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चीन में कोरोना: श्मशान के बाहर लंबी क़तारें, कितने ख़राब हैं हालात?

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दुनिया में एक बार फिर तेज़ी से कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ रहा है. खास कर चीन में जिस रफ़्तार से ये नया वायरस फ़ैल रहा है उस तरह का संक्रमण वहां इससे पहले नहीं देखा गया.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भारत में तीन नए मामले ओमिक्रॉन के सब-वेरिएंट BF.7 के पाए गए हैं. ये वही वेरिएंट है जिसका संक्रमण चीन में अब तक की सबसे तेज़ रफ़्तार से बढ़ रहा है.

चीन, अमेरिका, जापान , दक्षिण कोरिया और पेरिस में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री ने उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की.

स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा है कि " कोविड अभी ख़त्म नहीं हुआ है. हमने सभी ज़रूरी अधिकारियो को अलर्ट रहने और सर्विलांस मज़बूत करने को कहा है."

इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय की बैठक के बाद एयरपोर्ट्स पर चीन से आने वाले और अन्य विदेशी यात्रियों की रैंडम टेस्टिंग शुरू कर दी गई.

चीन में हो रहे भयंकर संक्रमण के कारण एक बार फिर दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के डर फैला है . चीन में अब तक की सबसे बड़ी कोविड-19 की लहर आई है.

चीन में क्या हो रहा है?

चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि देश में आने वाले कुछ महीनों में कोविड 19 से 80 करोड़ लोग संक्रमित हो सकते है. और एक रिपोर्ट कहती है कि आने वाले कुछ महीनों में मरने वालों की संख्या चीन में 5 लाख हो सकती है.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि चीन में कोरोना की नई लहर के कारण वहां के अस्पताल भरते जा रहे हैं. लेकिन चीन की ओर से सटीक जानकारी नहीं दी जा रही जिससे हालात का सही आंदाज़ा हो.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ टेड्रोस एडनॉम गेब्रियेसस ने कहा है कि व्यापक मूल्यांकन के लिए हमें ये ठीक ठीक पता होना ज़रूरी है कि लोगों में संक्रमण कितान गंभीर है, अस्पताल में भर्ती और आईसीयू में कितने लोग हैं इन सब की जानकारी दी जानी चाहिए.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के इमरजेंसी चीफ़ माइकल रायन ने कहा है कि भले ही चीन के अधिकारी कह रहे हैं कि प्रभावित लोगों की संख्या 'अपेक्षाकृत कम' है लेकिन यहां आईसीयू में मरीज़ भरते जा रहे हैं.

इस महीने की शुरुआत में चीन ने अपनी कड़ी ज़ीरो कोविड पॉलिसी में ढील दी और इसके बाद से ही वहाँ कोरोना मामलों की बाढ़ सी आई गई है.

चीन के आधिकारिक आंकड़े कहते हैं कि गुरुवार को कोरोना से देश में एक भी मौत नहीं हुई. वहीं मंगलवार को तीन और सोमवार को पांच मौत हुई.

लेकिन महामारी को लेकर वहां से जो आंकड़े आ रहे हैं उस पर दुनिया भर के एपिडेमियोलॉजिस्ट और जानकार संदेह जता रहे हैं.

ये आंकड़े इसलिए बेहद कम हैं क्योंकि चीन कोविड से होने वाली मौत उन्हें ही मान रहा है, जैसे निमोनिया के मामले या ऐसे मामले जिसमें मौत के पीछे सांस से जुड़ी बीमारी होगी.

ये तरीक़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोरोना से मौत मापने के तरीक़े से अलग हैं.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन उन मौतों को भी शामिल करता है जो सीधे तौर पर भले कोरोना के संक्रमण के कारण नहीं हुई है लेकिन उन पर कोरोना के संक्रमण का अप्रत्यक्ष असर पड़ा हो.

वहीं, चीन की इसे लेकर कड़े नियम हैं, चीन उन्हें ही कोरोना से होने वाली मौत मान रहा है, जिसमें मरने वाले के फ़ेफड़े संक्रमण से प्रभावित हुए. ये पुष्टि स्कैन के ज़रिए की जा रही है.

इस सबके बीच डॉ. रायन ने कहा है, "चीन में जो कोरोना से जुड़े आंकड़े पेश किए जा रहे हैं वो अपेक्षाकृत बेहद कम हैं, जो जनकारी हमें मिल रही है उसके अनुसार वहां आईसीयू भरते जा रहे हैं."

"हम ये कई बार कह चुके हैं कि इस बेहद संक्रामक वायरस है जो सिर्फ़ कड़े लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंस के उपायों से नहीं जाएगा. वैक्सीन ही इसको दूर करने की एक मात्र स्ट्रैटजी है."

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चीन ने खुद वैक्सीन बनाई है जिसका वो अपने देश में इस्तेमाल कर रहा है, ये वैक्सीन दुनिया के ज़्यादातर हिस्सों में इस्तेमाल होने वाली mRNA वैक्सीन की तुलना में कम असरदार है.

हालांकि बुधवार को जर्मनी ने चीन में बायोएनटेक वैक्सीन चीन को भेजे हैं. अभी वैक्सीन के 20 हज़ार टीके भेजे गए हैं.

श्मशान के बाहर लाशों की लंबी कतार

भले ही चीन के सरकारी आंकड़े कह रहे हों कि गुरुवार को वहां कोरोना से एक ही मौत नहीं हुई है, लेकिन अमेरिकी न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट कहती है कि "बीजिंग में कोरोना से हुई मौतों के लिए निर्धारित किए गए श्मशान घाट के सामने शवों की गाड़ियों की लंबी क़तार लगी हुई है."

बीजिंग के तोंगज़ोऊ श्मशान के सामने रॉयटर्स के संवाददाता ने शवों वाली 40 गाड़ियों की लंबी क़तार देखी. इस श्मशान के एंट्री गेट पर सुरक्षाकर्मी तैनात थे.

"श्मशान घाट के एक कर्मी ने एजेंसी को बताया कि बीजिंग में कुछ लोगों को तो कई दिनों तक श्मशान घाट पर अपना नंबर अआने का इंतज़ार करना पड़ रहा है तो कुछ लोग मोटी रकम भर कर श्मशान में जल्दी जगह ले रहे हैं."

"एक श्मशान कर्मी ने वहां के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट साझा किया करते हुए लिखा ' अगर आप बिना लंबी कतारों में खड़े हुए आराम से श्मशान में जगह चाहते हैं तो 26000 युआन (लगभग 3700 डॉलर) में पाएं.' हालांकि इस पोस्ट और ऑफर की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं हो सकी है."

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'जिसको भी मैं जिसे भी जानता हूं उसे बुखार है'

बिना किसी तैयारी और बैकअप प्लान के आचानक ज़ीरो कोविड पॉलिसी हटाने से पूरे चीन में कोरोना के नए मामले में बाढ़ सी आई गई है. इसे लेकर सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त गुस्सा है.

ज़ेनजियांग और अनहुई जैसे कई बड़े शहरों में रैपिड टेस्ट किट की भयान किल्लत है.

चीनी सोशल मीडिया वीबो पर लोग लिख रहे हैं, "बीते तीन से कोई तैयारी नहीं की गई और फिर अचानक से पाबंदिया हटाकर लोगों को बाहर खुल कर आने जाने की इजाज़त दे दी, हमारी ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं है हम चिटियों जैंसी हल्की बना दी गई है."

चीन से बाहर रहने वाले चीनी लोग जो वापस अपने देश आए हैं वो संक्रमण की रफ़्तार देख कर हैरान हैं.

चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शियाहोंगशु पर एक यूज़र लने लिखा, "मैं विदेश में रहता हूं और मुझे कभी कोविड नहीं हुआ, लेकिन यहां आने के बाद मुझे कोविड हो गया. मैं जिन्हें भी जानता हूं उन सबको बुखार है. तो अगर आप देश से बाहर रह रहे हैं तो वही रहिए वापस मत आइए."

बीते दो सप्ताह से चीन के इंटरनेट कोरोना के पोस्ट से पटे पड़े हैं. कई वीडियो ऐसे सामने आ रहे हैं जिसमें घर में संक्रमित परिजनों को बच्चे खाना और पानी दे रहे हैं.

लेकिन इस तरह के कोई वीडियो या संदेश चीन के सरकारी मीडिया चैनल पर नहीं दिखाए जा रहे हैं.

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'चीन से हालात नहीं संभल रहे'

अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट ने चीन में कोरोना की नई लहर को लेकर एक लेख प्रकाशित किया है.

इसमें कहा गया है, "चीन की ज़ीरो कोविड नीति ऐसी नीति थी जो टिक नहीं सकती थी और इसे बिना किसी तैयारी और बैकअप प्लान के अचानक से ख़त्म करने के फ़ैसले से ना सिर्फ़ यहाँ के लोगों के लिए एक भयानक नई लहर का ख़तरा पैदा हुआ है बल्कि ये वहाँ के व्यापार को भी झटका देगा और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व पर भी बड़ा सवाल पैदा करता है.'

''संभव है कि ये नया संकट पूरी दुनिया को हिला कर रख दे जैसा कि वुहान में होने वाले आउटब्रेक ने तीन साल पहले पूरी दुनिया को ठप कर दिया था. चीन में जो होता है वो ज़रूरी नहीं है कि बस चीन तक ही सीमित रहे."

"जिनपिंग सरकार ने पूरे कोरोना के समय कठोर कोविड नीति अपनाई, टेस्ट किए, जबरन लोगों को क्वॉरंटीन किया लेकिन सात दिसंबर को सरकार ने नियमों में बड़ी ढील दी और कहा कि सब कुछ कंट्रोल में है. लेकिन अभी जो हालात हैं, उनसे ज़ाहिर है कि बात उसके काबू में नहीं है.''

'बीजिंग में ओमिक्रॉन का संक्रमण ऐसा फैला है कि कि यह एक भूतिया शहर में तब्दील हो गया है और डर है कि ये हालत पूरे चीन में हो सकते हैं. चीनी की सरकार जो अपने डेटा को छुपाने के लिए जानी जाती है, वह अपने प्रतिदिन आने वाले मामलों को ठीक से रिपोर्ट नहीं कर रही और कई सारे ट्रैकिंग ऐप डिएक्टिवेट कर दिए गए हैं, जिससे वहाँ के हालात कैसे हैं, आंकड़े क्या हैं? इसे लेकर असमंजस बना हुआ है."

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