‘दुनिया को नए शीत युद्ध का विरोध करना चाहिए’, आसियान शिखर सम्मेलन में बोला चीन, क्यों परेशान हुआ ड्रैगन?
चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने बुधवार को कहा कि प्रमुख शक्तियों को एक नए शीत युद्ध का विरोध करना चाहिए। चीनी पीएम का ये बयान यह बयान इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित आसियान कार्यक्रम के दौरान आया है।
इस कार्यक्रम में शीर्ष एशियाई और अमेरिकी अधिकारी इंडोनेशिया में बातचीत के लिए एकत्र हुए। चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने जकार्ता में आसियान प्लस थ्री बैठक में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने अमेरिका समर्थित गुटों के गठन को लेकर चिंता जताई।

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बैठक की शुरुआत में उन्होंने कहा, "गलत धारणाओं, अलग-अलग हितों या बाहरी हस्तक्षेप के कारण देशों के बीच असहमति और विवाद पैदा हो सकते हैं।" ली कियांग ने कहा कि मतभेदों को नियंत्रण में रखने के लिए, किसी पक्ष को चुनने का विरोध करना और एक नए शीत युद्ध का विरोध करना आवश्यक है।
दक्षिण पूर्व एशिया राष्ट्र संघ (आसियान) चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के साथ अलग-अलग शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहा है, जो बड़ी शक्तियों को गुट की पैरवी करने और उनकी प्रतिद्वंद्विता को आगे बढ़ाने के लिए एक क्षेत्र प्रदान कर रहा है।
राष्ट्रपति जो बाइडेन के स्थान पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया है। वहीं, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के स्थान पर पीएम ली कियांग इसमें हिस्सा ले रहे हैं। भाग ले रहे थे।
मेजबान इंडोनेशिया ने मंगलवार को आसियान नेताओं के शिखर सम्मेलन में कहा कि यह ब्लॉक बड़ी शक्ति प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं बनेगा। उनकी टिप्पणी ताइवान, दक्षिण चीन सागर और यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को लेकर अमेरिका-चीन के बीच तनातनी को लेकर थी।
आपको बता दें कि आसियान के आधे से भी अधिक देशों जिनमें, इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रूनेई, कंबोडिया, फिलीपींस आदि शामिल हैं, का चीन के साथ सीमा को लेकर विवाद चल रहा है। हालांकि, भारत इस समूह का सदस्य नहीं है, लेकिन आसियान, भारत की एक्ट-ईस्ट नीति का स्तंभ है।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में बताया कि यह शिखर सम्मेलन भारत-आसियान संबंधों की प्रगति की समीक्षा करेगा और सहयोग की भविष्य की दिशा तय करेगा। अगस्त में, आसियान-भारत के आर्थिक मंत्रियों की इंडोनेशिया में बैठक हुई और इस साल की बैठक का मुख्य एजेंडा आसियान-भारत व्यापार समझौते (एआईटीआईजीए) की समय पर समीक्षा करना था, जिस पर 2009 में हस्ताक्षर किए गए थे।












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