दावा- तालिबान के चंगुल से मुक्त हुए तीन जिले, आतंक के खिलाफ इन कमांडर्स ने संभाला मोर्चा
काबुल, 21 अगस्त। अफगानिस्तान की राष्ट्रीय राजधानी काबुल पर कब्जे के बाद जहां तालिबान ने पूरे देश में अपनी हुकूमत का ऐलान किया वहीं, अब उसके खिलाफ देश में विद्रोह भी शुरू हो गया है। अफगानिस्तान में बिगड़े हालात के बीच कुछ गुट अपने इलाके तालिबान के कब्जे से वापस छीनने की कोशिश में जुट गए हैं। दावा किया जा रहा है कि तालिबानी लड़ाकों के कब्जे से तीन जिले मुक्त भी करा लिए गए हैं, हालांकि तालिबान की तरफ से अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

तालिबान के कब्जे से मुक्त हुए तीन जिले
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक 'Pajhwok अफगान न्यूज' ने दावा किया है कि तालिबान के चंगुल से तीन जिले आजाद करा लिए गए हैं। तालिबान के कब्जे वाले अंद्राब बघलान के तीन जिलों को अब्दुल हामिद दादगर ने मुक्त करा लिया है। इन दावों को लेकर फिलहाल तालिबान की तरफ से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। बताया जा रहा है कि तालिबानियों को पहले भी मात दे चुके नॉर्दन अलायंस के पूर्व कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद मोर्चे की अगुवाई कर रहे हैं।

नॉर्दन अलायंस के सैनिकों ने खोला मोर्चा
आपको बता दें कि तालिबान के खिलाफ पहले भी नॉर्दन अलायंस के लड़ाके जंग छेड़ चुके हैं, अहमद शाह मसूद के गढ़ कहे जाने वाले पंजशीर में आज तक तालिबान कब्जा नहीं कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक एक बार फिर तालिबान के लिए पंजशीर सिरदर्द बन सकता है। वर्तमान में यहीं से अहमद मसूद की अगुवाई में तालिबान के खिलाफ नॉर्दन अलायंस सैनिकों ने मोर्चा संभालना शुरू कर दिया है। तालिबान के खिलाफ अहमद मसूद हजारों लड़ाके तैयार कर रहे हैं।

अहमद मसूद कर रहे जंग की अगुवाई
अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट में छपी एक लेख के जरिए अहमद मसूद ने तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोलने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि पंजशीर इलाके में उनको मुजाहिद्दीन के हजारों लड़ाकों का साथ मिला है, जो तालिबान के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार हैं। अहमद मसूद ने कहा कि अफगानिस्तान से भले ही अमेरिका चला गया हो लेकिन वो हमारी हथियार और अन्य तरीकों से सहायता कर सकता है। इससे हम तालिबान को मात दे सकेंगे।

अमरुल्ला सालेह ने भी संभाला मोर्चा
अहमद मसूद के अलावा खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर चुके अमरुल्ला सालेह ने भी तालिबान के खिलाफ मोर्चे का ऐलान कर दिया है। उन्होंने अपने एक बयान में कहा था कि वह कभी तालिबान आतंकवादियों के सामने नहीं झुकेंगे। बताया जा रहा है कि काबुल में तालिबान के प्रवेश के बाद से अमरुल्ला सालेह भी पंजशीर में रह रहे हैं। अमरुल्ला अफगान के पूर्व सैनिकों, पुलिस और अन्य लोगों के साथ मिलकर उसे मात देने की फिराक में हैं।

पंजशीर से खौफ खाता है तालिबान
अफगानिस्तान में पंजशीर ऐसे इकलौता इलाका है जहां तालिबान 1980 से लेकर 2021 तक कभी भी कब्जा नहीं जमा पाया। इतना ही नहीं, अमेरिकी सेना और सोवियत संघ भी कभी पंजशीर पर जमीनी कार्रवाई नहीं कर सका, हालांकि कई बार हवाई हमले से यहां के लोगों के इरादे को कमजोर करनी की कोशिश की गई है। यहां की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि दुश्मन कभी भी जमीन पर से हमला करने के बारे में सोच ही नहीं सकता।
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