OMG: पाकिस्तान ने चीन से लिया 21.8 अरब डॉलर का कर्ज, बिक जाएगा, फिर भी नहीं चुका पाएगा!
अमेरिका के एक विश्वविद्यालय विलियम एंड मैरी की एक शोध रिसर्च एडडाटा में पता चला है कि, साल 2018 के बाद से चीन ने अपने 900 अरब डॉलर के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में बदलाव किया है।
इस्लामाबाद, अगस्त 06: चीन ने पिछले पांच सालों में पाकिस्तान और श्रीलंका को लगभग 26 अरब डॉलर का लघु और मध्यम अवधि का कर्ज दिया है, जिसके बाद एक्सपर्ट्स सवाल उठा रहे हैं, कि क्या ये दोनों देश बिककर भी चीन का ये कर्ज चुका पाएंगे। रिपोर्ट में पता चला है कि, चीन का कर्ज इन दोनों देशों में इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से आपातकालीन राहत पैकेज की तरफ ट्रांसफर हो गया है। यानि, चीन ने इन दोनों देशों को इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से ज्यादा लोग इन दोनों देशों को आपातकालीन लोन दिया है।

बीआरआई से 'पर्सनल लोन'
अमेरिका के एक विश्वविद्यालय विलियम एंड मैरी की एक शोध रिसर्च एडडाटा में पता चला है कि, साल 2018 के बाद से चीन ने अपने 900 अरब डॉलर के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में बदलाव किया है और बीआरआई प्रोजेक्ट्स के लिए लोन देने की जगह विदेशी मुद्रा की कमी को कम करने के लिए लोन बांटे हैं। एडडाटा के कार्यकारी निदेशक ब्रैड पार्क्स ने कहा कि, "चीन ने "परियोजना के लिए कर्ज देने से दूरी बनाते हुए भुगतान ऋण संतुलन की ओर और आपातकालीन बचाव ऋण देने की दिशा में महत्वपूर्ण तरीके से ध्यान दिया है।" एडडाटा ने ये रिपोर्ट सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया है, जिसमें कहा गया है, कि साल 2018 के बाद से चीन ने सबसे ज्यादा कर्ज पाकिस्तान को दिया है।

पाकिस्तान को दिया सबसे ज्यादा लोन
सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक दस्तावेजों से पता चला है कि, सरकारी स्वामित्व वाले चीनी बैंकों ने जुलाई 2018 से पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक को अल्पकालिक ऋण के तौर पर 21.9 अरब डॉलर का ऋण दिया है, जबकि अक्टूबर 2018 से श्रीलंका को ज्यादातर मध्यम अवधि के ऋण के तौर पर चीन ने 3.8 अरब डॉलर का कर्ज दिया है। रिपोर्ट से पता चला है, कि चीन ने जिस तरह से कर्ज बांटा है, उससे पता चलता है, कि चीन अब खुद को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोषि की भूमिका निभा रहा है और जब कुछ छोटे देश फंस जाते हैं, तो फिर उनका भुगतान संतुलन बनाने के लिए वित्तपोषण प्रदान कर रहा है। हालांकि, चीन जो कर्ज देता है, वो आईएमएफ या विश्व बैंक की तरह किफायती दरों पर नहीं होता है, जिसकी तुलना आमतौर पर बीआरआई उधार से की जाती है।

चीन से क्यों कर्ज ले रहे हैं छोटे देश?
रिपोर्ट में कहा गया है कि, अमेरिकी बैंकों ने लगातार ब्याज दरों में इजाफा किया है और इस दौरान वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भी काफी ज्यादा इजाफा हुआ है, जिसकी वजह से विकासशील देशों से काफी तेजी से विदेशी मुद्रा बाहर निकला है, जिसमें विकासशील देशों के खजाना तेजी से खाली होता चला गया है और ऐसे देश चीन के सामने हाथ फैलाने के लिए मजबूर हो गये और चीन ने अपने बीरआई प्रोजेक्ट के जरिए उन देशों को लोन दे दिया। विश्व बैंक के शोधकर्ताओं के अनुसार, चीन ने लगभग 60% विदेशी कर्ज उन देशों को दिया है, जो अब ऋण संकट में हैं।

अफ्रीकी देश भी हैं टारगेट
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने पिछले साल अपने पड़ोसी लाओस के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए $300 मिलियन का आपातकालीन ऋण जारी किया था। कोविड महामारी के समय अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चिली ने साल 2020 में चीन के साथ एक मुद्रा विनिमय का विस्तार किया था, जबकि बैंक ऑफ चाइना लिमिटेड ने उसी वर्ष एक महामारी राहत कार्यक्रम के लिए अफ्रीकी निर्यात-आयात बैंक को 200 मिलियन डॉलर का ऋण दिया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन काफी स्मार्ट तरीके से काम कर रहा है और बीजिंग इस धारणा पर काम कर रहा है, कि जब बीआरई उधारकर्ता देश जब तरलता दबाव का सामना करने लगते हैं, तो बीजिंग उन देशों को लोन दकर उन्हें उस तूफान से बचाता हुआ दिखे। पार्क्स ने कहा कि, ऋण उधारकर्ता देशों को अपनी दो समस्याओं को हल करने के लिए चीन की मदद चाहिए होता है, नंबर एक, अपने पुराने प्रोजेक्ट का ऋण चुकाने के लिए और नंबर दो, विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने की कोशिश करने के लिए।"

पाकिस्तान को चीन ने कैसे दिया कर्ज?
पाकिस्तान ने चीन से उस समय विशालकाय कर्ज लेना शुरू किया, जब पाकिस्तान की आयात लागत और विदेशी मुद्रा भंडार के बीच काफी तेजी से वृद्धि होने लगी और उसकी वजह से पाकिस्तान को साल 2017 में अपने अंतर्राष्ट्रीय भुगतानों को संतुलित करने में समस्याओं का सामना करना पड़ा। संकट ने पाकिस्तान को आईएमएफ के साथ लंबी बातचीत को प्रेरित किया और आईएमएफ ने पाकिस्तान को लोन देने के लिए कई तरह की शर्तें पाकिस्तान के ऊपर रख दीं। आईएमएफ के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान के विदेशी कर्ज का लगभग 27% चीन का है, जो उसने बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के नाम पर लिया है और वो तमाम परियोजनाएं धूल फांक रही हैं, लेकिन हैरानी की बात ये है, कि जिन परियोजनाओं के लिए पाकिस्तान ने चीन से कर्ज लिए, उन परियोजनाओं पर काम ही नहीं शुरू हुआ है, लेकिन पाकिस्तान पैसे उठा चुका है।

श्रीलंका की स्थिति हो चुकी है बदतर
विदेशी ऋण चुकाने में श्रीलंका की समस्याएं महामारी के परिणामस्वरूप और भी बदतर हो गईं हैं। जब श्रीलंका का पर्यटन सेक्टर कोविड महामारी की वजह से क्रैश कर गया, तो श्रीलंका के लिए विदेशी मुद्रा का एक बड़ा स्रोत बंद हो गया, लिहाजा श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खाली होता चला गया और जैसे ही तेल की कीमतों में इजाफा होना शुरू हुआ, श्रीलंका की अर्थव्यवस्था ढह गई। श्रीलंका अब आईएमएफ से कर्ज मांग रहा है और श्रीलंका ने चीन के सामने भी हाथ फैलाया है। श्रीलंका ने आईएमएफ के सामने सरकारी खर्च में कटौती करने की शर्त भी कबूल कर ली है। वहीं, श्रीलंका का कहना है कि, उसके कर्ज का 10 प्रतिशत हिस्सा चीन का है।

चीनी कर्ज में ब्याज दर का गेम
पार्क्स के अनुसार, चीन के आपातकालीन ऋण में निश्चित ब्याज दरों के बजाय परिवर्तनीय ब्याज दरें होती हैं, जैसा कि बुनियादी ढांचे के उधार के साथ भी ये शर्त था। यानि, चीन अपने हिसाब से ब्याज दरों में परिवर्तन करने के लिए स्वतंत्र होता है और जैसे ही कोई देश चीन के खिलाफ जाने की कोशिश करता है, वो ब्याज दर बढ़ा देता है। वहीं, आईएमएफ का लोन 10 से 20 सालों के लिए होता है और ब्याज दरें काफी कम होती हैं, लेकिन चीन ये कर्ज 3 से 5 सालों के लिए उच्च ब्याज दरों पर बांटता है। एडडाटा के अनुसार, पाकिस्तान को चीन ने आपातकालीन ऋण सिर्फ एक से 3 सालों की अवधि के लिए ही दिया है। जिसे चुकाने में पाकिस्तान नाकाम हो रहा है। वहीं, चीन को कर्ज देता है, उसके ब्याद दर पर 3 प्रतिशक का अलग से मार्जिन रखता है। वहीं, चीन ने श्रीलंका को जो कर्ज दिया है, वो 10 सालों के लिए दिया है और 3 सालों का ग्रेस पीरियड भी दिया है और उसपर ब्याज दर में LIBOR के बेंचमार्क से 2.5 प्रतिशत का अतिरिक्त मार्जिन रखा है। एडडाटा के अनुसार, पाकिस्तान और श्रीलंका को जो चीन ने कर्ज दिया है, वो मुख्य तौर पर करेंसी स्वेप, चाइना डेवलपमेंट बैंक, बैंक ऑफ चाइना और इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना लिमिटेड ने पीपुल्स बैंक ऑफ चायना (PBOC) के जरिए दिया है।
Recommended Video

चीनी बैंकों की तरफ से कोई जवाब नहीं
श्रीलंका और पाकिस्तान में PBOC और केंद्रीय बैंकों ने टिप्पणी मांगने के अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया। चीनी बैंकों और विदेशी मुद्रा के राज्य प्रशासन ने भी कोई जवाब नहीं दिया। वहीं, भुगतान संतुलन के मुद्दों वाले देश पीबीओसी के साथ मुद्रा-स्वैप व्यवस्था पर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, उन्हें रॅन्मिन्बी प्रदान कर रहे हैं, जिसे डॉलर के लिए भी बेचा जा सकता है। हालांकि इस तरह के सौदे अल्पावधि में देशों के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ावा देते हैं, लेकिन, पार्क्स ने बताया कि, "शुद्ध रूप से कोई भी बुनियादी सिद्धांत नहीं बदला है, वह पैसा किसी देश में जाता है और वापस बाहर जाता है।" पार्क्स ने कहा कि, 'अगर किसी देश को आप कर्ज दे रहे हैं और वो देश पुराने कर्ज चुकाने में नाकाम हो रहा है, तो फिर आप उसे और कर्ज देकर चीजों को और खराब कर रहे हैं'।












Click it and Unblock the Notifications