए रिसर्च की रिपोर्ट प्रतिष्ठित साइंस जर्नल 'नेचर' में छपी है. जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के छात्र और रिसर्च रिपोर्ट के लेखक ब्रायन वेल्श का कहना है, "हम लोग तारे को उस रूप में देख रहे हैं जैसा वह 12.8 अरब साल पहले था, जो इसे बिग बैंग के 90 करोड़ साल बाद का बता रहा है. निश्चित रूप से हम खुशकिस्मत हैं."

भोर का तारा

उन्होंने इसे एयरेंडल नाम दिया है. यह अंग्रेजी का एक पुराना नाम है जिसका मतलब है भोर का तारा या उगता हुआ तारा. यह नाम काफी सटीक है क्योंकि जिस वक्त में इस तारे की मौजूदगी बताई गई है वह ब्रह्मांड का सवेरा ही था.

इससे पहले हबल के जरिए जो सबसे पुराना तारा देखा गया था वो करीब 9.4 अरब साल पहले बना था. यानी की बिग बैंग के 4 अरब साल बाद.

सुदूर अंतरिक्ष के रहस्यों को समझने में हब्बल जैसी दूरबीनों से मदद मिल रही है

दोनों ही मामलों में अंतरिक्षविज्ञानियों ने तारे के अतिसूक्ष्म प्रकाश को बढ़ाने के लिए ग्रेविटेशनल लेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया. हमारा आसपास की आकाशगंगाओं को फोरग्राउंड में रखने पर ये बैकग्राउंड की छोटी चीजों को बढ़ा कर देखने में लेंस का काम करती हैं. अगर ऐसा नहीं किया जाता तो इकेरस और इयरेंडल को देख पाना संभव नहीं होता क्योंकि उनकी दूरी बहुत ज्यादा है.

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हबल ने बिग बैंग के बाद 30 से 40 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर आकाश गंगाओं को देखने में कामयाबी पाई है लेकिन उनके अलग अलग तारों को देख पाना असंभव है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिक जेन रिग्बी ने इस भी इस रिसर्च में हिस्सा लिया है. रिग्बी बताते हैं, "आमतौर पर सारे एक साथ चिपके होते हैं...लेकिन प्रकृति ने हमें एक ऐसा तारा दिया है जिसे खूब ज्यादा बढ़ा कर यानी हजारों गुना ज्यादा बढ़ा कर, जिससे कि हम इसका अध्ययन कर पाए."

सूरज से 50 गुना बड़ा

वैज्ञानिकों का कहना है कि हबल के आंकड़ों से पता चल रहा है कि इयरेंडल शायद बिंग बैंग के बाद बने पहली पीढ़ी के तारों में एक है. भविष्य में जेम्स वेब टेलिस्कोप की मदद से इस बारे में और जानकारी मिल सकेगी.

फिलहाल जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक यह हमारे सूर्य से 50 गुना ज्यादा बड़ा और तरकीबन 10 लाख गुना ज्यादा चमकीला था. इयरेंडल की छोटी मगर अभी परिपक्व ना हुई आकाशगंगाएं सर्पिल आकाशगंगाओं की तरह नजर आती हैं, ऐसी कई तस्वीरें हब्बल ने दूसरे आकाशगंगाओं की ली है.

वैज्ञानिकों ने हब्बल की मदद से कई ऐसी चीजें देखी हैं जिन से दुनिया अनजान थी

वैज्ञानिकों का कहना है कि इयरेंडल दो स्टार वाले तंत्र का प्रमुख सितारा या फिर तीन तारे या चार तारे वाले तंत्र का हिस्सा हो सकता है. इस तारे के एक ब्लै होल होने के भी कुछ कुछ आसार हैं. हालांकि 2016 और 2019 में जो जानकारी मिली उससे ऐसा लगता नहीं है.

बहरहाल तारे के आस पास जो कुछ भी हो यह महज कुछ ही करोड़ सालों तक इस रूप में रहा उसके बाद इसमें सुपरनोवा की तरह विस्फोट हुआ और जैसा कि ज्यादातर विस्फोटों को नहीं देखा जा सका है इसका भी यही हाल हुआ. अंतरिक्षविज्ञानियों ने जो अब तक का सबसे सुदूर सुपरनोवा विस्फोट देखा है वह 12 अरब साल पहले हुआ था.

यह तारा कितना बड़ा और कितना गर्म था और इसको जन्म देने वाली गैलेक्सी के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए हबल से 100 गुना ज्यादा ताकतवर दूरबीन चाहिए.

एनआर/आरपी (एपी, एएफपी)

Source: DW

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