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चीनी मजदूरों को बुलेट प्रूफ कार देगा पाकिस्तान, शी जिनपिंग की शर्तों को शहबाज शरीफ ने माना

पाकिस्तान में पिछले एक साल में चीनी नागरिकों पर कई हमले हो चुके हैं। जिसके बाद सीपीईसी का काम ठप पड़ गया था।

China Pakistan CPEC: पाकिस्तान में तबाह हो चुके कानून व्यवस्था से चीन का विश्वास पूरी तरह से उठ गया है और अब चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानि सीपीईसी परियोजनाओं में काम कर रहने वाले चीनी मजदूर पाकिस्तान में बुलेट प्रूफ कारों में चलेंगे। चीन की सख्ती के बाद पाकिस्तान सरकार शर्तों को मानने के लिए तैयार हो गई है। दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के चीन दौरे के समय दोनों देशों के बीच ये समझौता किया गया था, जिसे मानने के लिए पहले पाकिस्तान तैयार नहीं हुआ था, लेकिन अंत में चीन की शर्तों को मानने के लिए पाकिस्तान को तैयार होना पड़ा है।

पाकिस्तान ने मानी चीन की शर्तें

पाकिस्तान ने मानी चीन की शर्तें

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान और चीन के बीच रविवार को चीनी श्रमिकों को लेकर ये अहम समझौता किया गया है। इस समझौते के मुताबिक, सीपीईसी परियोजना में काम करने वाले चीनी मजदूर जब भी किसी काम से बाहर निकलेंगे, उन्हें पाकिस्तान की सरकार बुलेट प्रूफ कार मुहैया कराएगी। चीन और पाकिस्तान के बीच सीपीईसी की 11वीं ज्वाइंट कॉपरेशन कमेटी(जेसीसी) के ड्राफ्ट में कहा गया है कि, "यह तय किया गया है कि परियोजनाओं में लगे चीन के सभी मजदूरों के सभी बाहरी गतिविधियों के लिए बुलेट प्रूफ वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा।" पाकिस्तानी अखबार ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, 11वें जेसीसी पर शहबाज शरीफ की यात्रा के दौरान दोनों देशों की तरफ से उसके ड्राफ्ट पर दस्तखत नहीं किए गये, लेकिन शहबाज शरीफ का चीन का दौरा खत्म होने के बाद पाकिस्तान की तरफ से चीन की शर्तों को मान लिया गया है।

चीन के आगे झुका पाकिस्तान?

चीन के आगे झुका पाकिस्तान?

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने बैठक के बाद कहा था, कि प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान ड्राफ्ट पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। वहीं, इससे पहले चीन और पाकिस्तान के बीच सीपीईसी को लेकर जो भी समझौते हुए, वो फौरन साइन कर लिए जाते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया जा सका। वहीं, अब अहसान इकबाल ने कहा है, कि शहबाज शरीफ की यात्रा सिर्फ 24 घंटे की ही थी और यात्रा का समय काफी छोटा होने के कारण दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापनों पर दस्तखत नहीं किए जा सके। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि, चीनी मजदूरों को बुलेट प्रूफ सुरक्षा देना पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा अपमान होगा और इससे पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति को लेकर पूरी दुनिया में खराब संदेश जाएगा। वहीं, चीनी मजदूरों को सुरक्षा देने के बाद अब दूसरे देश से आने वाले स्टाफ भी सरकार से ऐसी ही सुरक्षा की मांग करेंगे, जिसे पूर करना पाकिस्तान के लिए आसान नहीं होगा। इतना ही नहीं, पाकिस्तान ने चीन की इस शर्त को भी माना है, कि चीनी मजदूरों को पाकिस्तान की तरफ से और भी ज्यादा सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी और पाकिस्तान की जांच एजेसियों को सुरक्षा व्यवस्था दुरूस्त करने में शामिल होना पड़ेगा।

किन-किन शर्तों का पाकिस्तान ने माना?

किन-किन शर्तों का पाकिस्तान ने माना?

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने चीन के सामने इस्लामाबाद स्थिति नेशनल फॉरेंसिक साइंस लैब को अपग्रेड करने की गुहार लगाई है, जिसको लेकर चीन ने पाकिस्तान को फिलहाल आश्वासन दिया है। इतना ही नहीं, चीन ने कहा है, कि वो पाकिस्तान के अंदर ट्रेनिंग सेंटर्स की स्थापना करेगा, जिसके अंदर पाकिस्तान के निजी सुरक्षा गार्डों और एलईए कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इस ट्रेनिंग सेंटर में निजी गार्ड्स को मॉडर्न टेक्नोलॉजी और मॉड्यूल से लैस किया जाएगा। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पाकिस्तान ने चीन की इन शर्तों को मानकर अपनी संप्रभुता का ही उल्लंघन किया है, क्योंकि अब ट्रेनिंग देने के बहाने चीन के सैनिक पाकिस्तान में कैंप करेंगे। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, चीन की सरकार ने पाकिस्तान से कहा था, कि वो सीपीईसी को लेकर तब तक आगे नहीं बढ़ सकता है, जब तक पाकिस्तान चीनी नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी नहीं लेता है।

चीनी नागरिकों पर हुए हैं कई हमले

चीनी नागरिकों पर हुए हैं कई हमले

पाकिस्तान में पिछले एक साल में चीनी नागरिकों पर कई हमले हो चुके हैं। जिसके बाद सीपीईसी का काम ठप पड़ गया था। सूत्रों के मुताबिक, चीन ने पहले भी पाकिस्तान से मांग की थी, कि वह अपने सुरक्षाकर्मियों को चीनी नागरिकों की सुरक्षा करने दे। लेकिन, सीपीईसी कॉरिडोर में बढ़ती आतंकी वारदातों के बीच पाकिस्तान ने सुरक्षा के लिए एक ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप की स्थापना का प्रस्ताव रखा था, जिसे चीन ने खारिज कर दिया था। चीन लगातार मांग कर रहा था, कि वो अपने सैनिकों को पाकिस्तान में चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए भेजेगा, जिसके लिए अब पाकिस्तान अलग तरह से तैयार हुआ है, यानि चीन के सैनिक ट्रेनर बनकर पाकिस्तान में कैंप चलाएंगे, जिसमें पाकिस्तान के निजी गार्ड्स को ट्रेनिंग दी जाएगी।

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