हिरासत के दौरान सऊदी राजकुमारों को पीटा गया, अवैध संबंधों पर ब्लैकमेल किया फिर ट्रांसफर करवाए पैसे

रियाद। 2017 में सऊदी अरब में शाही परिवार के राजकुमारों और बड़े बिजनेसमैन की नजरबंदी के दौरान उनके टॉर्चर को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। तीन साल पहले राजधानी रियाद के आलीशान होटल में नजरबंद किए गए शाही घराने के अमीर शहजादों को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के आदेश पर बहुत बुरी तरह टॉर्चर किया गया था। इस दौरान शाही घराने के सदस्यों को पूरी-पूरी रात पीटा जाता था।

शहजादे और बिजनेसमैन लिए गए थे हिरासत में

शहजादे और बिजनेसमैन लिए गए थे हिरासत में

2017 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के आदेश पर सऊदी अरब के सत्ता में मजबूत दखल रखने वाले करीब 400 लोगों को हिरासत लेकर रियाद के रिट्ज कार्ल्टन होटल में रखा गया था। इनमें सऊदी अरब के कई राजकुमार, बिजनेसमैन और मंत्री शामिल थे। ये कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ बताई गई थी लेकिन इसे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सऊदी सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के तौर पर देखा गया था। इनमें से कई लोगों को बाद में छोड़ा गया था लेकिन इसके लिए इन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। इन सभी ने रिहाई के लिए 200 अरब डॉलर से अधिक की रकम अदा की थी।

अब तीन साल बाद इस हिरासत के दौरान हुई कार्रवाईयों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ब्रिटिश अखबार गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक इन राजकुमारों को पीटा गया था। ये खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब जी-20 देशों की मेजबानी सऊदी अरब करने जा रहा है।

आंख पर पट्टी बांधकर पीटा गया था

आंख पर पट्टी बांधकर पीटा गया था

एक सोर्स जो कि सऊदी अरब के बड़े लोगों में से एक है, ने गार्डियन को बताया कि हिरासत के दौरान उन्हें सुरक्षा अधिकारियों द्वारा पीटा गया था। इस दौरान दो मंत्री वहां मौजूद रहते थे जो इस पूरी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बेहद विश्वसनीय लोगों में थे।

सोर्स ने अखबार को बताया कि "हिरासत की पहली रात सभी को आंख पर पट्टी बांधकर रखा गया था। इस दौरान सभी को पूछताछ के नाम पर मिस्र की खुफिया एजेंसियों की 'नाइट ऑफ बीटिंग' की तर्ज पर पूरी रात पीटा गया था। सभी पूछ रहे थे कि उन्हें यहां क्यों लाया गया है लेकिन कोई बता नहीं रहा था। ज्यादातर को पीटा गया था, कुछ को बहुत ही बुरी तरह से। वहां लोगों को दीवार से लगाकर बांधा गया था। घंटों तक ये चलता रहा और टॉर्चर करने वाले सभी लोग सऊदी अरब के ही थे।" सोर्स ने बताया कि "ये सब उन्हें तोड़ने के लिए था और अगले दिन उनसे पूछताछ करने वाले पहुंचे।"

निजी संबंधों को लेकर किया गया था ब्लैकमेल

निजी संबंधों को लेकर किया गया था ब्लैकमेल

सोर्स ने बताया कि ये गलत धारणा बना दी गई थी कि हिरासत में लेने के पहले उनके बारे में सारी जानकारी जुटा ली गई थी। पूछताछ करने वालों को कुछ नहीं पता था। वे बस हवा हवाई बातें कर रहे थे। सऊदी अरब की संपत्तियों के बारे में तो उन्हें जानकारी थी लेकिन विदेश में संपत्ति के बारे में वे निश्चित नहीं थे। इसके लिए कुछ लोगों की जानकारियां सार्वजनिक करने की धमकी दी गई। इसमें शादी के बाहर संबंध जैसी निजी जानकारियां भी थीं।

इस दौरान हिरासत में लिए लोगों को ईमेल और फोन दिए गए और कहा गया कि वे जेनेवा स्थित बैंक में कॉल करके बड़ी रकम ट्रांसफर करने को कहें। लोगों ने जब कॉल किया तो बैंक ने बताया कि उनके खाते में कोई राशि नहीं है। जबकि पूछताछ करने वाले समझ रहे थे कि बैंक में कैश रखा हुआ है।

बैंक ने रोके थे कई बड़ी रकम के ट्रांसफर

बैंक ने रोके थे कई बड़ी रकम के ट्रांसफर

स्विस बैंक के बड़े अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर अखबार को बताया कि बैंक ने हिरासत के दौरान हुए ट्रांसफर को लेकर जांच शुरू की थी। इसमें सामने आया था कि कई सारे ट्रांसफर में ये पाया गया कि ये दबाव में किए गए थे। इनमें से कुछ को रोक दिया गया था क्योंकि इसके लिए सही तरीका नहीं अपनाया गया था जबकि कई ट्रांसफर हो गए थे।

हिरासत में लिए गए कुछ लोगों को समझ ही नहीं आ रहा था कि उनके साथ क्या हो रहा है। ये ऐसे लोग थे जो पीढ़ियों से राजसत्ता के वफादार और विश्वसनीय थे। इसने ये दिखाया था कि पूर्ण राजसत्ता है जहां पर शासक कुछ भी कर सकता है जो उसका मन करे।

अक्सर लोगों को पता नहीं था कि वे क्या चाह रहे हैं। कई मामलों में जब लोगों ने किसी भी डील से इनकार किया तो उन्हें सीधे ब्लैकमेल किया गया। सऊदी न्याय प्रणाली में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं थी जिसकी वो बात कर रहे थे।

हालांकि इन सबसे अलग क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इन सब पर भ्रष्टाचार में शामिल होने की बात कहते रहे हैं। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक 87 लोगों से 107 अरब डॉलर की वसूली की गई थी। वहीं गार्डियन के सूत्र के मुताबिक सऊदी अधिकारियों ने हिरासत के दौरान जो रकम वसूली थी वह 28 अरब डॉलर थी जो कि सऊदी के दावे से बहुत कम है।

MBS
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