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'बेवकूफ है श्रीलंका, जिसने भारी चीनी निवेश पर दांव लगाया', दुर्गति देखकर बुरी तरह भड़के CIA चीफ

अमेरिकी खुफिया एजेंसी के प्रमुख इकलौते नहीं हैं, बल्कि कई और विशेषज्ञों ने कहा है कि चीन की कर्ज जाल कूटनीति श्रीलंका के अभूतपूर्व आर्थिक संकट का एक प्रमुख कारण बन गई है।

कोलंबो/वॉशिंगटन, जुलाई 21: श्रीलंका बुरी तरह से आर्थिक संकट में फंसा हुआ है और इस परेशानी से देश का निकलना काफी ज्यादा मुश्किल है। आर्थिक संकट के साथ साथ श्रीलंका राजनीतिक संकट में भी घिरा हुआ है और बुधवार को रानिल विक्रमसिंघे को देश का नया राष्ट्रपति चुना गया है और ये देखना होगा, कि आर्थिक भंवर में फंसे देश को रानिल विक्रमसिंघे कैसे बाहर निकालते हैं। वहीं, श्रीलंका की बेहाल स्थिति पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के प्रमुख बिल बर्न्स बुरी तरह से भड़के हुए हैं और उन्होंने इसके लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया है।

श्रीलंका संकट पर भड़के सीआईए चीफ

श्रीलंका संकट पर भड़के सीआईए चीफ

श्रीलंका में आर्थिक संकट के लिए चीन किस हद तक जिम्मेदार है? बिल बर्न्स, जो अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) के प्रमुख हैं, उन्होंने बुधवार को दक्षिण एशियाई राष्ट्र श्रीलंका की आर्थिक संकट के लिए चीन पर लगाए गए "बेवकूफ दांव" को जिम्मेदार ठहराया। आपको बता दें कि, श्रीलंका की मौजूदा स्थिति ये है, कि देश के पास ना ईंधन और ना है रसोई गैस। वहीं, देश में 15 से 20 घंटे तक बिजली कटौती की जाती है। वहीं, देश की करीब 60 लाख जनता कम खाना खा रही है। वहीं, माना जा रहा है, कि आने वाले वक्त में स्थिति और भी ज्यादा खराब होने वाली है और खाद्य संकट और भी गहराने वाला है।

अमेरिकी अधिकारी ने क्या कहा?

अमेरिकी अधिकारी ने क्या कहा?

शीर्ष अमेरिकी खुफिया अधिकारी बिल बर्न्स ने कहा कि, दक्षिण एशियाई देश श्रीलंका के नेताओं ने काफी उच्च दर पर चीनी निवेश लिया, जो श्रीलंका के आर्थिक पतन के प्रमुख कारकों में से एक था। उन्होंने कहा कि, चीनियों के पास 'फेंकने' के लिए बहुत अधिक वजन है और वे अपने निवेश के लिए एक बहुत ही आकर्षक मामला बना सकते हैं। समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, बर्न्स ने एस्पेन सिक्योरिटी फोरम को बताया कि, सभी देशों को 'श्रीलंका जैसी जगह को एक सबक' के तौर पर लेना चाहिए, जिन्होंने चीन से भारी कर्ज लेकर अपने आर्थिक भविष्य के बारे में कुछ वास्तव में मूर्खतापूर्ण दांव लगाए हैं और पीड़ित हैं और जो आज गंभीर और विनाशकारी आर्थिक परिणामों के साथ साथ राजनीतिक परिणाम से भी गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, "मुझे लगता है कि, न केवल मध्य पूर्व या दक्षिण एशिया में, बल्कि दुनिया भर में, इस तरह की डील करने के लिए आपकी आंखे खुली होनी चाहिए'।

चीन के खिलाफ तेज होती आवाजें

चीन के खिलाफ तेज होती आवाजें

अमेरिकी खुफिया एजेंसी के प्रमुख इकलौते नहीं हैं, बल्कि कई और विशेषज्ञों ने कहा है कि चीन की कर्ज जाल कूटनीति श्रीलंका के अभूतपूर्व आर्थिक संकट का एक प्रमुख कारण बन गई है। चीन ने श्रीलंका में भारी निवेश किया है और पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के साथ कई ऐसे डील किए हैं, जिसने श्रीलंका की अर्थव्यवस्था का गला घोंट दिया है। द वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग श्रीलंका का सबसे बड़ा लेनदार रहा है। देश के विदेशी ऋण का लगभग 10 प्रतिशत क्रेडिट खाते में है। साल 2000 से 2012 के बीच चीन ने श्रीलंका को कर्ज के तौर पर करीब 12 अरब डॉलर दिए हैं। रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है कि 2017 में, श्रीलंका के कोलंबो में बंदरगाह निर्माण के लिए चीन ने 1.4 अरब डॉलर का कर्ज दिया था और अब उसपर चीन की एक कंपनी ने 99 सालों के लिए कब्जा कर लिया है।

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