चीन और नेपाल के बीच पहली बार शुरू हुई रेल सेवा, भारत को घेरने में सफल होगा ड्रैगन?
पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा ने चीन के रेल परियोजना के लिए व्यवसायिक लोन के ऑफर को खारिज कर दिया था। उन्हें डर था कि नेपाल भी श्रीलंका की तरह से कर्ज के जाल में फंस सकता है।

Image: twitter/@PDChina
चीन आखिरकार भूवैज्ञानिक, भूराजनीतिक और तकनीकी समस्याओं को पार कर नेपाल तक रेल चलाने में लगभग कामयाब हो गया है। पहली बार चीन से नेपाल के लिए रेलगाड़ी रवाना हुई है। चीनी विदेश मंत्रालय के अधिकारी जी रोंग ने बताया कि चीन के गांसु प्रांत के लांझु शहर से दक्षिण एशिया के लिए माल गाड़ी आज रवाना हुई। यह ट्रेन काठमांडू शहर 9 से 10 दिनों में पहुंचेगी। जी रोंग का कहना है कि समुद्री रास्ते से नेपाल सामान पहुंचाने में लगने वाले समय में 15 दिनों की बचत होगी।
आपको बता दें कि लांझु से काठमांडू के बीच लगभग 3200 किलोमीटर की दूरी है। यह चीन-नेपाल की संयुक्त परिवहन सेवा है। इस परियोजना पर 2016 से काम चल रहा है। इसका उद्देश्य चीन-दक्षिण एशिया व्यापार को मजबूत करना है। आपको बता दें कि यह रेलमार्ग भी चीन के बेल्ट एंड रोड प्रॉजेक्ट का हिस्सा है।
नेपाल लैंडलॉक्ड देश है यानि कि यह चारों तरफ से जमीन से घिरा हुआ है। तीन तरफ से भारत और एक तरफ से यह चीन से घिरा है। लेकिन उत्तर में हिमालय के कारण चीन संग नेपाल को व्यापार करने में दिक्कतें आती हैं ऐसे में अभी तक केवल भारत का नेपाल के साथ व्यापार पर दबदबा है। हाल में ही नेपाल में वामपंथी विचारधारा वाली पार्टी के सत्ता में आने के बाद से देश में एक बार फिर से चीन का प्रभाव बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।
नेपाल में नई सरकार के बनने के बाद चीन ने ऐलान किया कि वह बेल्ट एंड रोड परियोजना को आगे बढ़ाएगा। इससे पहले पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा ने चीन के रेल परियोजना के लिए व्यवसायिक लोन के ऑफर को खारिज कर दिया था। उन्हें डर था कि नेपाल भी श्रीलंका की तरह से कर्ज के जाल में फंस सकता है। नेपाल साल 2017 में सबसे पहले प्रचंड के पीएम रहने के दौरान ही बीआरआई में शामिल हुआ था।












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