अफगानिस्तान को लेकर भारत में बहुत बड़ी बैठक, दिल्ली में सीआईए और रूसी सुरक्षा एजेंसी के प्रमुख मौजूद

एससीओ और क्वाड की बैठक से पहले सीआईए के प्रमुख और रूसी सिक्योरिटी एजेंसी के प्रमुख दिल्ली पहुंचे हैं।

नई दिल्ली, सितंबर 08: अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारत में बहुत बड़ी बैठक चल रही है। जिसमें भाग लेने के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के प्रमुख और रूस की सुरक्षा एजेंसी के प्रमुख दिल्ली पहुंचे हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों उच्चाधिकारियों ने दिल्ली का दौरा किया है। माना जा रहा है कि दिल्ली में सीआईए प्रमुख ने भारतीय एनएसए अजीत डोवाल के साथ बैठक की है, वहीं अब रूसी सुरक्षा प्रमुख के साथ भारत की बैठक होने वाली है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि रूसी सुरक्षा एजेंसी के प्रमुख भारतीय प्रधानमंत्री से भी मुलाकात कर सकते हैं।

अफगानिस्तान पर प्रमुख बैठक

अफगानिस्तान पर प्रमुख बैठक

आधिकारिक सूत्रों के हवाले से द हिंदू ने रिपोर्ट दी है कि अमेरिका और रूस के खुफिया प्रमुख अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली पहुंचे और अफगानिस्तान के मौजूदा हालात को लेकर दोनों देश आपस में काफी करीबी संपर्क में हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) के प्रमुख विलियम बर्न्स के नेतृत्व में खुफिया और सुरक्षा अधिकारियों का एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा है और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के साथ बातचीत की गई है। मंगलवार को अफगानिस्तान में लोगों को निकालने की कोशिश और तालिबान सरकार के गठन से उत्पन्न कई मुद्दों पर चर्चा की गई है।

भारत-रूस की बातचीत

भारत-रूस की बातचीत

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बुधवार को रूसी सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव जनरल निकोले पेत्रुशेव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एनएसए डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक रुसी रक्षा सचिव आज भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अजीत डोवाल के साथ बैठक करेंगे, जिसमें अफगानिस्तान संकट के बीच उपजे सुरक्षा हालातों पर बैठक की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक के दौरान अफगानिस्तान संकट के बीच सुरक्षा व्यवस्था, राजनीतिक और मानवीय सहायता देने पर बातचीत की जाएगी। सूत्रों ने बताया है कि इस बैठक के दौरान भारत और रूस के बीच राजनीतिक सुरक्षा सहयोग और अफगानिस्तान के मुद्दे पर बातचीत की जाएगी।

बैठक क्यों है काफी महत्वपूर्ण

बैठक क्यों है काफी महत्वपूर्ण

अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा अंतरिम सरकार के गठन के बाद भारत, अमेरिका और रूस के बीच अलग अलग होने वाली ये बैठकें काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ ब्लॉक में में अमेरिकी और रूसी अधिकारियों के साथ अलग अलग बैठकें होंगी। अफगानिस्तान में तालिबान ने मोहम्मद हसन अखुंद और अब्दुल गनी बरादर के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार की घोषणा कर दी है। वहीं, आने वाले वक्त में एससीओ और क्वाड शिखर सम्मेलन होने वाले हैं। क्वाड की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन शामिल होंगे। लिहाजा, दोनों देशों के सुरक्षा और खुफिया उच्चाधिकारियों का भारत दौरा काफी अहम है।

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    16 सितंबर को एससीओ की बैठक

    16 सितंबर को एससीओ की बैठक

    आपको बता दें कि 16 सितंबर को भारत एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) की बैठक में शामिल है, जिसमें माना जा रहा है कि पीएम मोदी अफगानिस्तान में आतंकियों का साथ देने के लिए पाकिस्तान को बेनकाब कर सकते हैं। ये बैठक 16 और 17 सितंबर को की जाएगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एससीओ की बैठक के दौरान ऐसी संभावना है कि भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी सीधे तौर पर तालिबान का नाम नहीं लेंगे, लेकिन वो पाकिस्तान पर जोरदार हमला बोलने वाले हैं। वहीं, पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से सांठगांठ को वैश्विक सुरक्षा पर खतरा बता सकते हैं। वहीं, इस बात की पूरी संभावना है कि पंजशीर में पाकिस्तानी एयरफोर्स ने जो बमबारी की है, उसका मुद्दा भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उठा सकते हैं। आपको बता दें कि एससीओ की बैठक में भारत के अलावा चीन, पाकिस्तान और रूस भी शामिल होगा और उससे पहले रूसी खुफिया विभाग के प्रमुख भारत के दौरे पर पहुंचे हैं और पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे।

    भारत को चिंता

    भारत को चिंता

    अफगानिस्तान में तालिबान का शासन स्थापित होने के बाद भारत को कश्मीर में आतंकी वारदातों में इजाफा होने और अफगानिस्तान की जमीन का भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने की आशंका है। खासक उस वक्त ये चिंता और बढ़ गई है जब हक्कानी नेटवर्क का तालिबान की सरकार में काफी दबदबा है। 50 लाख डॉलर का इनामी आतंकवादी और भारत से नफरत करने वाला आतंकवादी सिराजुद्दीन हक्कानी अफगानिस्तान का गृहमंत्री बनाया गया है, जिसे पाकिस्तान का पूरा समर्थन हासिल है, लिहाजा भारत अफगानिस्तान के हालात पर काफी करीबी से नजर बनाए हुए है। वहीं, रूस ने भी कहा है कि तालिबान की सरकार बनने के बाद कश्मीर की तरफ तालिबानी आतंकी आ सकते हैं। लिहाजा माना जा रहा है कि अमेरिका और रूस के सुरक्षा अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दें उठाए जाएंगे।

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