South African President: सिरिल रामफोसा फिर चुने गये दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति, भारत को लेकर क्या है सोच?
South African President: दक्षिण अफ्रीका की संसद ने सत्तारूढ़ अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (ANC) और विपक्षी दलों के बीच एक ऐतिहासिक गठबंधन समझौते के बाद सिरिल रामफोसा को देश के राष्ट्रपति के रूप में फिर से चुन लिया है।
दक्षिण अफ्रीका में जो सरकार बनाई गई है, वो राष्ट्रीय एकता को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है और विपक्षी पार्टियों ने भी सिरिल रामफोसा का समर्थन किया है, क्योंकि पिछले दिनों हुए चुनाव में उनकी पार्टी बहुमत से दूर रह गई थी, हालांकि सबसे ज्यादा सीटें लाने में कामयाब रही थी।

दक्षिण अफ्रीका में कैसे बनी है नई सरकार?
दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रीय एकता की नई सरकार ने सिरिल रामफोस की अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (ANC) को केन्द्र दक्षिणपंथी डेमोक्रेटिक अलायंस (DA) और कुछ छोटी पार्टियां शामिल हैं।
राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अपने विजयी भाषण में सिरिल रामफोसा ने नये गठबंधन की तारीफ की है और कहा है, कि मतदाता नेताओं से "हमारे देश में सभी की भलाई के लिए काम करने और मिलकर काम करने" की उम्मीद करते हैं।
सिरिल रामफोसा की गठबंधन सरकार उस दिन बनी है, जब दक्षिण अफ्रीका में राजनीति ड्रामा चरम पर पहुंच गया था, और नेशनल असेंबली में देर शाम तक मतदान चलता रहा, ताकि तय किया जा सके, कि नये प्रशासन में सत्ता कौन संभालेगा। दक्षिण अफीका में पिछले महीने के आखिर में चुनाव हुए और 30 सालों से सत्ता पर काबिल ANC बहुमत से दूर रह गई थी। ऐसा पहली बार हुआ था, जब ANC को संसद में बहुमत ना मिला हो। हालांकि, ANC सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन उसे सरकार बनाने के लिए गठबंधन करने के लिए मजबूर होना पड़ा और कई हफ्तों की बातचीत के बाद सरकार बनाने के लिए समझौता हुआ।
चुनाव में ANC को 40 प्रतिशत वोट मिले थे और DA को करीब 22 प्रतिशत वोट मिले थे और वो दूसरे स्थान पर थी।
ANC के महासचिव फिकिले म्बालूला ने गठबंधन सरकार के निर्माण में काफी अहम भूमिका निभाई है। और इसका मतलब ये हुआ, कि साल 201 में जैकब जुमा के भ्रष्टाचार के आरोपों में सरकार से बाहर होने के बाद राष्ट्रपति बने सिरिल रामफोसा अपनी सत्ता बरकरार रखेंगे।
वहीं, उनका अगला कदम कैबिनेट का चयन करना है, जिसमें DA के नेताओं को मंत्री बनाया जाएगा।
दक्षिण अफ्रीका में आजादी मिलने के बाद सबसे पहली बार 1994 में लोकसभा के चुनाव करवाए गये थे और उसके बाद से ANC ने हमेशा संसद में 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल किए थे। 1994 के चुनाव में मिली जीत के बाद महान नेल्शन मंडेला देश के पहले राष्ट्रपति बने थे। लेकिन, पिछले कुछ सालों में पार्टी के कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे और देश बेरोजगारी और अपराध के उच्चतम आंकड़ों से जूझ रहा है, जिसकी वजह से ANC को लेकर जनता में नाराजगी भी देखने को मिली।

भारत को लेकर सिरिल रामफोसा की कैसी रही है सोच?
सिरिल रामफोसा ने भारत के साथ हमेशा मजबूत संबंध बनाने पर जोर दिया है और चूंकी दक्षिण अफ्रीका में भारी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, लिहाजा दोनों देशों के संबंध इतिहास से भी जुड़े रहे हैं।
जब भारत ने चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के नजदीक की थी, उस वक्त BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने नरेन्द्र मोदी दक्षिण अफ्रीका ही गये थे और राष्ट्रपति रामफोसा ने BRICS की बैठक में ही भारत को बधाई दी थी।
सिरिल रामफोसा ने भारत की कामयाबी को अपने देश की कामयाब करार दिया था और उन्होंने लैंडिंग के बाद घोषणा की थी, कि वे प्रधानमंत्री मोदी के बगल में बैठना चाहते है, ताकि चंद्रयान की 'अच्छी भावनाएं' उन पर भी पड़े।
उस वक्त भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था, कि "जब तक हम रिट्रीट में पहुंचे, तब तक चंद्रयान के बारे में कुछ चर्चा हो चुकी थी। अगले दिन (23 अगस्त, लैंडिंग के दिन) हमने सुबह का सत्र किया और फिर प्रधानमंत्री इसरो से जुड़ने के लिए चले गए (वीडियो लिंक के माध्यम से)... दूसरे दिन तक ब्रिक्स के भीतर भी बातचीत चंद्रयान पर आ गई थी..।"
जयशंकर ने आगे कहा, कि "मैं एक कमरे में था (जब विक्रम लैंड कर रहा था, उस समय मैं ब्रिक्स कार्यक्रम में भाग ले रहा था)... जिसके कोने में एक बड़ी स्क्रीन लगी हुई थी। बिना विचलित हुए कॉन्फ्रेंस में बात करना मुश्किल था। उस समय राष्ट्रपति रामफोसा ने कहा, विदेश मंत्री जी, आप ऐसे दिख रहे हैं, जैसे चंद्रयान वहां ऊपर है (स्क्रीन की ओर इशारा करते हुए)।"
भारतीय विदेश मंत्री ने उस घटना का जिक्र करते हुए बताया था, कि "मुझे लगता है कि तब तक यह बात लोगों की कल्पना में घर कर चुकी थी और, मैं आपको बता दूं कि उस शाम हम ब्रिक्स प्लस कार्यक्रम में थे - वहां लगभग 50 अन्य देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति मौजूद थे, और राष्ट्रपति रामफोसा ने चंद्रयान पर जो भाषण दिया, वह एक सामूहिक भावना की तरह था...।"
आपको बता दें, कि भारत के ग्लोबल साउथ कार्यक्रम में दक्षिण अफ्रीका काफी महत्वपूर्ण है और पिछले साल जब भारत में जी20 शिखर सम्मेलन हुआ था, उस वक्त अफ्रीका यूनियन को पहली बार जी20 का सदस्य बनाया गया था और इसके लिए भारत ने अग्रणी भूमिका निभाई थी। भारत अफ्रीकन देशों के साथ लगातार बात करता रहता है और ग्लोबल साउथ का लीडर बनने के लिए दक्षिण अफ्रीका का भारत के साथ होना काफी जरूरी है।












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