WHO की लिस्ट देखिए, इन देशों में दो साल बाद भी नहीं पहुंचा कोरोना वायरस, जानिए कौन है इनका रक्षक
जिनेवा, 18 फरवरी: विश्व में आज भी ऐसे देश बचे हुए हैं, जिन्हें कोविड छू भी नहीं पाया है। दो देश तो ऐसे हैं, जो हाल तक खुद को सुरक्षित बचाए हुए थे, लेकिन अभी-अभी वहां कोरोना वायरस पहुंच गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने करीब 10 ऐसे देशों की लिस्ट दी है, जो कोविड-19 से अबतक सुरक्षित बचे हुए हैं। लेकिन, जो देश अभी तक वाकई कोरोना से बचे हुए हैं, उन सबके साथ एक सामान्यता है, जो उनकी सुरक्षा कर रहा है। बड़ी बात ये है कि कोविड से सुरक्षित रहने के बावजूद इनमें से ज्यादातर देशों में कोविड टीकाकरण की रफ्तार संतोषजनक है।

दो साल बाद भी कोरोना मुक्त हैं कई देश-विश्व स्वास्थ्य संगठन
दो साल से ज्यादा वक्त से कोरोना वायरस दुनिया को मुश्किलों में डाले हुए है। खासकर अमेरिका और यूरोप में संक्रमण और इसकी वजह से होने वाली मौतें रिकॉर्ड तोड़ चुकी हैं। अमेरिका में तो एक दिन में 15 लाख से भी ज्यादा तक केस जा चुके हैं। दुनियाभर में इस वायरस की चपेट में आने वालों की तादाद 42 करोड़ से भी ज्यादा हो चुकी हैं। लेकिन, इस स्थिति के बावजूद दुनिया में ऐसे भी देश हैं, जिनके लोगों को यह जानलेवा वायरस छू तक नहीं पाया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक कुछ महीने पहले तक कोरोना मुक्त देशों की फेहरिस्त और भी लंबी थी। लेकिन हाल में दो देशों में इस वायरस ने एंट्री मार ली है।

तुवालू
तुवालू 3 रीफ और 6 प्रवाल द्वीपों का समूह है। यह देश राष्ट्रमंडल देशों का सदस्य है। इस छोटे से देश ने अपनी सीमाएं बंद करके और अनिवार्य क्वारंटीन की व्यवस्था करके अबतक खुद को कोविड से सुरक्षित रखा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक यहां की करीब 50 फीसदी आबादी पुरी तरह से वैक्सिनेटेड है। दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित तुवालू एक स्वतंत्र द्वीप है।

टोकेलाउ
टोकेलाउ द्वीप भी दक्षिण प्रशांत में स्थिति है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 फ्री घोषित कर रखा है। यह छोटे-छोटे प्रवाल द्वीपों का समूह है। यह न्यूजीलैंड और हवाई का पड़ोसी मुल्क है। गौरतलब है कि न्यूजीलैंड ने शुरू से कोविड को लेकर सख्त पाबंदियों का पालन किया है। टोकेलाउ में एकमात्र हवाई अड्डा है और जनसंख्या करीब 1,500 है।

सेंट हेलेना
सेंट हेलेना दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित है और एक ब्रिटिश प्रवासी क्षेत्र है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक यहां की करीब 58.16 फीसदी आबादी को पूरी वैक्सीन डोज लग चुकी है। सेंट हेलेना नेपोलियन बोनापार्ट के निर्वासन के लिए भी मशहूर है और यहीं उसकी मौत भी हुई थी। वैसे यह खूबसूरत मुल्क है, लेकिन लोग यहां जाने से कतराते हैं।

पिटकेर्न द्वीप
पिटकेर्न द्वीप प्रशांत महासागर में स्थित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यहां की 74 फीसदी आबादी को कोविड वैक्सीन की पूरी डोज लग चुकी है। यह चार ज्वालामुखी द्वीपों का एक समूह है। यहां का पर्यावरण, जल, वनस्पति, पक्षी और समुद्री जीवन और अविस्मरणीय समुद्री यात्रा टूरिस्टों के आकर्षण का केंद्र रहा है।

नियू
नियू भी दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक आइलैंड नेशन है। यह अपने कोरल-रीफ डाइव साइट्स के लिए जाना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक यहां की 79 फीसदी से अधिक जनसंख्या पूरी तरह से वैक्सिनेटेड है। अंतरराष्ट्रीय सैलानियों को आकर्षित करने के लिए यह देश खुद को 'सबसे छोटे देशों में से एक और पृथ्वी पर सबसे बड़े प्रवाल द्वीपों में से एक' बताता है।

नाउरू
नाउरू छोटा सा देश है, जो ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में स्थित है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इसने जपान के आउटपोस्ट की भूमिका निभाई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यहां की करीब 68 फीसदी आबादी को कोविड की खुराक लगाई जा चुकी है। यह मुल्क 1968 में ऑस्ट्रेलिया प्रशासित ट्रस्टीशिप से मुक्त हुआ था।

माइक्रोनेशिया
अमेरिकी सरकार के आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक फेडरेटेड स्टेस्ट ऑफ माइक्रोनेशिया एक स्वयंप्रभु राष्ट्र है। यह चार राज्यों चुक, कोसरे,पोहंपी और यैप से मिलकर बना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यहां की 38.37 फीसदी आबादी को कोविड वैक्सीन लगाई जा चुकी है। यह भी प्रशांत महासागर में स्थित द्वीप है।

जानिए कौन है कोविड से इनका रक्षक ?
दरअसल, जितने भी मुल्क दो साल बाद भी कोरोना संक्रमित होने से बचे हुए हैं, उनमें से अधिकतर प्रशांत और अटलांटिक महासागरों में स्थित द्वीपीय देश हैं। यानी इनकी चारों सीमाएं समुद्र से घिरी हुई हैं और इस महामारी में समुद्र ही उनकी रक्षा कर रहा है और वायरस वहां नहीं पहुंच पाया है।

इन देशों की कहानी भी अजीब है
विश्व स्वास्थ्य संगठन की यह लिस्ट और भी लंबी थी। लेकिन, कुछ महीने पहले तक टोंगा द्वीप भी कोविड मुक्त था। लेकिन, जब वहां ज्वालामुखी विस्फोट हुआ तो बाहर से इसकी सहायता के लिए राहत सामग्री लेकर जहाज पहुंचने लगे। लेकिन, उसके साथ वहां कोरोना वायरस ने भी एंट्री मार ली। इसी तरह से कुक द्वीप समूह में पिछले हफ्ते ही कोविड का पहला केस दर्ज हो गया है। वैसे डब्ल्यूएचओ की लिस्ट में तुर्कमेनिस्तान और उत्तर कोरिया भी जीरो कोविड वाले देशों में शामिल हैं। लेकिन, इसकी वजह ये मानी जा रही है कि इन्होंने आधिकारिक तौर पर संक्रमण की बात मानी नहीं है। (ज्यादातर तस्वीरें-सांकेतिक)
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