चीन, जापान और दक्षिण कोरिया.. अमेरिका के दो दोस्तों का ड्रैगन के साथ ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन, जानें 5 बड़ी बातें
China Japan South Korea Summit: अमेरिका के दो दोस्तों जापान और दक्षिण कोरिया ने पांच सालों के अंतराल के बाद चीन के साथ ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन किया है और इस शिखर सम्मेलन पर दुनयाभर की निगाहें टिकी हुई थी।
चीने के प्रधान मंत्री ली कियांग, जापान के प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा और मेजबान दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यूं सुक-योल ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सियोल में एक त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का आयोजन किया था।

तीन नेताओं की बैठक, करीब पांच सालों के अंतराल के बाद ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया में दो युद्ध तो चल ही रहे हैं, साथ ही साथ कई क्षेत्रों में अशांति और तनावपूर्ण हालात हैं, जहां कभी भी युद्ध शुरू हो सकते हैं। इस वक्त पूरी दुनिया 21वीं सदी के मुकाबले कहीं ज्यादा विभाजित दिख रही है। पिछला त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन, जो एक वार्षिक कार्यक्रम होना था, दिसंबर 2019 में चीन के चेंगदू शहर में आयोजित किया गया था, जिसके बाद इसे कोविड -19 के प्रकोप के कारण रोक दिया गया था।
त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन की बड़ी बातें
1- अस्थिर वैश्विक व्यवस्था
अमेरिकी सहयोगियों दक्षिण कोरिया और जापान के साथ उच्चतम स्तर पर बातचीत बढ़ाने के पीछे चीन का नजरिया संबंधों में सुधार और क्षेत्रीय संकट से निपटने के इरादे का संकेत हो सकता है। चीन इस वक्त आर्थिक संकट से जूझ रहा है और वो किसी नये संघर्ष में फिलहाल फंसना नहीं चाहता है।
2- ट्रेड और सप्लाई चेन
कोविड-19 महामारी ने व्यापार मार्गों की आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह से प्रभावित किया था, लेकिन महामारी के बाद, रूस और यूक्रेन युद्ध, इजराइल-हमास संघर्ष और लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमले ने सप्लाई चेन और ट्रेड रूट को खतरे में डाल दिया है, जो दुनिया भर में व्यापार को प्रभावित कर रहा है।
3- दक्षिण चीन सागर विवाद
जापान के प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा ने बैठक से इतर संवाददाताओं से कहा, कि दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता को शिखर सम्मेलन में चीनी प्रधानमंत्री के सामने उठाया गया था। आपको बता दें, दक्षिण चीन सागर के पूरे हिस्से पर चीन अपना दावा जताता है, जबकि दक्षिण चीन सागर के तटीय देश ब्रूनेई, फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देश भी दक्षिण चीन सागर के अलग अलग हिस्सों पर अपना दावा करते हैं, लेकिन चीन उनके दावों को नकारता है।
4- उत्तर कोरिया फैक्टर
जापान के प्रधानमंत्री और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने अलग-अलग मुलाकातों में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं हैं। चीन, उत्तर कोरिया का सहयोगी रहा है जबकि जापान और दक्षिण कोरिया, अमेरिका के सहयोगी होने का दावा करते हैं। जापान और दक्षिण कोरिया चीन से आग्रह कर रहे हैं, कि वह उत्तर कोरिया को अपने परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए मनाए। हालांकि बीजिंग ने अपने सहयोगी प्योंगयांग पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध पूरी तरह से नहीं लगाए हैं।
5. आर्थिक एवं अन्य सहयोग
चीन, दक्षिण कोरिया और जापान... ये तीनों देश मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के सेंटर माने जाते हैं और कारोबार को बढ़ाने को लेकर इस बैठक में काफी अहम बातें की गई हैं। माना जा रहा है, कि तीनों देशों के बीच के कारोबार को ये बैठक पंख लगा सकता है। चीन ने जापान और दक्षिण कोरिया से अपनी औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता की रक्षा करने और व्यापार को राजनीतिक मुद्दों से अलग रखने के लिए कहा है।
शिखर सम्मेलन को लेकर क्या कह रहे चीनी विशेषज्ञ?
चीनी प्रधान मंत्री ली कियांग ने दक्षिण कोरिया के सियोल में आयोजित जापान और दक्षिण कोरिया के नेताओं के साथ त्रिपक्षीय बैठक में कहा, कि तीनों देशों को सहयोग की मूल आकांक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए और चीन के आर्थिक रफ्तार को फिर से शुरू करने और गति देने के लिए संयुक्त प्रयास करना चाहिए।
ग्लोबल टाइम्स ने चीनी विश्लेषकों के हवाले से कहा है, कि पूर्वी एशिया की तीन प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अर्थव्यवस्था, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों से त्रिपक्षीय सहयोग को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रही हैं, जहां तीनों देश व्यापक समान हितों और समानताओं को साझा करते हैं, जबकि संप्रभुता के मुद्दे समेत कई और अन्य मतभेद को अलग रखे जा सकते हैं।
बैठक में, चीनी प्रधान मंत्री ने तीनों देशों से "आर्थिक और व्यापार कनेक्टिविटी को गहरा करने, औद्योगिक श्रृंखला और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता और सुचारूता बनाए रखने और चीन-जापान-दक्षिण कोरिया मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता को जितनी जल्दी हो सके, उसे फिर से शुरू करने और पूरा करने का आह्वान किया है।"
तीनों नेता तीन-तरफा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत फिर से शुरू करने पर सहमत हुए हैं, जिसे 2012 में शुरू होने के बाद 16 दौर की आधिकारिक वार्ता के बाद नवंबर 2019 में निलंबित कर दिया गया था। नेताओं ने क्षेत्रीय व्यापक के "पारदर्शी, सुचारू और प्रभावी" कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता जताई। दक्षिण कोरिया की योनहाप ने सोमवार को बताया है, कि यह 15 एशिया-प्रशांत देशों के बीच एक एफटीए है, जिसमें तीन देश शामिल हैं।












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