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China के लेटेस्ट हथियारों से India को कितना खतरा? एक मिसाइल से मलबे में बदल सकता है America

China ने हाल ही में अपने सैन्य परेड में कई अत्याधुनिक और घातक हथियारों की झांकी निकाली, जिनमें नई पीढ़ी की मिसाइलें, समुद्री ड्रोन, और रोबोटिक वॉर सिस्टम जैसे आधुनिक हथियार देखने को मिले। इस प्रदर्शन ने वैश्विक रक्षा क्षमताओं में बढ़ते चीनी दबदबे की एक झलक दिखाई। इसे देखने के लिए आधा दर्जन राष्ट्रों के प्रमुख और 50 हजार लोग मौजूद रहे। कहा जा रहा है कि चीन के पास इतने हथियार हैं कि दुनिया खत्म करने के लिए काफी हैं। क्या-क्या दिखा इस प्रदर्शन में आपको बताते हैं।

लेजर हथियार और एंटी-ड्रोन तकनीक

चीन ने वॉरशिप बेस्ड एनर्जी सेंटर्ड लेजर हथियारों के दो अलग-अलग वर्जन का भी प्रदर्शन किया। पहला, नेवल एयर डिफेंस सिस्टम है, और दूसरा ट्रक-माउंटेड, जो आर्मी की सुरक्षा के लिए मुफीद हो सकता है। चीन लंबे समय से एनर्जी बेस्ड हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहा है, जो पहले से इस्तेमाल में लाई जा रही मिसाइलों और ड्रोन हमलों से निपटने में कारगर होंगे और सस्ते भी होंगे। परेड में कंधे पर रखकर मिसाइल लॉन्च करने वाली गन, हाई टेम्परेचर लेजर वेपन और हाई-कैपेसिटी माइक्रवेव जैसी एंटी-ड्रोन तकनीक भी दिखाई।

China

G-11 फाइटर जेट जिसने खींचा सबका ध्यान

चीन ने अपनी एयर फोर्स की शक्ति का प्रदर्शन करते हुए कई फाइटर जेट स्क्वाड्रन दिखाए, जिनमें J-20, J-20A, J-20S और J-35A शामिल थे। J-35 भी पहली बार परेड में उड़ान भरता देखा गया। J-20S को दुनिया का पहला दो सीटों वाला स्टील्थ विमान कहा जाता है, जबकि J-35 नेवी का पहला रडार-बचाव सक्षम फाइटर जेट है। चीन ने अपने ड्रोन बेड़े का भी प्रदर्शन किया, जिसमें GJ-11 ने लोगों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा।

यह एक फाइटर जेट जैसा मानव रहित विमान है जो निगरानी और सटीक निशानेबाजी के लिए जाना जाता है, और इसे हथियार रखने के लिए एक इंटरनल टर्मिनल भी दिया गया है। चीनी मीडिया ने इसे 'लॉयल विंगमैन' कहा है, जिसका अर्थ है कि इसे युद्ध में इंसानों द्वारा चलाए जाने वाले फाइटर जेट के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।

रोबोटिक भेड़िए से निगरानी कराएगा चीन

अमेरिका और भारत जहां रोबोटिक कुत्तों पर काम कर रहे हैं, वहीं चीन ने चार पैरों वाले रोबोटिक भेड़िए दुनिया के सामने पहली बार पेश किए। चीनी मीडिया का दावा है कि ये मशीनें बॉर्डर और संघर्ष वाले इलाकों में निगरानी कर सकती हैं, लक्ष्यों पर निशाना साध सकती हैं, और जरूरत पड़ने पर सैनिकों को रसद पहुंचा सकती हैं। युद्ध में घायल सैनिकों की सहायता के लिए इन रोबोट भेड़ियों को मजबूत बनाने की बात भी कही गई है।

सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें

चीन की सेना ने अपनी नई YZ-15 हाइपरसोनिक मिसाइलों का प्रदर्शन किया, जो आवाज की रफ्तार से पांच गुना तेज उड़ान भर सकती हैं। इसके साथ ही, YZ-17, YZ-19 और YZ-20 जैसे पुराने सुपरसोनिक मॉडल भी परेड में शामिल थे। 'यिंग जी' या 'बाज का हमला' के नाम से जानी जाने वाली ये मिसाइलें किसी भी जहाज या विमान से दागी जा सकती हैं और बड़े जहाजों को बर्बाद करने की क्षमता रखती हैं।

दुनिया को दिखाया 'कैरियर किलर'

चीन लगातार अपनी हाइपरसोनिक तकनीक में सुधार कर रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भर के रडार सिस्टम खुद को उन्नत कर रहे हैं। पुराने डिफेंस सिस्टम अभी भी सुपरसोनिक सिस्टम के सामने कमजोर मानी जाती हैं, और चीन इस क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ाना चाहता है।

YZ-21 एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल, जिसे "कैरियर किलर" भी कहा जाता है, उसका भी प्रदर्शन इस परेड में किया गया। ब्लूमबर्ग के अनुसार, इसे विमान से दागा जा सकता है और इसकी रेंज लगभग 600 किलोमीटर है। इसके अतिरिक्त, वाहनों पर ले जाई जा सकने वाली सीजे-1000 सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और शिप-लॉन्च YZ-18C क्रूज मिसाइल भी दिखाई गईं।

समुद्री में चलने वाला ड्रोन

चीन ने दो नए मानव रहित समुद्री ड्रोन, AJX को पहली बार दुनिया के सामने दिखाया। लगभग 60 फीट लंबा और टारपीडो के आकार का यह ड्रोन पंप जेट प्रोपल्शन सिस्टम पर काम करता है, जिससे यह रडार की पकड़ में नहीं आता। चीन पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री ड्रोन कार्यक्रम चला रहा है, जिसमें पांच तरह के पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन शामिल हैं। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये ड्रोन छोटी पनडुब्बियों की तरह हैं, जिन्हें बिना मानवीय हस्तक्षेप के चलाया जा सकता है और इनका इस्तेमाल दुश्मन के वॉरशिप को तबाह करने के लिए किया जा सकता है।

न्यूक्लियर इंटरकॉन्टीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM)

परेड में न्यूक्लिय इंटरकॉन्टीनेंटल बैलिस्टिक का भी प्रदर्शन किया गया। पहली बार डॉन्ग फेंग-61, डॉन्ग फेंग-31BJ और डॉन्ग फेंग 5C जैसी मिसाइलें भी दिखाईं। चीन की पहली हवा से लॉन्च होने वाली न्यूक्लियर मिसाइल JL-1 भी दिखाई गई। सीसीटीवी के अनुसार, JL-1 और JL-3 के साथ DF-61 और DF-31 चीनी आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के इस्तेमाल में लाई जाने वाली मिसाइलों को खुलकर दिखाया गया।

क्या है डॉन्ग फेंग-17 मिसाइल?

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, डॉन्ग फेंग 5C (DF-5C) की मारक क्षमता 20,000 किलोमीटर से अधिक है, जिससे यह दुनिया के किसी भी देश को निशाना बना सकती है और दुश्मन की रक्षा सिस्टम को सटीकता से भेद सकती है। एक्सपर्ट बताते हैं कि एक DF-5C मिसाइल 12 न्यूक्लियर वारहेड ले जा सकती है। इसके अलावा, डॉन्ग फेंग-17 और डॉन्ग फेंग-26D हाइपरसोनिक मिसाइलें भी प्रदर्शित की गईं, जो सभी मौसमों में वार करने में सक्षम हैं। चीन ने JL-3 मिसाइल की झलक भी्ेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेे दिखाई, जो थर्ड जनरेशन की इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है जिसे पनडुब्बी से लॉन्च किया जा सकता है।

मिसाइल से टकराएगी मिसाइल

चीन ने अपनी अंतरिक्ष रक्षा प्रणाली HQ-29 का भी अनावरण किया, जो अंतरिक्ष से होने वाले हमलों से बचाव कर सकती है और विदेशी उपग्रहों को निशाना बना सकती है। हालांकि, HQ-29 की क्षमताओं का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन इसके बड़े आकार से अनुमान लगाया जा रहा है कि यह अमेरिकी नेवी के SM-3 ब्लॉक-II A डिफेंस सिस्टम के समान हो सकता है। यह मिसाइल जमीन या वॉरशिप से लॉन्च की जा सकती है और बड़े जहाजों के साथ-साथ बैलिस्टिक मिसाइलों को खत्म करने में सक्षम है।

चीन के इन लेटेस्ट हथियारों के बारे में आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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