मालदीव को संकट से निकालने के लिए भारत से संपर्क करने में जुटा चीन
बीजिंग। मालदीव संकट से उबरने के लिए चीन ने शुक्रवार को कहा है कि वे विवाद को खत्म करने के लिए भारत के संपर्क में है। पीटीआई से बात करते हुए एक चीनी अधिकारी ने कहा कि बीजिंग मालदीव में विवाद को और बढ़ाना नहीं चाहता है और इसके लिए वे नई दिल्ली के संपर्क में है। हालांकि, चीन ने साथ में यह कहा है कि मालदीव में किसी भी बाहरी दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए। मालदीव में इंडियन आर्मी की दखलंदाजी की रिपोर्ट के बाद चीन ने आपत्ती जताई थी।

मालदीव की संप्रभुता का आदर करें...
मालदीव संकट को देखते हुए शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी से बात की, जिसे लेकर चीनी विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रया व्यक्त करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मालदीव की संप्रभुता और उनकी आजादी का आदर करना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुहांग ने कहा, 'मालदीव में वर्तमान परिस्थितियां उनका आतंरिक मसला है। सभी देशों को यह विवाद सुलझाने के लिए बातचीत से रास्ता निकालना चाहिए।'

मालदीव खुद विवाद सुलझाने में सक्षम...
बता दें कि मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामिन ने मदद के लिए उनके आर्थिक विकास मंत्री मोहम्मद सईद को चीन भेजा है। सईद से मुलाकात के दौरान चीनी डिप्लोमेट और उप विदेश मंत्री ने कहा, 'मालदीव के आतंरिक मसले में चीन दखलंदाजी नही करेगा। हम सभी पार्टियों को मालदीव की संप्रभुता और आजादी का ख्याल रखना चाहिए। चीन ने कहा कि वहां कि मालदीव की सरकार इस विवाद को सुलझाने के लिए पूरी तरह से सक्षम है और इसके लिए बीजिंग ने मदद करने के लिए पूरा भरोसा दिया है।

मालदीव में इंडियन मिलिट्री की दखलंदाजी नही चाहता चीन
चीन बिल्कुल नहीं चाहता है कि मालदीव में इंडियन मिलिट्री की दखलंदाजी हो। चीन ने कहा कि वे मालदीव की कूटनीतिक मदद करते रहेंगे। बता दें कि ओबीओआर प्रोजेक्ट के खातिर चीन के लिए मालदीव बहुत ही महत्वपूर्ण देश है, वहीं जब कभी भी माले में राजनीतिक अस्थिरता देखी गई है, तो हमेशा भारत ने मदद की है। इसके अलावा, दक्षिण एशिया में भारत और मालदीव ना सिर्फ पड़ोसी राष्ट्र है, बल्कि बहुत पुराने मित्र भी है।












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