भीषण बाढ़ से परेशान पाकिस्तान में अंतर्राष्ट्रीय मदद पहुंचना शुरू, जानिए किन देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ

वैज्ञानिकों और एक पाकिस्तानी सीनेटर और देश के जलवायु मंत्री शेरी रहमान के अनुसार, इस साल मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन के कारण पाकिस्तान को भारी बारिश का सामना करना पड़ा है।

इस्लामाबाद, अगस्त 29: भीषण बाढ़ और बारिश से परेशान पाकिस्तान तक अंतर्राष्ट्रीय मदद का पहुंचना शुरू हो गया है और पाकिस्तानी सेना के अलावा स्वयंसेवकों ने भी बाढ़ पीड़ितों की सहायता शुरू कर दी है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से हजारों लोगों को बाहर निकाला जा रहा है, लेकिन हजार से ज्यादा लोगों की अब तक भीषण बाढ़ की वजह से जान जा चुकी है।

किन देशों से पहुंच रही है मदद?

किन देशों से पहुंच रही है मदद?

तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात से कार्गो विमानों ने गरीब राष्ट्र की सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद पहुंचानी शुरू कर दी है और इस्लामाबाद में तंबू, भोजन और अन्य दैनिक आवश्यकताओं को लेकर इन देशों के विमान उतरे हैं। इन देशों से खास तौर पर पाकिस्तान ने मदद की गुहार लगाई थी और पाकिस्तानी वित्तमंत्री के साथ साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री विलावल भुट्टो ने भी मदद की गुहार लगाई थी और इन देशों ने मदद पहुंचाने का वादा किया था। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबित, अब तक, असाधारण रूप से भारी मानसून की बारिश की वजह से आधा पाकिस्तान डूबा हुआ है और करीब 3 करोड़ 30 लाख लोग बुरी तरह से प्रभावित है, जबकि भीषण बाढ़ की वजह से लगभग 10 लाख घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और कम से कम 1,061 लोग मारे गए हैं।

2010 से भी खतरनाक है बाढ़

2010 से भी खतरनाक है बाढ़

पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि इस साल की तबाही 2010 की तुलना में भी बदतर है, जब बाढ़ में 1,700 लोग मारे गए थे। देश के सैन्य प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने रविवार को कहा कि उनके देश को इस भीषण बाढ़ से उबरने में सालों लग सकते हैं। वहीं, पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में कहा कि, उसने संयुक्त राष्ट्र सहायता एजेंसियों और पाकिस्तान में उनके सहयोगियों के लिए बाढ़ से निपटने के लिए 3 मिलियन डॉलर आवंटित किए हैं और इस पैसे का उपयोग स्वास्थ्य, पोषण, खाद्य सुरक्षा और पानी और स्वच्छता सेवाओं के लिए किया जाएगा। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और सबसे संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन ढा रहा सितम

जलवायु परिवर्तन ढा रहा सितम

वैज्ञानिकों और एक पाकिस्तानी सीनेटर और देश के जलवायु मंत्री शेरी रहमान के अनुसार, इस साल मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन के कारण पाकिस्तान को भारी बारिश का सामना करना पड़ा है और जलवायु परिवर्तन की वजह से इस साल पाकिस्तान में भीषण गर्मी भी पड़ी है, जिससे इस साल जंगलों में भी आग लग गई। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार को नए बांधों और जलाशयों के निर्माण में शायद ही कोई दिलचस्पी है। अभूतपूर्व मानसून के मौसम ने देश के सभी चार प्रांतों को प्रभावित किया है। बाढ़ ने 150 से अधिक पुलों को नष्ट कर दिया है और कई सड़कें बह गई हैं, जिससे बचाव कार्य मुश्किल हो गया है। सरकार ने देश भर में बचाव और राहत कार्यों में नागरिक अधिकारियों की मदद के लिए कम से कम 6,500 सैनिकों को तैनात किया है। प्रधानमंत्री शबाज़ शरीफ सोमवार को देश के उत्तर-पश्चिम में बाढ़ से क्षतिग्रस्त विभिन्न इलाकों का दौरा किया है। शरीफ ने कहा है कि सरकार उन सभी लोगों को आवास मुहैया कराएगी, जिन्होंने अपना घर खो दिया है।

अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान

अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान

पाकिस्तान में कुदरत के कहर ने सब कुछ खत्म कर दिया है। पाकिस्तान डूबने की कगार पर आ पहुंचा है। हालांकि, सरकार राहत बचाव कार्य जारी रखे हुए हैं। लेकिन देश की अर्थव्यवस्था की कमर टूट चुकी है और ऐसे में बाढ़ ने और भी ज्यादा स्थिति को दयनीय बना दिया है। भयंकर बाढ़ के कारण सात लाख से अधिक घर पानी में डूब चुके हैं। वहीं,पाकिस्तान की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने कहा कि 3,000 किमी से अधिक सड़के, 150 पुल बहकर नष्ट हो गए हैं। पाकिस्तान समाचार वेबसाइट डॉन ने एक गंभीर तस्वीर पेश करते हुए लिखा, "... वर्तमान में,आधा देश पानी में डूब चुका है। असामान्य मानसून बारिश से उत्पन्न अचानक बाढ़ के परिणामस्वरूप लाखों लोग बेघर हो गए हैं। वहीं, भारी बारिश के कारण देश के 57 लाख से अधिक लोग के रहने के लिए घर नहीं है और खाने के लिए भोजन नहीं है। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है कि, क्या करें, ना करें।

कहां कहां है बाढ़ का कहर

कहां कहां है बाढ़ का कहर

दि ट्रिब्यून के मुताबिक, खैबर-पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और सिंध प्रांत के इलाकों बाढ़ ने कहर मचा रखा है। सड़के और ब्रीज बह चुकी हैं, जिसके कारण अन्य शहरों से लोगों का संपर्क बिल्कुल टूट चुका है।राहत कार्य के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन खराब मौसम होने के कारण हेलिकॉप्टर उड़ाने में भी परेशानी हो रही है। मंत्री रहमान ने बताया कि इस बार पाकिस्तान में मानसून का असर बेहद ज्यादा है। इससे पहले ऐसे हालत 2010 में देखे गए थे, लेकिन तब भी स्थिति आज से बेहतर ही थी। अचानक आई बाढ़-बारिश के कारण देशभर में कई पुल और आवागमन के रास्ते पानी में बह गए हैं।

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