China: लद्दाख के बाद समूचे LAC पर भारत के साथ 'नो पेट्रोल जोन' बनाना चाहता है चीन, जानें इसका क्या है मतलब?
'नो पेट्रोल जोन' जोन बनाने का मतलब ये होता है, कि उस क्षेत्र पर दोनों देशों के सैनिक दूर से निगरानी करेंगे, लेकिन उन जगहों पर जाएंगे नहीं। बफर जोन बनने से दोनों देशों के सैनिक विवादित प्वाइंट्स से पीछे हट जाएंगे।

China-India Conflict: चीन और भारत के बीच सरहद को लेकर विवाद सुलझाने की कोशिशें लगातार हो रही हैं और अब चीन की तरफ से भारत के सामने नया प्रस्ताव रखा गया है और चीन चाहता है, कि भारत उसके प्रस्ताव को स्वीकार करे। इस प्रस्ताव के तहत चीन ने तमाम विवादित प्वाइंट्स के साथ साथ पूरे एलएसी के इलाके में 'बफर जोन' बनाने का प्रस्ताव दिया है।
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि चीन सिर्फ पूर्वी लद्दाख में ही नहीं, बल्कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ साथ तमाम विवादित जोन के आसपास गश्ती को बंद करना चाहता है चीन चाहता है, कि दोनों देशों के सैनिक, उत्तराखंड में विवादित सीमा के साथ-साथ अन्य 'विवादित प्वाइंट्स' के आसपास भी गश्त पर रोक को स्वीकार करे, जिसमें हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश भी शामिल हैं।
डेक्कन हेराल्ड ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि "बीजिंग ने हाल ही में एलएसी पर गश्त पर रोक के साथ 'बफर जोन' के निर्माण के प्रस्ताव दिया है, विशेष रूप से उन प्वाइंट्स पर, जहां तनाव रहे हैं और जहां भारत और चीन के बीच वास्तविक सीमा के रूप में कार्य करने वाली रेखा के संरेखण के बारे में धारणा में मतभेद हैं"।
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है, कि नई दिल्ली ने अभी तक चीन के प्रस्ताव का जवाब नहीं दिया है, क्योंकि भारत चाहता है, कि पहले पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमा के साथ तीन साल से चल रहे सैन्य गतिरोध को पूरी तरह से हल हो।
चीन का तावा- कम हुआ है तनाव
माना जा रहा है, कि इस मुद्दे पर चर्चा उस वक्त हो सकती है, जब भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के मौके पर चीनी सरकार में अपने समकक्ष ली शांगफू के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
रिपोर्ट में भारतीय आधिकारिक सूत्रों का हवाला देकर कहा गया है, कि बीजिंग दावा करता रहा है, कि भारत के साथ चीन की एलएसी के पश्चिमी क्षेत्र की स्थिति पहले ही सामान्य हो चुकी है। इसने राजनयिक चैनलों के माध्यम से नई दिल्ली को यह भी बताया, कि एलएसी के मध्य और पूर्वी क्षेत्र में गश्त पर रोक के साथ समान बफर जोन के निर्माण से सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित अन्य जगहों पर दोनों देशों के बीच विवादित सीमा के पूरे खंड पर, फ्लैशप्वाइंट से बचा जा सकता है।
चीन का निर्माण कार्य अभी भी है जारी
चीन भले ही दावा कर रहा हो, कि दोनों देशों के बीच का तनाव कम हुआ है और पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में दोनों देशों के सैनिकों के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन लेकिन चीन, न केवल पश्चिमी क्षेत्रों में, बल्कि भारत के साथ अपनी विवादित सीमा के सटे क्षेत्रों में सैन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण भी लगातार जारी रखे हुए है। ये निर्माण कार्य एलएसी से सटे मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में भी चल रहा है।
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भारतीय सेना के जवानों ने 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश में तवांग के पास यांग्त्से में चीनी पीएलए द्वारा एलएसी की यथास्थिति को बदलने के प्रयास को नाकाम कर दिया था। चीन ने बाद में भारत के पूर्वोत्तर राज्य पर अपना दावा जताने के लिए अरुणाचल प्रदेश में 11 स्थानों का नाम बदलकर मंदारिन और तिब्बती भाषाओं में रख दिया, जैसा कि उसने 2017 और 2021 में किया था, लिहाजा चीन पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।
मई 2020 और जनवरी 2021 में उत्तरी सिक्किम के नाकु ला में भी दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हो चुकी है।












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