भारत पर नजर रखने के लिए श्रीलंका में रडार बेस बना रहा चीन, जानिए ड्रैगन का खतरनाक प्लान
चीन डोंडरा बे में रडार बेस बनाने की तैयारी कर रहा है। ये इलाका पहले श्रीलंका की राजधानी हुआ करती थी। ये देश के दक्षिणी छोर पर स्थित है।

Image: Oneindia
चीन हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति पर नजर रखने के उद्देश्य से श्रीलंका में एक रडार बेस बनाने की तैयारी कर रहा है। ये रडार बेस श्रीलंका के डोंडरा बे के जंगलों में बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व चीन की साइंस एकेडमी कर रही है।
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के रडार सिस्टम बनाने का खुलासा श्रीलंका की इंटेलिजेंस एजेंसी के सूत्रों ने किया है। ये रडार बेस दक्षिण भारत में भारत के सामरिक एसेट्स की मॉनिटरिंग के अलावा भारतीय नौसेना की गतिविधियों पर भी नजर रखेगा।
इस बेस से चीन, भारत के कुडनकुलम और कलपक्कम न्यूक्लियर पावर प्लांट पर नजर रख सकता है। इससे अंडमान निकोबार आईलैंड्स में भारतीय नेवी के मूवमेंट को भी आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा। श्रीहरकोटा में भारत का स्पेस स्टेशन भी इसकी रेंज में होगा।
यदि चीन इस रडार को सफलतापूर्वक तैनात करता है, तो रडार सेट-अप इस क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हितों के लिए हानिकारक होगा और भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को खतरे में डालेगा।
श्रीलंका इस क्षेत्र में चीन के मंसूबों को लेकर आशंकित रहता है, लेकिन देश पर चीनी कर्ज के कारण वह खुद को असुरक्षित महसूस करता है। डोंड्रा खाड़ी श्रीलंका के सबसे दक्षिणी सिरे पर स्थित है। यह श्रीलंका के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस रडार की मदद से चीन न सिर्फ भारत की गतिविधि बल्कि वह ब्रिटेन और यूके की गतिविधियों पर भी नजर रख सकता है। इस रेडार की मदद से चीन सैन्य अड्डा डिएगो गार्सिया पर नजर रख सकता है। डिएगो गार्सिया मॉरीशस का द्वीप है। हालांकि डिएगो गार्सिया पर इस वक्त इस पर ब्रिटेन का कब्जा है।
ब्रिटेन ने 1960 के दशक में इस द्वीप को अमेरिका को लीज पर दे दिया है। अमेरिका का द्वीप का 1936 तक सैनिक उपयोग के लिए इस्तेमाल कर सकता है। पूर्वी अफ्रीका, पूर्वी एशिया और दक्षिण एशिया के मध्य में स्थित होने के कारण यह द्वीप अमरीकी नौ सैनिकों के लिए एक चौकी जैसा काम करता है।












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