सरकार बनाने से पहले तालिबान के लिए चीन ने खोला 'खजाना', खुले रहेंगे काबुल में चीनी दूतावास

चीन उइगर मुस्लिमों को शांत रखने के लिए तालिबान से बेहतर संबंध बनाना चाहता है, वहीं अफगानिस्तान में मौजूद अरबों रुपये की खनिज संपदा पर भी चीन की नजर है।

बीजिंग/काबुल, सितंबर 03: तालिबान आज अफगानिस्तान में सरकार बनाने का ऐलान कर सकता है, लेकिन अफगानिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि आखिर तालिबान सरकार कैसे चला पाएगा? ऐसे में तालिबान लगातार वैश्विक समुदाय से मान्यता मांग रहा है। जिसमें उसे चीन की तरफ से बहुत बड़ा आश्वासन मिला है। तालिबान को आर्थिक मदद देने के लिए चीन तैयार हो गया है। तालिबान ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि चीन ने आर्थिक मदद देने का वादा किया है।

तालिबान प्रवक्ता का दावा

तालिबान प्रवक्ता का दावा

तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने शुक्रवार को दावा किया है कि, चीन ने अफगानिस्तान में अपना दूतावास खुला रखने और युद्धग्रस्त देश को मानवीय सहायता बढ़ाने का वादा किया है। तालिबान के प्रवक्ता सुलैह शाहीन ने ट्वीट करते हुए कहा है कि दोहा स्थिति तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के सदस्य अब्दुल सलाम हनफी ने "पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के उप विदेश मंत्री वू जियानघाओ के साथ फोन पर बातचीत की है''। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि "चीन के उप विदेश मंत्री ने कहा कि वे काबुल में अपना दूतावास बनाए रखेंगे, हमारे संबंध अतीत की तुलना में मजबूत होंगे। अफगानिस्तान क्षेत्र की सुरक्षा और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।"

मानवीय मदद देगा चीन

मानवीय मदद देगा चीन

तालिबान के प्रवक्ता ने आगे कहा कि, "अफगानिस्तान में विकास कार्य जारी रखने के लिए भी चीन तैयार हो गया है और चीन की तरफ से अफगानिस्तान को आर्थिक मदद दी जाएगी।'' तालिबान के प्रवक्ता ने कहा है कि 'खास तौर पर कोरोना वायरस से अफगानिस्तान भी प्रभावित है, लिहाजा चीन ने वादा किया है कि कोरोना संकट के दौरान चीन अफगानिस्तान में मानवीय सहायता देने का काम करेगा।' हालांकि, तालिबानी प्रवक्ता के दावे की पुष्टि अभी तक चीन की तरफ से नहीं की गई है। अगर तालिबानी प्रवक्ता का दावा सही है तो ये तालिबान के लिए बड़ी राहत की बात होगी। क्योंकि अमेरिका पहले ही अफगानिस्तान बैंक का करीब 10 अरब डॉलर की संपत्ति को फ्रीज कर चुका है और तालिबान के सामने सरकार बनाने से ज्यादा बड़ी चुनौती बिना पैसों के सरकार चलाने की है। वहीं, ज्यादातर देशों ने फिलहाल तालिबान शासन को मान्यता देने से इनकार कर दिया है।

तालिबान से संबंधों पर चीन की मुहर

तालिबान से संबंधों पर चीन की मुहर

चीन की तरफ से लगातार अफगानिस्तान संकट के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। चीन ने साफ तौर पर कहा है कि अफगानिस्तान में जो संकट बना है, उसके पीछे अमेरिका का अचानक से अफगानिस्तान से बाहर निकल जाना है। वहीं, चीन ने इसी हफ्ते अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर तालिबान की मदद नहीं की गई तो अफगानिस्तान आतंकियों का बड़ा अड्डा बन सकता है, क्योंकि तालिबान बिना पैसों के सरकार चला नहीं सकता है और ऐसी स्थित में अफगानिस्तान में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वहीं माना जा रहा है कि तालिबान को आर्थिक मदद देकर और तालिबान से रिश्ता मजबूत कर, चीन अपने घर में आग लगने से रोकना चाहता है। जुलाई महीने पहले तालिबान के प्रतिनिधियों ने चीन का दौरा किया था, जहां चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने तालिबानी नेताओं को मदद करने का आश्वासन दिया था।

चालू रहेगा चीन का दूतावास

चालू रहेगा चीन का दूतावास

काबुल में चीन का दूतावास चालू है, हालांकि सुरक्षा बिगड़ने के कारण बीजिंग ने महीनों पहले देश से चीनी नागरिकों को निकालना शुरू कर दिया था। लेकिन बीजिंग ने अभी तक तालिबान को वास्तविक सरकार के रूप में मान्यता नहीं दी है, और मुस्लिम-अल्पसंख्यक उइगर अलगाववादियों को शिनजियांग के अपने संवेदनशील सीमा क्षेत्र में घुसपैठ करने के तालिबान के साथ करने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग चाहता है कि चीन में एक स्थिर और सहकारी सरकार बनना उसके हित में है,. लिहाजा चीन चाहता है कि तालिबान एक स्थिर सरकार का निर्माण करे। वहीं, तालिबान चीन को अफगानिस्तान में निवेश और आर्थिक सहायता का एक महत्वपूर्ण स्रोत मान रहा है। चीनी कंपनियां भी अफगानिस्तान की विशाल तांबे और लिथियम खानों पर नजर गड़ाए हुए हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+