देश छोड़कर भागने के बाद अपदस्थ राष्ट्रपति असद का पहला बयान, कहा-'शरण के लिए कभी भी एक विकल्प नहीं था'
सीरिया के अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद ने निर्वासन से एक उल्लेखनीय बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी अपने देश को छोड़ने या शरण लेने के विकल्प पर विचार नहीं किया। समाचार एजेंसी एएफपी द्वारा रिपोर्ट किए गए इस बयान में असद ने 8 दिसंबर को अपने शासन के पतन के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। उनके इस संदेश ने सीरिया के प्रति उनके गहरे संबंध और संघर्ष की भावना को रेखांकित किया।
20 साल के शासन का अंत, सीरिया से असद की विदाई
2000 में अपने पिता हाफिज अल-असद के तीन दशक लंबे शासन के बाद राष्ट्रपति बने बशर अल-असद का शासन जिसे कभी अजेय माना जाता था। 8 दिसंबर 2024 को अचानक समाप्त हो गया। उनकी सरकार को हयात तहरीर अल-शाम और उसके सहयोगी समूहों के तेज हमलों के आगे घुटने टेकने पड़े।

दमिश्क में बढ़ती अराजकता और आतंकवादी बलों की तेजी से बढ़त के बीच असद ने मास्को के समर्थन से 8 दिसंबर को सीरिया छोड़ दिया। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने कभी इस्तीफा देने या शरण लेने के बारे में नहीं सोचा।
असद का संघर्ष और आतंकवाद' पर हमला
असद ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और तथाकथित क्रांतिकारी ताकतों के खिलाफ अपनी लड़ाई को रेखांकित किया। उन्होंने दावा किया कि उनके शासन को गिराने के लिए गलत सूचनाओं का उपयोग किया गया और उनके राष्ट्रपति पद को चुनौती देने के प्रयासों की आलोचना की।
उनका कहना है कि भले ही उनके शासन का पतन हो गया। लेकिन उनका प्राथमिक उद्देश्य आतंकवादी हमले के खिलाफ लड़ाई को जारी रखना है। उन्होंने अपने देश के प्रति अपनी गहरी भावना को बरकरार रखने की बात कही।
मॉस्को में निर्वासन, लेकिन सीरिया के लिए प्रतिबद्धता
मॉस्को में निर्वासन में रहते हुए असद ने स्पष्ट किया कि उनका सीरिया के साथ संबंध अटूट है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि मैंने कभी भी शरण मांगने का विचार नहीं किया। क्योंकि मेरा सीरिया के साथ भावनात्मक और राष्ट्रीय बंधन गहरा और स्थायी है।
असद की विद्रोही भावना
अपने लगभग दो दशक के शासन के पतन के बावजूद असद के इस बयान में उनके विद्रोही रुख और संघर्ष की भावना का प्रदर्शन हुआ। उन्होंने अपने देश छोड़ने को एक पीछे हटने के बजाय आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की निरंतरता बताया।
बशर अल-असद का यह बयान उनके शासन के नाटकीय अंत और निर्वासन में उनकी वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालता है। हालांकि उनका शासन अब इतिहास बन चुका है। लेकिन उनका संदेश सीरिया के साथ उनके अटूट संबंध और आतंकवादी ताकतों के खिलाफ संघर्ष को सामने लाता है। निर्वासन में भी असद खुद को सीरिया के भविष्य के लिए संघर्षरत नेता के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।












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