चीन ने मंगल ग्रह पर कामयाबी के साथ उतारा रोवर, अंतरिक्ष में अमेरिका के वर्चस्व को तोड़ने का किया दावा

चीन का सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने आज एक ट्वीट के जरिए दावा किया है कि चीन के समयानुसार शनिवार सुबह 10 बजकर 40 मिनट पर चीन का रोवर कामयाबी के साथ मंगल ग्रह की सतह पर उतर गया है।

बीजिंग, मई 22: चीन ने मंगल ग्रह पर रोवर उतारकर अमेरिका के एकाधिकार को खत्म करने का बड़ा दावा किया है। चीन ने कहा है कि मंगल ग्रह पर उसने कामयाबी के साथ ना सिर्फ रोवर को उतार दिया है, बल्कि उसका रोवर अब काम भी करने लगा है और इसके साथ ही उसने स्पेस में अमेरिका के एकाधिकार को खत्म कर दिया है। चीन की सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपनी ट्वीट में कहा है कि अमेरिका के बाद विश्व में चीन एकमात्र ऐसा देश है, जिसमें मंगल ग्रह पर रोवर उतारने में कामयाबी हासिल की है और अब तय हो गया है कि अमेरिका का अंतरिक्ष में वर्चस्व खत्म हो गया है।

मंगल ग्रह पर कामयाबी का दावा

मंगल ग्रह पर कामयाबी का दावा

चीन का सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने आज एक ट्वीट के जरिए दावा किया है कि चीन के समयानुसार शनिवार सुबह 10 बजकर 40 मिनट पर चीन का रोवर कामयाबी के साथ मंगल ग्रह की सतह पर उतर गया है। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन के अंतरिक्ष अभियान के लैंडर से जूरॉन्ग रोवर निकला है और इसके साथ ही चीन का रोविंग मिशन भी शुरू हो चुका है।

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    पहली बार में मिली सफलता

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    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक चीन ने पहली बार में अपना रोवर मंगल ग्रह पर उतारने में कामयाबी हासिल की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन विश्व का पहला ऐसा देश बन गया है, जो पहली ही बार में लाल ग्रह यानि मंगल ग्रह की कक्षा में जाने के साथ साथ अपने अंतरिक्ष यान को मंगल ग्रह की सतह पर उतारने में ना सिर्फ कामयाब रहा है, बल्कि रोवर ने वहां काम करना भी शुरू कर दिया है। आपको बता दें कि चीन ने जूरॉन्ग रोवर का नाम पौराणिक कथा से लिया है, और इसका मतलब होता है आग के देवता। जूरॉन्ग रोवर एक तरह का रोबोट है, जो अब मंगल ग्रह की सतह पर खोज करेगा।

    रूस की कोशिश नाकामयाब

    अमेरिका के बाद चीन विश्व का दूसरा ऐसा देश बन गया है, जिसने अपना रोवर मंगल ग्रह के सतह पर उतारने में कामयाबी हासिल की है। अमेरिका ने भी अपना अंतरिक्ष यान मंगलग्रह पर उतारा था। इतना ही नहीं, अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने इसी महीने अपना हेलीकॉप्टर भी मंगलग्रह पर धरती से ही कंट्रोल करके उड़ाया था। आपको बता दें कि 1971 में सोवियत यूनियन रूस ने भी अपना अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह पर उतारा था लेकिन मंगल ग्रह की सतह पर उतरने के साथ ही रूस का अपने यान से संपर्क टूट गया था।

    क्या है चीन का मंगल ग्रह अभियान

    क्या है चीन का मंगल ग्रह अभियान

    मंगल ग्रह पर पहुंचने वाली चीन के इस रोवर जूरॉन्ग का वजन करीब 240 किलोग्राम है और उसमें 6 पहिए और चार सौर पैनल लगे हैं, ताकि वो सूर्य से ऊर्जा लेता रहे। चीन का ये रोवर प्रति घंटे 200 मीटर तक घूम सकता है और इसमें 6 वैज्ञानिक उपकरण लगे हुए हैं। चीन के जूरॉन्ग रोवर में हाई डेफिनेशन मल्टी एंगल कैमरा, रडार और मौसम की जांच करने वाला मशीन भी लगा हुआ है। चीन का यह रोवर मंगल ग्रह पर करीब 3 महीने तक काम करेगा। चीन ने पिछले साल 23 जुलाई को तियानवेन-1 रॉकेट के जरिए एक ऑर्बिटर, एक रोवर, एक लैंडर मंगल ग्रह के लिए भेजा था।

    चीन का स्पेस मिशन

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