Climate change: बीमार हो जाएगी इस जीव की 76.8% आबादी, दुनिया भर में आएंगे चपेट में
Climate change: अगर वैश्विक तापमान की वृद्धि नहीं रुक पाई तो कई जीवों के विलुप्त होने का खतरा है। अब एक शोध हुआ है कि इसकी वजह से तीन-चौथाई से ज्यादा प्रवाल रोगी हो जाएंगे।

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने जलवायु परिवर्तन संकट से जुड़ा एक बहुत बड़ा शोध किया है। इसके मुताबिक इस सदी के अंत तक दुनिया भर के 76.8 फीसदी मूंगा या प्रवाल ( corals) रोगग्रस्त हो जाएंगे। इसकी वजह ग्लोबल वार्मिंग के कारण होने वाला जलवायु परिवर्तन बताया जा रहा है।
बढ़ते तापमान की वजह से मूंगे पर संकट
बुधवार को इकोलॉजी लेटर्स जर्नल में प्रकाशित उनके नए शोध के मुताबिक गर्मियों में समुद्र के सतह का औसत तापमान (SSTs)बढ़ने और साप्ताहिक समुद्री सतह के तापमान(WSSTAs) में विसंगतियों की वजह से ही वैश्विक स्तर पर मूंगे की बीमारी का प्रसार जुड़ा हुआ पाया गया है।
सदी के अंत तक 76.8% मूंगा रोग के चपेट में होंगे- शोध
इस शोध के अनुसार 1992 से 2018 के बीच 26 वर्षों में मूंगा रोग का वैश्विक प्रसार तीन गुना बढ़कर 9.92% हो गया। इस शोध में इसी अनुमानों के आधार पर भविष्यवाणी की गई है कि यदि तापमान मे बढ़ोतरी जारी रही तो वर्ष 2100 तक मूंगा रोग का विस्तार 76.8% तक हो जाएगा।
जलवायु परिवर्तन का मूंगे की चट्टानों पर विनाशकारी प्रभाव
न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी में पीएचडी कैंडिडेट और इस शोध पत्र की मुख्य लेखक सामंथा बर्के का कहना है कि यह रिसर्च मूंगे की चट्टानों पर बढ़ते तापमान का विनाशकारी प्रभाव दिखाती है। इसके साथ ही यह जलवायु परिवर्तन को रोकने की आवश्यकता पर जोर डालती है।
तापमान बढ़ने से कमजोर हो रहे हैं प्रवाल
बुर्के के मुताबिक, 'मूंगा रोग वैश्विक स्तर पर प्रवाल मृत्यु दर और इसके चट्टानों के खात्मे का एक गंभीर कारण है, और हमारी मॉडलिंग यह अनुमानित करती है कि यह और खराब ही होता जाएगा।' उनका कहना है, 'जैसे-जैसे समुद्र गर्म होता है, इससे मूंगे प्रभावित होते हैं, जिससे इनका इम्यून रेस्पॉन्स कमजोर हो सकता है।'
तापमान बढ़ते जाने के साथ गंभीर हो सकती है समस्या
वो कहती हैं कि 'तापमान बढ़ते रहने से बीमारी पैदा करने वाले और ज्यादा रोगाणु पैदा होने की परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।' हालांकि, वैज्ञानिक अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि मूंगे को रोगग्रस्त करने वाले रोगाणु कितने तरह के हैं। उन्हें इसके कारण और लक्षणों की भी जानकारी नहीं है।
और रिसर्च की आवश्यकता
वैज्ञानिकों को सिर्फ इतना पता चला है कि मूंगे रोगग्रस्त हो रहे हैं और उनके टिशू मर रहे हैं। उन्होंने बताया, 'क्या फफूंद या बैक्टीरिया की मौजूद से बीमारी हो रही है या टिशू के नष्ट होते जाने से हो रहा है यह अभी अस्पष्ट है, इसलिए शोधकर्ताओं को अभी और रिसर्च करना है।'
मूंगा या प्रवाल क्या है?
इंटरनेशनल कोरल रीफ इनिशिएटिव के मुताबिक मूंगा या प्रवाल अकशेरुकी जीव हैं, जो नाइडेरिया (Cnidaria) नाम के जीवों के एक विशाल रंगीन और लुभावने समूह से संबंधित हैं। अधिकतर प्रवाल भोजन के लिए जूक्सेंटहेली शैवाल पर निर्भर रहते हैं।
प्रवाल कैसे प्रजनन करते हैं?
प्रवालों की कई प्रजाति साल में एक या दो बार प्रजनन करते हैं और वह अपने अंडाणु और शुक्राणु को पानी में छोड़ते हैं। जब दोनों मिलते हैं तो उससे लार्वा बनता है। बच्चा प्रवाल छोटी जेलीफिश की तरह दिखता है और शुरू में सतह पर तैरता रहता है। फिर जाकर किसी सख्त सतह से जुड़ जाता है।












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