डिनर डिप्लोमेसी से डिफेंस डील तक... US में मोदी-बाइडेन की करिश्माई बॉन्डिंग, इस हफ्ते बदल जाएगी दुनिया
Biden-Modi Meeting: साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद वैसे तो नरेन्द्र मोदी पांच बार अमेरिका जा चुके हैं, लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री का इस बार का वॉशिंगटन दौरा कई मायनें में बेहद खास होने वाला है। यकीन मानिए, इस हफ्ते के बाद से जियो-पॉलिटिक्स पूरी तरह से बदलने वाली है और अमेरिका में भारतीय प्रधानमंत्री का जिस तरह से गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया है, उसे देखकर यही संभावना जताई जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रथम महिला जिल बाइडेन ने वाशिंगटन डीसी में स्थित व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत किया। उन्हें करीब एक मिनट तक आपस में बातचीत करते देखा गया और फिर उन्होंने एक साथ तस्वीरें खिंचवाईं। व्हाइट हाउस के अनुसार, तीनों ने भारतीय थीम पर बनाए गये संगीत और डांस कार्यक्रम का आनंद लिया।

बाइडेन की डिनर डिप्लोमेसी
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए निजी डिनर कार्यक्रम रखा है, जिसमें चुनिंदा लोग ही मौजूद हैं। बताया जा रहा है, कि रात में होने वाले व्हाइट हाउस के डिनर कार्यक्रम से पहले दोनों नेता निजी डिनर कार्यक्रम में डिनर डिप्लोमेसी के लिए जुट रहे हैं।
व्हाइट हाउस के डिनर कार्यक्रम से एक दिन पहले बाइडेन ने ये अंतरंग डिनर कार्यक्रम का आयोजन किया है। उनके साथ अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन और उनके भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल भी शामिल हो रहे हैं। बताया जा रहा है, कि इस डिनर के दौरान दोनों देशों के नेता खुलकर अपनी-अपनी बात रखेंगे और अगली डील की तैयारी करेंगे।
इस दौरान बाइडेन परिवार की तरफ से भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हाथों से बनाया गया प्राचीन अमेरिकी किताब गिफ्ट की जाएगी। इसके अलावा भी कई और उपहार प्रधानमंत्री मोदी को बाइडेन परिवार की तरफ से सौंपे जाएंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबित, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, निजी डिनर कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक विंटेज अमेरिकी कैमरा भी उपहार में देंगे, जिसके साथ जॉर्ज ईस्टमैन के पहले कोडक कैमरे के पेटेंट का एक अभिलेखीय प्रतिकृति प्रिंट और अमेरिकी वन्यजीव फोटोग्राफी पर एक हार्डकवर पुस्तक होगी।
वहीं, अमेरिका की फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रॉबर्ट फ्रॉस्ट के 'कलेक्टेड पोयम्स' के पहले संस्करण की कॉपी भी भेंट करेंगी।
इससे पहले, आज वाशिंगटन डीसी में ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रिमझिम बारिश के बीच औपचारिक स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जिसके बाद भारतीय प्रधानमंत्री ने ट्वीट करते हुए कहा, कि "वाशिंगटन डीसी पहुंच गया। भारतीय समुदाय की गर्मजोशी और इंद्र देवता के आशीर्वाद ने आगमन को और भी खास बना दिया है।"
क्यों बदल जाएगी दुनिया की राजनीति?
जियो-पॉलिटिक्स में कहा जाता है, कि कोई भी देश किसी दूसरे देश का ना तो स्थाई दुश्मन होता है और ना ही स्थाई दोस्त। एक वक्त एक दूसरे के खिलाफ खड़े रहने वाले चीन और रूस, आज बेहतरीन संबंधों का आनंद ले रहे हैं, तो एक वक्त अमेरिका का पिट्ठू बना पाकिस्तान, चीन के खेमे में खड़ा है।
परमाणु परीक्षण के बाद भारत पर प्रतिबंध लगाने वाले अमेरिका ने 2000 के दशक में जब दुनिया की बदलती राजनीति को महसूस किया, तो उसके बाद उसने यूपीए के शासनकाल के दौरान भारत के साथ संबंधों में सुधार करना शुरू कर दिया और पहली बार तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने भारत को लेकर ऐतिहासिक बयान दिया। जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने अपने बयान में कहा था...
"भारत लोकतंत्र का एक महान उदाहरण है और भारत एक बहुत धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है। भारत में अनेकों धर्म है, लेकिन हर धर्म के लोग अपने अपने धर्म को लेकर सहज हैं। अब दुनिया को भारत की जरूरत है।" यानि, अमेरिका ने 2004 के बाद पहली बार माना, कि अब दुनिया को भारत की जरूरत है। साल 2004 के बाद अमेरिका ने भारत को लेकर अपनी नीति में परिवर्तन किया और फिर मोदी सरकार के कार्यकाल में दोनों देश रणनीतिक पार्टनर बन गये।
हालांकि, अभी भी भारत अमेरिकी खेमे में नहीं खड़ा है, बल्कि भारत रणनीति पार्टनर है, कोई सैन्य पार्टनर नहीं। भारत ने अपनी विदेश नीति से थोड़ा अलग रूख रखते हुए साफ शब्दों में दुनिया को बताया, कि भारत अब अपने हितों की बात करेगा और अपने हितों को देखते हुए वैश्विक संबंध बनाएगा।
लेकिन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वागत के लिए अमेरिका रेड कार्पेट बिछा चुका है और ये सिर्फ कहने की बात नहीं है, बल्कि हकीकत में अमेरिका, भारत के आगे 'प्रणाम' की मुद्रा में आ चुका है। पूरी दुनिया महसूस कर रही है, कि अमेरिका कमजोर हो रहा है और दुनिया को अब समझ में आ चुका है, कि अमेरिका की विदेश नीति पहली बार कमजोर हो रही है।
चीन और रूस के आगे अमेरिका बेबस नजर आ रहा है। लाख कोशिशों के बाद भी अमेरिका, रूस को यूक्रेन पर हमला करने से रोक नहीं पाया, तालिबान की हकीकत जानने के बाद भी अमेरिका को अफगानिस्तान छोड़कर भागना पड़ा और अब इंडो-पैसिफिक में चीन की आक्रामकता ने अमेरिका को डरा दिया है। सुपरपावर अमेरिका को पहली बार अपनी पॉजिशन को लेकर डर सता रहा है और पहली बार अमेरिका मान रहा है, कि भारत दुनिया की शक्ति बन चुका है।
लिहाजा, अमेरिका ने भारत को वो क्रिटिकल टेक्नोलॉजी देने का फैसला किया है, जिसे वो अपने सबसे ज्यादा करीबी सहयोगियों से भी शेयर नहीं करता है। लिहाजा, इस हफ्ते भारत और अमेरिका ऐतिहासिक तौर पर करीब आ रहे हैं और यकीनन इस हफ्ते, दुनिया की जियो-पॉलिटिक्स हमेशा के लिए बदलने वाली है।












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