जानिए कैसे जासूसी के जाल में दुनिया को जकड़ रहा है ड्रैगन? जिनपिंग के इस कदम से भारत पर खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक, आश्चर्यजनक तौर पर चीन से जुड़े आर्थिक जासूसी के मामलों में पिछले 10 सालों में 1,300% की वृद्धि दर्ज की गई है और चीन सिर्फ हथियारों का ही निर्माण जंग जीतने के लिए नहीं कर रहा है....
हांगकांग, दिसंबर 21: चीन अपने राष्ट्रीय खुफिया तंत्र को एक खतरनाक हथियार के तौर पर गलत तरीके से दुनियाभर से जानकारियां जुटाने के लिए इस्तेमाल करता रहा है। चीन जंग सिर्फ हथियार से ही नहीं जीतना चाहता है, बल्कि चोरी कर वो दुश्मन को खोखला भी करना चाहता है। पहले चीन दुनियाभर से टेक्नोलॉजी की चोरी के साथ साथ जानकारियों की चोरी व्यक्ति आधारित, या फिर व्यापार आधारित जासूसों के जरिए करता था, जिसके लिए चीन की सरकार बकायदा पैसे खर्च करती थी। लेकिन, अब चीन ने जासूसी का तरीका बदला है। वहीं, दुनियाभर में चीन द्वारा की जा रही जासूसी और जासूसी के तरीके पर बड़ा खुलासा भी हुआ है, जो हैरान करने वाला है।

चायनीज जासूसी पर बड़ा खुलासा
दरअसल, 3 नवंबर 2021 को पेंटागन ने चीन की सैन्य शक्ति पर एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें चीन की जासूसी और जासूसी करने के तरीकों पर बकायदा एक पूरा खंड छापा गया है। जिसमें बताया गया है कि, चीन कैसे दुनियाभर से संवेदनशील जानकारियों की चोरी करता रहा है। पिछले साल अमेरिका की एफबीआई ने चीन से संबंधित काउंटर-इंटेलिजेंस को लेकर फाइल बनाई थी, जिससे ये पता चला था कि, हर 10 घंटे पर जासूसी द्वारा निकाले गये डॉक्यूमेंट्स को चीन भेजा जाता है। इसके अलावा एफबीआई के डायरेक्टर क्रिस्टोफर रे ने पिछले साल कहा था कि, सिर्फ साल 2020 में एफबीआई के पास चीन के खिलाफ काउंटरइंटेलिजेंस से संबंधित 5 हजार मामले दर्ज किए गये।

1300 प्रतिशत ज्यादा आर्थिक जासूसी
रिपोर्ट के मुताबिक, आश्चर्यजनक तौर पर चीन से जुड़े आर्थिक जासूसी के मामलों में पिछले 10 सालों में 1,300% की वृद्धि दर्ज की गई है। पेंटागन ने यह भी खुलासा किया है कि, "चीन के कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा शासित पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चायना लगातार गुप्त तरीके से, संवेदनशील दस्तावेज, संवेदनशील हथियारों से संबंधित जानकारी और डुएल यूज मिलिट्री ग्रेड उपकरण हासिल करने की कोशिश में भी हमेशा चीन लगा रहता है। एफबीआई ने खुलासा किया है कि, संवेदनशील सामान, जिनमें हथियार बनाने वाले उपकरण सर्किट, मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट, एक्सेलेरोमीटर, जायरोस्कोप, नेवल और मरीन टेक्नोलॉजीज, सिंटैक्टिक फोम ट्रेड सीक्रेट्स, स्पेस कम्युनिकेशंस, मिलिट्री कम्युनिकेशन जैमिंग इक्विपमेंट, डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी, एविएशन टेक्नोलॉजी और एंटी-सबमरीन वारफेयर की भी चोरी करने की फिराक में हमेशा रहता है।

चीनी नागरिक को जेल की सजा
उदाहरण के तौर पर चीन के रहने वाले एक जासूस किंगशान को साल 2020 में जासूसी के आरोप में तीन साल की सजा सुनाई गई है। आरोप के मुताबिक, चीनी नागरिक किंगशान ली को एक संवेदनशील रेडियो चुराकर भेजने के आरोप में पकड़ा गया था। इसके बाद सितंबर 2020 में एक और चीनी नागरिक को दोषी पाया गया था, क्योंकि वो निर्यात संबंधित कानून में ही धोखाधड़ी कर एक गुप्त सामान को चीन भेजने की कोशिश कर रहा था। उसे बाद में सजा भी सुनाई गई। एफबीआई के पास चीनी जासूसी से संबंधित कई उदाहरण है। 16 सितंबर 2020 को यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने पांच चीनी हैकरों पर दुनिया भर की 100 से ज्यादा कंपनियों, थिंक टैंक, विश्वविद्यालयों और सरकारी एजेंसियों से संवेदनशील डॉक्यूमेंट्स चुराने के आरोप में सजा सुनाई थी।

विमान कंपनियों के कागजात चुराने की कोशिश
सबसे हालिया उदाहरण के एक चीनी खुफिया अधिकारी जू यानजुन का है, जिसे विमानन कंपनियों से रहस्य चुराने की साजिश रचने का दोषी ठहराया गया था। एफबीआई के सहायक निदेशक एलन कोहलर ने चेतावनी दी कि, "जो लोग चीन के वास्तविक लक्ष्यों पर संदेह करते हैं, उनके लिए यह एक वेकअप कॉल होनी चाहिए कि वो किस तरह से चोरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, अमेरिकन टेक्नोलॉजी को चुराकर वो अपनी अर्थव्यवस्था और मिलिट्री को मजबूत बना रहे हैं। हकीकत ये है कि, चीनी नागरिकों का जासूसी में शामिल होना और उनके खिलाफ मुकदमा चलाना काफी आम हो चुका है, क्योंकि चीन की तरफ से एक बड़ी संख्या को जासूसी के काम में उतारा गया है, और वो दूसरे देशों की लोकतांत्रिक व्यवस्था का फायदा उठाते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की जासूसी करने की कोशिश
33 साल का चीनी जासूस युजिंग झांग, जो शंघाई में व्यापारिक सलाहकार था, उसे साल 2019 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जासूसी करने के आरोप डोनाल्ड ट्रंप के घर मार-ए-लागो रिसॉर्ट में गिरफ्तार किया गया था। सबसे दिलचस्प बात ये है कि, जासूसी करने के लिए चीन ज्यादातर उन चीनी नागरिकों का इस्तेमाल करता है, जो चीन के बाहर किसी और देश में रह रहे हैं और फिर जासूसी करने के लिए उन्हें फंड देते हैं और प्रेरित करते हैं। चीन का प्रशासन इसके लिए कई तरीके, जैसे जबरदस्ती, ब्लैकमेल या हेरफेर के तरीकों का इस्तेमाल करता है। उदाहरण के लिए, सहयोग नहीं मिलने पर यह चीन में रिश्तेदारों को जेल में डालने की धमकी दे सकता है। उदाहरण के लिए, उइगर प्रवासी के बीच यह बहुत आम है, जहां दस लाख से अधिक उइगर पहले से ही कंसंट्रेशन कैंप में कैद हैं और अगर उसने जासूसी नहीं की, या अपनी कंपनी के डॉक्यूमेंट्स नहीं दिए, तो उसका परिवार भी कैंप में डाल दिया जाएगा।

प्रोपेगेंडा का इस्तेमाल
इसके साथ ही चीन की सरकार अपनी सॉफ्ट पावर को आगे बढ़ाने के लिए अकादमिक, शैक्षणिक संस्थानों, थिंक-टैंक और राज्य द्वारा संचालित मीडिया का भी उपयोग करता है। उदाहरण के लिए, चीनी छात्र दलाई लामा के खिलाफ कहीं भी विरोध प्रदर्शन आयोजित कर सकते हैं। इसके साथ ही अलग अलग देशों में चीनी जानकार कन्फ्यूशियस संस्थान खोलते रहते हैं। हालांकि, अब पश्चिमी देश धीरे-धीरे कम्युनिस्ट चीन के नापाक तरीकों से रूबरू हो रहे हैं, लेकिन बीजिंग अभी भी उनके लचीले नियमों का फायदा उठा रहा है। उदाहरण के लिए, इटली में, यह पाया गया कि दो चीनी राज्य फर्मों ने एक फर्जी कंपनी बनाकर 2018 में इतालवी सैन्य ड्रोन-निर्माता एल्पी एविएशन पर गुप्त रूप से नियंत्रण हासिल कर लिया, जिसकी अब इतालवी अधिकारी उस सौदे की जांच कर रहे हैं।

जासूसी के लिए नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
पारंपरिक तरीकों के अलावा अब चीन ने जासूसी और चोरी के लिए टेक्नोलॉजी की मदद लेनी भी शुरू कर दी है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस व्हीकल, क्वांटम जैसे क्षेत्रों में चीन की काफी ज्यादा दिलचस्पी है। खासकर चीन की कंपनियां, ऐसे क्षेत्रों में निवेश करने के लिए काफी तत्पर रहती हैं, जिसका सिरा डिफेंस सेक्टर से मिलता हो, ताकि वो किसी दूसरे देश के डिफेंस सेक्टर से जानकारियां हासिल कर सके। साल 2015 में अमेरिका के कार्मिक प्रबंधन कार्यलय में बहुत बड़ी सेंधमारी हुई थी, जिसका शक चीन पर ही गया था। अमेरिकन कार्यालय में की गई ये सबसे बड़ी घुसपैठ थी, जिसमें अमेरिकी सरकार को हिला कर रख दिया था और ऐसा माना जा रहा है कि, जो जानकारियां चीन तक पहुंची हैं, वो उसके लिए सोने के खान जैसी साबित होगी।

जानकारियां चुराकर क्या करता है चीन?
चीन ना सिर्फ डेटा इकट्ठा करता है या डॉक्यूमेंट्स की चोरी करता है, बल्कि गुप्त माध्यमों से वो इनका इस्तेमाल सकारात्मक छवि बनाने के लिए भी करता है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि, "... पीआरसी संयुक्त राष्ट्र के सांस्कृतिक संस्थानों, मीडिया संगठनों, व्यापार, शैक्षणिक और नीति समुदायों को लक्षित करके अपनी सुरक्षा और सैन्य रणनीति के उद्देश्यों के अनुकूल परिणामों को प्राप्त करने के लिए इन्फ्लुएंस ऑपरेशंस चलाता है, ताकि वो इनपर अपना प्रभाव डाल सके। रिपोर्ट के मुताबिक, चीनव की कम्युनिस्ट पार्टी इन डॉक्यूमेंट्स के आधार पर विदेशी और बहुपक्षीय राजनीतिक प्रतिष्ठानों को 'एक चीन सिद्धांत', वन बेल्ट वन रोड, हांगकांग पर चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी की नियंत्रण की घोषणा जैसी प्राथमिकताओं को पूरा करने की कोशिश करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, इन कामों को करने के लिए चीन ने बड़े एक्टर्स को रखा हुआ है, जो अलग अलग मंत्रालयों में शामिल होकर चीन के मनमाफिक काम करवाते है।

साजिश का बहुत बड़ा नेटवर्क चलाता है चीन
विडंबना यह है कि, चीन बहुत आसानी से यह दिखाने में कामयाब हो जाता है कि, वो किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता है, लेकिन चीन, जासूसी कर लाए गये उन डाक्यूमेंट्स के जरिए, सोशल मीडिया के जरिए और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए हांगकांग और शिनजिंयाग पैसे मुद्दों पर अपने हिसाब से आमराय कायम करने की कोशिश करता है। पेंटागन ने समझाया कि, ''चाहे युद्धकाल हो या फिर शांतिकाल, चीन तीन तरहों से सोशल मीडिया प्रभाव को अपने पक्ष में करने की कोशिश करता है। पहला तरीका पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चायना के पक्ष में प्रोपेगेंडा चलवाता है, दूसरा अपने विरोधियों के खिलाफ जमकर दुष्प्रचार करता है और तीसरा बीजिंग के हितों के पक्ष में विदेशी सरकारों की नीतियों को आकार देने का काम करता है। 2018 में हुए ताइवान के चुनाव में चीन ने इन्हीं तरीकों का इस्तेमाल कर चुनावी परिणाम को अपने पक्ष में कर लिया था।

अपने घर में और सख्ती बढ़ा रहा चीन
एक तरफ चीन लगातार दूसरे देशों में जासूसी का जाल और मजबूती से फैलाता जा रहा है, जबकि चीन के अंदर विदेशियों के लिए सख्ती और बढ़ती जा रही है। चीन में जाने वाले हर विदेशी शख्स की कई स्तर पर जांच की जाती है। कई बार उनके चेहरे की पहचान की जाती है और अलग अलग सॉफ्टवेयर्स की मदद से चीन जाने वाले विदेशियों पर हर वक्त नजर रखने की कोशिश की जाती है। सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटीज टेक्नोलॉजी एंड नेशनल सिक्योरिटी प्रोग्राम के एक असिस्टेंट एल्सा कानिया ने शेफर्ड मीडिया को बताया कि, चीन में चेहरे की पहचान की व्यापक तैनाती और भी शक्तिशाली होती जा रही है, जिससे काफी व्यापक निगरानी रखी जा सकती है और दिनों दिन इसमें इजाफा ही हो रहा है। वहीं, एक्सपर्ट्स का मानना है कि, चीन ने ये जासूसी का जाल यकीनी तौर पर भारत में भी फैला रखा होगा, या फिर फैलाने की कोशिश कर रहा होगा, लिहाजा ऐसे लोगों को पहचानने और उन्हें सख्त सजा देने की जरूरत है, ताकि ऐसे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।












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