क्या इंसान से भी पुराने वायरस से फैल सकती है अगली महामारी? Climate Change बन सकता है कारण
जलवायु परिवर्तन का जोखिम हमारी सोच से भी आगे बढ़ता जा रहा है। अब आशंका है कि इसकी वजह से लाखों साल से बर्फ में जमे पड़े वायरस और बैक्टीरिया बाहर निकल सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन की वजह से इंसान का जीवन जोखिम से भर चुका है। लेकिन, आपसे कोई कहे कि यह अगली महामारी का भी कारण बन सकता है तो समझिए कितनी गंभीर बात है। लेकिन, वैज्ञानिक जो रिसर्च कर रहे हैं, उसके बाद इस तरह की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता है।

ध्रुवीय क्षेत्रों से निकल सकते हैं प्राचीन वायरस और बैक्टीरिया-रिसर्च
जलवायु परिवर्तन के चलते ऐसे वायरस या बैक्टीरिया भी जाग सकते हैं, जो इंसानों के पैदा होने से भी पहले से मृतप्राय हैं। एबीसी की एक रिपोर्ट में इस तरह के खतरे की आशंका बताई गई है। इसके मुताबिक गर्म होती जलवायु की वजह से ऐसे सदियों पुराने वायरस या बैक्टीरिया बर्फ से बाहर निकल सकते हैं, जो लाखों साल से ध्रुवीय क्षेत्रों जमे पड़े हैं।

इंसानों से भी पहले से बर्फों में जमे पड़े हैं
फ्रांस की ऐक्स मार्सिले यूनिवर्सिटी में मेडिसिन के प्रोफेसर रहे जीन-मिशेल क्लैवेरी कहते हैं, 'हमें निश्चित रूप से पता है कि बैक्टीरिया निष्क्रिय रह सकते हैं, लेकिन permafrost (स्थायी तुषार-भूमि) में शायद 5,00,000 वर्षों तक भी जीवित रह सकते हैं। और ये वह बिंदु है, जो होमो सेपियन्स की शुरुआत ही है। उस समय हमारी प्रजातियां तब उभर ही रही थीं।'

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सात प्राचीन वायरस पर रिसर्च
क्लैवेरी और उनके शोधकर्ताओं की टीम ने हाल ही में अपनी रिसर्च प्रकाशित की है। यह रिसर्च साइबेरिया के पर्माफ्रॉस्ट (यह वो अवस्था है, जहां की जमीन कम से कम दो वर्ष तक लगातार -32°F(0°C-पानी जमने का तापमान) या इससे भी ज्यादा ठंडी रहती है) में पाए गए सात प्राचीन वायरसों से जुड़ी है।
50 हजार साल पुराना वायरस भी मिला संक्रामक
इन सात वायरसों में एक तो करीब 50,000 साल पुराना है, लेकिन अभी भी संक्रामक है। वो कहते हैं कि वैज्ञानिक को अभी यह पूरी तरह से मालूम नहीं है कि यह प्राचीन रोग आज जानवरों या इंसानों को किस हद तक प्रभावित कर सकते हैं।

एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया भी मिल चुके हैं
2021 में ऐसी रिपोर्ट आई थी जिसमें साइबेरिया के पर्माफ्रॉस्ट में 100 से ज्यादा प्राचीन बैक्टीरिया के स्ट्रेन पाए जाने की बात थी। वे एंटीबायोटिक प्रतिरोधी भी थे। प्रोफेसर कहते हैं कि यदि कोई प्राचीन बीमारी, जैसे कि वायरस, वूली मैमथ के लिए घातक थी और वह पूरी दुनिया में फैली हो, तो इसका इंसानों पर भी खतरनाक प्रभाव पड़ सकता है।
जलवायु परिवर्तन की वजह से जाग सकते हैं 'राक्षस'!
वो कहते हैं, 'यही, मैं सोचता हूं, बहुत खतरनाक है, क्योंकि मैमथ (आमतौर पर) हाथियों के बहुत करीब होते हैं। हाथी इंसान के बहुत करीब होते हैं।' इनका कहना है कि जलावयु परिवर्तन की वजह से अगर यह वायरस पर्माफ्रॉस्ट से रिलीज होते हैं तो उसे संक्रमण के लिए कोई तो चाहिए। अभी ध्रुवीय क्षेत्र में इंसान नहीं रहते, इसलिए फिलहाल चिंता की बात नहीं है।

भविष्य में नई महामारी का बढ़ सकता है खतरा
लेकिन, जलवायु के गर्म होने के साथ उन क्षेत्रों में इंसानों की उपस्थिति भी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा, 'यह ज्यादा खतरनाक नहीं है कि वह तत्व निकल जाएंगे, बल्कि तथ्य यह है कि इंसानों या जानवरों के लिए उनका एक्सपोजर बढ़ेगा।' इस इलाके में जितने इंसान पहुंचेंगे, नई बीमारियों का खतरा उतना बढ़ेगा और इससे भविष्य में नई महामारी फैलने की आशंका है।
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