Coronavirus की वैक्सीन, जानिए वो सबकुछ जो इस बारे में आपको जानना है जरूरी
वॉशिंगटन। अमेरिका के सिएटल में चार स्वस्थ वॉलेंटियर्स को कोरोना वायरस की वैक्सीन की पहली प्रयोगात्मक डोज दी गई है। इसके साथ ही दुनिया में कोरोना की वैक्सीन का पहला मानवीय ट्रायल शुरू हो गया है। इस ट्रायल को काइसर परमानेंट वॉशिंगटन हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट (केपीडब्लूएचआरआई) में अंजाम दिया गया। इसका मकसद कोरोना वायरस के इलाज के लिए तैयार दवाई की प्रभावशीलता को परखना है। इस वैक्सीन को अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के वैज्ञानिक और बायोटेक्नोलॉजी कंपनी मॉडरना इंक के संयोजकों की तरफ से तैयार किया जा रहा है जो कि मैस्याच्यूसेट्स के कैंब्रिज में हैं।

43 साल की मां पर हुआ ट्रायल
इस ट्रायल के तहत दो बच्चों की मां 43 साल की वॉलेंटियर को पहली डोज दी गई। सिएटल की रहने वाली यह महिला इस वैक्सीन का पहला शॉट दिया गया है। न्यूजज एजेंसी एपी की ओर से बताया गया है कि रिसर्चर ने 18 से 55 साल के 45 वॉलेंटिंयर्स को इस ट्रायल में शामिल किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रायल को पूरा होने में अभी क इई माह का समय लगेगा और तब यह बात सुनिश्चित हो सकेगी कि वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है। ट्रायल के जरिए इस बात का पता भी लग सकेगा कि यह डोज वॉलेंटियर्स की रोग प्रतिरोधात्मक प्रतिक्रिया को मजबूत कर सकेगी या नहीं।

वायरस से तैयार होगी वैक्सीन
रिसर्चर्स के मुताबिक इस नई वैक्सीन जिसे mRNA-1273 कहा जा रहा है, वह किसी भी तरह से कोरोना वायरस की बीमारी की वजह नहीं बन सकती है। इसमें नुकसान न पहुंचाने वाले जेनेटिक कोड हैं जिन्हें वायरस से ही कॉपी किया गया है जिसकी वजह से कोविड-19 फैला। एनआईएआईडी के डायरेक्टर डॉक्टर एंथोनी फाउसी ने कहा, 'सार्स-कोव-2 के इन्फेक्शन से बचाव के लिए एक सुरक्षित और प्रभावशाली वैक्सीन इस समय की आकस्मिक सावर्जनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता है।' डॉक्टर फाउसी ने कहा कि यह अभी फे-1 स्टडी है जिस रिकॉर्ड स्पीड में लॉन्च किया गया है। उन्होंने इसे लक्ष्य को हसिल करने की दिशा में पहला महत्वूपूर्ण कदम बताया।

वैक्सीन की टेस्टिंग के तीन नाजुक चरण
किसी भी नई दवाई जो कि सुरक्षित हो और प्रभावशाली साबित हो, उसके लिए क्लीनिकल ट्रायल के तीन संवेदनशील चरणों को पास करना बहुत ही जरूरी है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी दवाई के शुरुआती टेस्ट्स ठीक से संपन्न हो जाते हैं तो फिर किसी भी वैक्सीन को जनता के प्रयोग के लिए 18 माह यानी डेढ़ साल बाद बाजार में उतारा जाता है। फेज 1 ट्रायल में वैक्सीन की सुरक्षा और इसके जहरीलेपन को परखा जाता है। किसी भी वैक्सीन के अलग-अलग डोज के स्तर पर इसे परखते हैं। इस ड्रग फार्माकोकिनेटिक्स कहते हैं। अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) के मुताबिक फेज-1 ट्रायल का मकसद नई वैक्सीन ने किसी स्वस्थ इंसान के शरीर में किसी तरह से प्रतिक्रिया दी है इस बारे में जानकारी देना होता है।

20 से 80 साल के लोगों पर टेस्ट
फर्स्ट ट्रायल में रिसर्चर्स लोगों के छोटे समूह का परीक्षण करेंगे जिनकी उम्र 20 से 80 साल होगी। इन लोगों को ट्रायल में अलग-अलग तरह की डोज बतौर प्रयोग दी जाएंगी। फेस-1 ट्रायल को इस समय लीजा ए जैक्सन लीड कर रही हैं। लीजा, केपीडब्लूएचआरआई की वरिष्ठ जांचकर्ता हैं। वॉलेंटियर्स को बांह की ऊपरी मांसपेशी पर दो बार इन्जेक्शन लगाया जाएगा। दोनों डोज के बीच 28 दिनों का अंतर होगा। हर वॉलेंटियर को 25 माइक्रोग्राम (mcg), 100 माइक्रोग्राम या फिर 250 माइक्रोग्राम की डोज दोनों वैक्सीनेशन पर दी जाएगी। हर डोज के समय 15 लोगों का एक ग्रुप होगा। एनआईएच की तरफ से प्रेस रिलीज में कहा गया है कि पहले चार प्रतिभागियों को कम डोज वाललर एक इंजेक्शन दिया जाएगा और अगले चार प्रतिभागियों को 100 माइक्रोग्राम की डोज दी जाएगी।

वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स की जांच
जांचकर्ता इसके बाद बाकी बचे हुए प्रतिभागियों को वैक्सीन देने से पहले सुरक्षा डाटा का आकलन करेंगे। इसके बाद उन बचे हुए प्रतिभागियों को 25 और 100 माइक्रोग्राम की डोज दी जाएगी। इसके बाद ही उन्हें दूसरा वैक्सीनेशन दिया जाएगा। इसके बाद फिर एक सेफ्टी रिव्यू होगा और फिर प्रतिभागी 250 माइक्रोग्राम की डोज वाले दल में आ जाएंगे। रिसर्चर्स 14 माह की अवधि के दौरान यही देखेंगे कि हर प्रतिभागी इलाज को किस तरह से लेता है और अलग-अलग डोज देने में एक समान से कौन से लक्षण उनमें नजर आते हैं। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि क्या किसी प्रतिभागी में कोई साइड इफेक्ट भी हुआ है।

फेस-1 के बाद दो और फेज
यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक फेज-1 ट्रायल के बाद किसी भी दवाई को लोगों के बड़े समूह पर टेस् करना जरूरी है और इसे लंबे समय तक टेस्ट किया जाना होता है। यह किसी भी वैक्सीन का फेज-2 होता है और इसके बाद फेज-3 के ट्रायल्स शुरू होते हैं। फिलहाल अभी तक ऐसी कोई भी वैक्सीन नहीं है जो कोरोना वायरस के इनफेक्शन से बचा सके। कोरोना वायरस की वजह से अब तक दुनियाभर में 7,007 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 175,530 लोग इसके संक्रमण के शिकार हैं। दुनिया में हर जगह पर इस समय रिसर्चर्स इस वायरस को रोकने और लोगों की मदद के लिए विभिन्न प्रकार के इलाज पर काम कर रहे हैं।












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