ईसाई मैकेनिक ने कहा पैगंबर नहीं, जीसस हैं सुप्रीम, पाकिस्तानी कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा
पाकिस्तान में ईशनिंदा के मामले को लेकर लोगों की जान लेने की घटना कोई नई बात नहीं है। अब और एक मामला सामने आया है जिसमें लाहौर में ईसाई धर्म मानने वाले एक व्यक्ति को ईशनिंदा के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई है।
इस्लामाबाद, 10 जुलाईः पाकिस्तान में ईशनिंदा के मामले को लेकर लोगों की जान लेने की घटना कोई नई बात नहीं है। अब और एक मामला सामने आया है जिसमें लाहौर में ईसाई धर्म मानने वाले एक व्यक्ति को ईशनिंदा के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई है। व्यक्ति पर बस आरोप था कि उसने पैगंबर के बदले जीसस को सुप्रीम कहा था।

कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा
ईशनिंदा के आरोप में पाकिस्तान की एक कोर्ट ने एक अल्पसंख्य ईसाई व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई है। पेशे से बाइन मैकेनिक का काम करने वाले अशफाक मसीन पर यह आरोप था कि उसने करीब पांच साल पहले एक ग्राहक के सामने कथित तौर पर एक पैगंबर का अपमान किया था। अशफाक मसीह नाम के इस व्यक्ति को जून 2017 में गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप था कि उसने जीजस को 'सुप्रीम' बताया था। बता दें कि पाकिस्तान का नाम उन देशों में शामिल है जहां ईशनिंदा (Blasphemy) को लेकर फांसी की सजा दी जाती है।

40 रुपये के चक्कर में हुआ विवाद
बाइक रिपेयरिंग का करने वाला अशफाक अपनी दुकान पर एक शख्स की बाइक ठीक कर रहा था। जब उसने बाइक ठीक करने के 40 रुपये मांगे तो ग्राहक ने उससे डिस्काउंट देने को कहा। जब मसीह ने इसका कारण पूछा तो ग्राहक ने कहा कि वह मौलाना है और उसे धार्मिक आधार पर छूट मिलनी चाहिए। मसीह ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। नसीह ने ग्राहक से कहा कि वह ईसाई है और पैगंबर नहीं, जीसस पर विश्वास करता है। इसके बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया और भीड़ जमा होने लगी।

पैगंबर मोहम्मद के अपमान का आरोप
मौके पर भारी भीड़ के बीच पर विवाद बढ़ने लगा तो लोगों ने मसीह से कहा कि उसे प्रोफेट मुहम्मद का अपमान किया है। इसके बाद मसीह ने कहा कि क्रिश्चिन में जीसस सुप्रीम हैं। इससे बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मसीह को गिरफ्तार कर उससे खिलाफ रसूल की तौहीन का केस दर्ज कर लिया, और उसे जेल भेज दिया गया।

पाकिस्तान में घबराए अल्पसंख्यक
साल 2017 से चल रहे मसीह के खिलाफ ईशनिंदा के मामले के कई पड़ाव आए। एक बेटी और पत्नी के इकलौते रखरखाव करने वाले मसीह ने साल 2019 में अपनी मां को खो दिया। उसे मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत दी गई। मसीह की सजा ने नागरिक समाज समूहों और मानवाधिकारों की आवाजों को बुलंद करने वाले लोगों के बीच चिंता पैदा कर दी है। हिंदुओं, ईसाइयों और अन्य लोगों सहित गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बनाने पर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है, जिन पर कभी-कभी ईशनिंदा का झूठा इल्जाम लगाया जाता है।

ईशनिंदा कानून का दुरुपयोग
बता दें कि पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून का सबसे अधिक शिकार वहां के अल्पसंख्यक होते हैं। कई बार इस कानून के तहत लोगों के फंसाने की खबरें भी आती हैं। पाकिस्तान के बहावलपुर में एक हिंदू परिवार के पांच लोगों पर ईशनिंदा का आरोप लगाया था, लेकिन वह आरोप झूठा निकला और वह परिवार बच निकला। इसी साल जनवरी में ही 26 साल की एक महिला को ईशनिंदा के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई थी। उसका आरोप बस ये था कि उसने व्हाट्सएप स्टेटस के तौर पर कथित रूप से पैगंबर मोहम्मद का कैरिकेचर लगा दिया था।
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