चीन ने अपने हजारों नागरिकों से मुंह फेरा, यूक्रेन में उनका हाल क्या है ? जानिए
कीव, 7 मार्च: भारत जल्द ही यह घोषणा करने की स्थिति में आने वाला है कि उसने यूक्रेन में फंसे अपने सभी नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। हालांकि, एक भारतीय नागरिक की जरूर वहां दर्दनाक मौत हो गई थी। लेकिन, आप हैरान होंगे कि चीन शुरू से अपने नागरिकों से मुंह फेरे रहा है। जबकि, भारतीयों की तुलना में यूक्रेन में मुश्किल से एक-चौथाई चीनी नागरिक भी नहीं थे। लेकिन, वह हाल ही में अपने नागरिकों को निकालने की मुहिम शुरू कर पाया है, लेकिन हजारों की तादाद में अभी भी चाइनीज वहां फंसे हुए हैं, जिन्हें शी जिनपिंग सरकार की ओर से कोई पूछने वाला नहीं है। कह दिया गया है कि जो करना है खुद ही अपने स्तर पर करें।

चीन ने अपने नागरिकों को उनके हाल में छोड़ा
एएफपी ने चीन की सरकारी मीडिया के हवाले से बताया है कि यूक्रेन में फंसे चीनी नागरिकों का पहला जत्था पिछले शनिवार को ही बड़ी मुश्किल से बीजिंग लौट पाया है। अभी भी हजारों चाइनीज यूक्रेन के युद्धग्रस्त शहरों में संकट की स्थिति में फंसे हुए हैं। इन्हीं में से 25 साल की उम्र के काओ भी हैं, जो पूर्वी यूरोप में छुट्टियां मनाने के लिए आए हुए थे। लेकिन, आज-दिन रात रूस की ओर से हो रही गोलाबारी से जान बचाने के लाले पड़े हुए हैं। वे रूसी हमले में तबाह हुए चेर्निहिव शहर के बाहर किसी स्थानीय परिवार के बीच पनाह लिए हुए हैं। उन्होंने कहा है, 'एंबेसी ने हमें उन मुश्किलों को हल करने का तरीका खोजने के लिए कहा, जिनका हम खुद सामना कर रहे हैं।' उन्होंने चाइनीज मैसेजिंग ऐप वीचैट के जरिए बताया है,'उन्होंने कहा है कि लड़ाई हर जगह हो रही है, वे कुछ भी करने की स्थिति में नहीं हैं.....क्या यह एक देश की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए।'

चीन ने शुरू से अपने नागरिकों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया
जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तब करीब 6,000 चीनी नागरिक यूक्रेन में थे। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट तो यह भी है कि चाइनीज राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कहने पर ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बीजिंग विंटर ओलंपिक खत्म होने तक हमले का इंतजार किया। लेकिन, चीन ने फिर भी वहां से अपने नागरिकों को निकालने की कोशिशों की घोषणा नहीं की और ना ही उनके लिए एडवाइजरी ही जारी की गई। जबकि, भारत समेत पश्चिमी देश कई हफ्ते पहले से अपने नागरिकों को सलाह दे रहे थे कि वह यूक्रेन छोड़कर स्वदेश लौट आएं। चीन के विदेश मंत्रालय ने बीते गुरुवार को आकर वहां फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है और कहा है कि उसने 3,000 से ज्यादा को निकलने में सहायता पहुंचाई है।

मैं निकलना चाहता हूं, लेकिन मारे जाने का डर है- चीनी नागरिक
तथ्य ये है कि काओ की तरह आज भी हजारों चीनी नागरिक यूक्रेन में जहां-तहां पल-पल पर मौत का सामना कर रहे हैं। शायद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सरकार का खौफ है कि काओ ने सिर्फ अपना उपनाम ही बताया है। उनके मुताबिक, 'हम निकलना चाहते हैं, लेकिन कोई कार नहीं है। मुझे भय है कि अगर मैं कई सौ किलोमीटर चलकर निकलने की कोशिश करता हूं तो मैं मारा जाऊंगा।' कई चाइनीज यूक्रेन से बाहर निकलने के लिए या तो किसी तरह ट्रेन पकड़ने की कोशिश करते हैं या फिर अपनी जान पर खेलकर पश्चिमी बॉर्डर पार करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि कोई फ्लाइट पकड़ सकें। सरकारी मीडिया के मुताबिक एक चाइनीज नागरिक मंगलवार को यूक्रेन से भाग रहा था कि उसे गोली लग गई और वह जख्मी हो गया।

यूक्रेन में कुछ चीनियों को निशाना भी बनाया गया है
काओ थोड़े खुशनसीब हैं कि स्थानीय लोगों ने उनके साथ अच्छा सलूक किया है। उन्हें खाना दे रहे हैं और ठहरने भी दिया है। लेकिन, 'मुझे नहीं पता कि मैं कब तक किसी अनजान के घर में फ्री में रह सकता हूं। मैं कैसे बच सकूंगा?' कई चीनी नागरिकों ने तो दावा किया है कि रूस के प्रति चीन के रवैए को लेकर यूक्रेन के लोगों ने उनके साथ बुरा बर्ताव किया और यहां तक कि उनपर हमला भी किया है। ऐसे में चाइनीज सोशल मीडिया पर रूस के समर्थन में दिए गए संदेश इनकी स्थिति को और भी कमजोर कर रहा है। कीव में फंसे लिन उपनाम वाले एक शख्स ने रविवार को वीबो पर एक वीडियो डाला है, जिसमें वह कह रहा है, 'बुलेट स्क्रीन से बाहर निकलकर आपको हिट नहीं करेगा, लेकिन कुछ अनुचित टिप्पणियां यहां पर फंसे हमारे जैसे चीनियों को बेवजह की मुश्किलों में जरूर डाल सकता है।' बाद में उन्होंने फोन पर एएफपी को बताया कि पिछले हफ्ते ग्रोसरी खरीदने के दौरान हथियारबंद नागरिकों ने उन्हें गोली मार दी थी, लेकिन, इसे छिटपुट घटना मानकर नजरअंदाज कर दिया गया।

एक चाइनीज स्टूडेंट को पोस्ट डिलीट करना पड़ा
हालांकि, निजी काम के सिलसिले में यूक्रेन आए 28 साल के एक स्टैंड-अप कॉमेडियन ने कहा, 'हम पर मनोवैज्ञानिक दबाव बहुत ज्यादा है, लेकिन एंबेसी सक्रिय रूप से निकासी योजनाओं का समन्वय कर रहा है जिससे हमें भरोसा है।' लेकिन, कीव में फंसी एक स्टूडेंट के साथ एंबेसी का व्यवहार बहुत ही अजीब रहा है। उसे सलाह दी गई है कि जो करना है खुद से करो। हालांकि, जब उसके पोस्ट को लेकर हमला किया जाने लगा तो उसने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया। चीन के हुक्कमरानों की असलियत की पोल तो काओ ने खोलने की हिम्मत दिखाई है। उन्होंने कहा है, 'मैं विश्वास नहीं कर सकता कि एक देश ... जो कुछ करेगा तो नहीं, लेकिन, बेशर्मी से यह भी कहेगा कि वह अपने नागरिक को कभी नहीं छोड़ेगा और जबकि, नागरिकों को पूरी तरह उनके हाल पर छोड़ दिया है।'












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