इंडियन आर्मी के डॉक्टर पर चलेगा रेप केस, काबुल में लड़की से की थी धोखे से शादी... दिल्ली कोर्ट का बड़ा फैसला
डॉक्टर के वकील की तरफ से दलील दी गई थी, कि चूंकी मामला अफगानिस्तान का है, इसीलिए दिल्ली की अदालत के पास मुकदमा चलाने को लेकर आदेश देने के अधिकार नहीं है। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

Delhi court orders prosecution of senior Army doctor: दिल्ली की एक अदालत ने अफगान महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा है, कि सेना के एक सीनियर डॉक्टर पर 'बलात्कार' का मुकदमा चलाया जाएगा।
दिल्ली में चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने अफगान महिला के पक्ष में फैसला सुनाया है, जो अब करीब 32 साल की हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 में अफगानिस्तान से भारत आई महिला ने दिल्ली की अदालत में सेना के सीनियर डॉक्टर के खिलाफ 'पत्नी का दर्जा देने' या फिर 'बलात्कार' के मामले में मुकदमा चलाने के लिए याचिका दायर किया था।
जिसके बाद दिल्ली कोर्ट ने अब फैसला सुनाया है और सेना के सीनियर डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
अफगान महिला का दावा है, कि ये मामला साल 2006 का है, जब सेना का सीनियर डॉक्टर साल 2006 में काबुल में स्थिति इंदिरा गांधी अस्पताल में कार्यरत था और इस दौरान उससे शादी की थी। महिला का दावा है, कि सीनियर डॉक्टर ने इस्लामिक प्रथाओं के तहत उससे शादी की थी और उस दौरान वो 16 साल 2 महीने की थी।
अफगान महिला ने कोर्ट में कहा, कि सीनियर डॉक्टर ने उससे शादी करने की बात छिपाई, लिहाजा या तो उसे उसकी "वैध पत्नी" का दर्जा दिया जाना चाहिए या उस पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। शिकायत में कहा गया है, कि शादी के बाद वे अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में दोनों बतौर पति-पत्नी रह रहे थे।
लेकिन, शादी के कुछ हफ्तों के बाद सीनियर डॉक्टर अपने काम से संबंधित बात कहकर वापस भारत चला आया और उसके बाद कभी काबुल वापस नहीं लौटा। महिला ने कोर्ट में कहा, कि आरोपी डॉक्टर ने भारत जाने के कुछ हफ्तों के बाद उससे कहा, कि वो पहले से ही शादीशुदा है और भारत में उसके दो बच्चे हैं।
महिला ने अपनी शिकायत में कहा, कि बाद में उस डॉक्टर ने उसके या उसके रिश्तेदरों के फोन उठाना बंद कर दिया।
महिला ने अपने दर्द का किया जिक्र
शिकायत में महिला ने बाद के हालातों का जिक्र किया है, जिसमें उसने कहा है, कि वो किन परिस्थितियों में काबुल से दिल्ली आई और फिर डॉक्टर के खिलाफ घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज कराया और बाद में शिकायत दर्द कराया।
महिला की शिकायत में कहा गया है, कि वो दिल्ली हाईकोर्ट के अलावा कई अलग अलग न्यायिक मंचों पर अपनी शिकायत लेकर गई और इंसाफ की अलील की। जिसके बाद दिल्ली की मजिस्ट्रेट अदालत ने आदेश पारित करते हुए कहा, कि भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत बलात्कार के अपराध के लिए सेना के डॉक्टर पर मुकदमा चलाया जाए।
दिल्ली की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सोनिका ने फैसला सुनाते हुए कहा, कि "रिकॉर्ड के अवलोकन से पता चलता है, कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था, कि आरोपी ने उसके साथ यौन संबंध बनाए थे...आरोपी ने स्वीकार किया था कि कथित अपराध के समय उसकी शादी किसी अन्य व्यक्ति के साथ हुई थी।"
आदेश में कहा गया है, कि शिकायतकर्ता ने अपने और आरोपी के बीच विवाह समारोह के वीडियो वाली सीडी रिकॉर्ड के तौर पर कोर्ट में पेश किया गया था, जिसे एएसएल जांच में सही पाया गया।
मजिस्ट्रेट ने फैसला सुनाते हुए कहा, कि "इस प्रकार, यह अदालत शिकायतकर्ता के वकील द्वारा उठाए गए तर्क से सहमत है, और उसकी राय है कि अभियुक्त पर अन्य अपराधों के अलावा धारा 376 आईपीसी के तहत भी मुकदमा चलाया जाना चाहिए"। आपको बता दें, कि आईपीसी की धारा 376 बलात्कार की धारा है।
कोर्ट में कई सालों तक चला मुकदमा
दिल्ली के ट्रायल कोर्ट में ये मामला 2016 में दायर किया गया था और पीड़िता के वकील रवींद्र एस गरिया और सोबत सिंह रावत ने तर्क दिया, कि आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 494 (जीवनसाथी के जीवनकाल में फिर से शादी करना), 495 ( पूर्व विवाह को छिपाना), आईपीसी की धारा 496 (धोखाधड़ी से विवाह समारोह में भाग लेना) और इसके अतिरिक्त धारा 376, क्योंकि अभियुक्त ने शिकायतकर्ता के साथ यौन संबंध बनाए थे, जिसने इस धारणा के तहत अपनी सहमति दी थी, कि आरोपी उसका पति है, भी जोड़ा जाए। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
वहीं, सीनियर डॉक्टर की तरफ से कोर्ट में पेश हुए अधिवक्ता रवि मेहता ने मामले से निपटने के लिए अदालत के अधिकार क्षेत्र पर प्रारंभिक आपत्ति जताई थी।
उन्होंने तर्क दिया था, कि कथित अपराध अफगानिस्तान में किया गया था और शिकायतकर्ता को पता था, कि आरोपी पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) का रहने वाला है, लेकिन कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में ये मुकदमा नहीं आता है। मेहता ने आगे तर्क दिया कि आरोपी को वर्तमान मामले में अदालत द्वारा आरोपमुक्त किया जाना चाहिए।
लेकिन, ट्रायल कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 188 का तर्क दिया और दिल्ली हाईकोर्ट के 2017 में सुनाए गये एक फैसले का जिक्र किया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था, कि "भारत के नागरिक द्वारा भारत के बाहर किए गए अपराध के लिए, जिस अदालत के क्षेत्र में आरोपी पाया जाता है, उसके खिलाफ मुकदमा चलाने का अधिकार उस क्षेत्र के अदालत के अधिकार में होगा।"
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