राजनाथ सिंह की जापान, मंगोलिया दौरे पर 'ड्रैगन' की पैनी नजर, जानें क्यों डर रहा है चीन!
मंगोलिया और जापान दौरे पर जा रहे रक्षा मंत्रा राजनाथ सिंह के हर कदम पर ड्रैगन की नजर बनी रहेगी।
नई दिल्ली/बीजिंग, 26 अगस्त : भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) अगले महीने मंगोलिया और जापान की यात्रा करेंगे। खबर है कि, चीन इसकी पल-पल की अपडेट लेता रहेगा। चीन कभी नहीं चाहता है कि, भारत की किसी भी पड़ोसी या अन्य देशों से अच्छे रिश्ते बने। खासकर वह भारत-जापान के बीच बढ़ती दोस्ती का तो बिल्कुल भी हिमायती नहीं है। आने वाले 8 सितंबर को टू प्लस टू की दूसरे राउंड की वार्ता होने वाली है। इस बैठक में भारत और जापान के विदेश व रक्षा मंत्री शामिल होंगे। इससे पहले राजनाथ मंगोलिया के दो दिवसीय दौरे पर जाने वाले हैं।

क्यों डर रहा है चीन?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मंगोलिया और जापान की यात्रा पर चीन अपनी गिद्ध की नजर गड़ाए हुए है। 6 सितंबर को उलानबटार में होने वाली बैठक में राजनाथ सिंह की मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख से मुलाकात होगी। इस दौरान मंगोलियान राष्ट्रपति राजनाथ सिंह के सम्मान में भाज का भी आयोजन कर रहे हैं। भारत के इस यात्रा से चीन अंदर ही अंदर बौखलाया है। हालांकि, वह कुछ कर नहीं पाएगा, लेकिन वह मंगोलिया और जापान के साथ भारत के बीच क्या खिचड़ी पक रही है, इसकी सुगंध वह लेता रहेगा।

भारत के दौरे पर चीन की नजर
खबर के मुताबिक, मंगोलिया में बैठक के दौरान भारत के सौजन्य से बन रही मंगोलिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर चर्चा होने की संभावना है, जिसे 1.2 बिलियन डॉलर की लागत से तैयार किया जा रहा है। बता दें कि, रिफाइनरी मंगोलिया के डोर्नोगोबी प्रांत में स्थित है और 2025 में काम पूरा होने के बाद देश की 75 फीसदी आवश्यकताओं को यह पूरा करेगा। वहीं, रक्षा मंत्रा राजनाथ सिंह 7 सितंबर को टोक्यो के लिए उड़ान भरने से पहले उसी दिन मंगोलियाई रक्षा मंत्री गुरसेद सैखानबयार और संसद के अध्यक्ष गोम्बोजव झंडनशतर से मुलाकात करेंगे।

राजनाथ सिंह का कार्यक्रम
यह तेल रिफाइनरी मंगोलिया की 75 फीसदी आवश्यकताओं को पूरा करेगी। देश अपने सबसे बड़े पड़ोसी और पारंपरिक सहयोगी रूस से जीवाश्म ईंधन प्राप्त करता है। मंगोलिया की खनिज संपदा के परिवहन में मदद के लिए भारत अपने रेलवे और बिजली के बुनियादी ढांचे के निर्माण में भी मंगोलिया की सहायता कर रहा है। वहीं, राजनाथ सिंह 6 सितंबर को एक साइबर सुरक्षा केंद्र का भी उद्घाटन करेंगे, जिसे भारत ने मंगोलियाई रक्षा मंत्रालय के लिए स्थापित करने में मदद की है।

पीएम के दौरे के क्रम में कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे
पीएम के दौरे के क्रम में कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे
बता दें कि,जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन की यात्रा के बाद 2015 में मंगोलिया देश का दौरा किया था तब साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर मंगोलियाई सरकार के साथ हस्ताक्षर किए गए थे। 2015 समझौता ज्ञापन के मुताबिक, भारतीय रक्षा मंत्रालय, मंगोलिया सरकार के लिए एक साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करेगा और साइबर सुरक्षा में कर्मियों के प्रशिक्षण का भी कार्य करेगा। बता दें कि, पीएम मोदी की यात्रा के दौरान ही भारत-मंगोलिया द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी को एक ऊंचाई तक पहुंचाया गया।

राजनाथ के दौरे को लेकर चीन सतर्क
वहीं दूसरी तरफ, भारतीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के जापान दौरे से पहले चीन की सरकारी मीडिया ने भी बयान जारी कर दिया है। बयान में कहा गया है कि उच्च स्तरीय बैठक की आड़ में इन दोनों देशों को किसी तीसरे देश को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। एक चीनी ऑब्जर्वर ने सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स से कहा कि बीते कुछ साल में भारत और जापान के बीच नजदीकी बढ़ी है। खासतौर पर पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के कार्यकाल में यह ज्यादा देखने को मिला था। इसके पीछे क्षेत्र में चीन के शांतिपूर्ण विकास को रोकने का मकसद हो सकता है। वहीं सिंघुआ यूनिवर्सिटी (Tsinghua University) में राष्ट्रीय रणनीति संस्थान के शोध विभाग के निदेशक क्वेन फेंग ने कहा कि सीमा पर दोनों देशों के बीच तनाव के बाद भारत में कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोग चीन को सुरक्षा के लिए चुनौती मानते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ही भारतीय अमेरिका और जापान के साथ दोस्ती को बढ़ावा देते हैं। इसके पीछे उनका मकसद चीन पर नियंत्रण रखना होता है। चीन को इससे सतर्क रहना चाहिए।












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