अमेरिका ने नहीं, चीन ने गिराई इमरान की सरकार? शहबाज को बताया इमरान से बेहतर, गिनाए कारण
इमरान खान का मानना था, कि सीपीईसी प्रोजेक्ट पाकिस्तानियों के गले का फंदा है, जिसे चीन और कस रहा है।
इस्लामाबाद/बीजिंग, अप्रैल 11: पाकिस्तान की राजनीति में उठा बवंडर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है और इन सबके बीच चीन ने शहबाज शरीफ को इमरान खान से बेहतर बताकर पाकिस्तान की सियायी संकट तो और भी ज्यादा बढ़ा दिया है। वहीं, अब सवाल पूछे जा रहे हैं, कि क्या इमरान खान को हटाने की साजिश अमेरिका ने नहीं, चीन ने रची थी। इमरान खान बार बार अमेरिका को उनकी सरकार गिराने के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि असलियत काफी अलग दिख रही है।

चीन ने की शहबाज की तारीफ
चीनी आधिकारिक मीडिया ने रविवार को इमरान खान के अपदस्थ होने के बाद शहबाज शरीफ के नए प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं के बारे में उत्साहित होकर कहा कि, चीन और पाकिस्तान के बीच के संबंध इमरान खान के शासन के मुकाबले बेहतर हो सकते हैं। चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने पाकिस्तान के होने वाले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की जमकर तारीफ की है और ग्लोबल टाइम्स के लेख में शहबाज शरीफ को इमरान खान के मुकाबले काफी बेहतर बताया गया है। ग्लोबल टाइम्स के लेख में कहा गया है कि, तीन बार के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के छोटे भाई शहबाज के नेतृत्व में एक नई पाकिस्तान सरकार बनने की संभावना है, जब संसद सोमवार को नए प्रीमियर के लिए मतदान करेगी।

इमरान खान से बेहतर शहबाज
ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में चीनी विश्लेषकों के हवाले से लिखा है कि, 'चीनी और पाकिस्तानी विश्लेषकों का मानना है कि, ठोस चीन-पाकिस्तान संबंध पाकिस्तान में आंतरिक राजनीतिक परिवर्तन से प्रभावित नहीं होंगे, क्योंकि द्विपक्षीय संबंधों को सुरक्षित रखने और विकसित करने के लिए पाकिस्तान में सभी दलों और सभी समूहों की संयुक्त सहमति है।' ग्लोबल टाइम्स में कहा गया है कि, इमरान खान की जगह पर शहबाज शरीफ पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं। इमरान खान ने भी चीन-पाकिस्तान संबंधों को लंबे समय तक बढ़ावा दिया है, लेकिन दोनों देशों के बीच के संबंध शहबाज शरीफ के शासनकाल के मुकाबले और भी ज्यादा बेहतर हो सकता है।

शहबाज शरीफ से खुश क्यों चीन?
शहबाज शरीफ की सरकार बनने को लेकर अगर कोई खुश है, तो वो चीन ही है, क्योंकि इमरान खान ने प्रधानमंत्री बनने से पहले चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की खुलकर आलोचना की थी और प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने सीपीईसी का काम करीब करीब बंद ही करवा दिया। जिसको लेकर चीन में भारी नाराजगी है। वहीं, पिछली नवाज शरीफ सरकार के तहत 60 अरब डॉलर का चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) बेहतर ढंग से आगे बढ़ा था। वहीं, उस वक्त पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ ही थे, जिन्होंने पंबाज में सीपीईसी प्रोजेक्ट के लिए काफी काम किए और चीन की सरकार से उनके काफी अच्छे संबंध बन चुके हैं। वहीं, इमरान खान का मानना था, कि सीपीईसी प्रोजेक्ट पाकिस्तानियों के गले का फंदा है, जिसे चीन और कस रहा है।

चीन के प्रशंसक भी बने इमरान खान
सीपीईसी प्रोजेक्ट के लगातार विरोध की वजह से चीन को इमरान खान से काफी आपत्तियां थीं, लेकिन उस वक्त इमरान खान विपक्ष में हुआ करते थे। हालांकि, साल 2018 में प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद वो चीन-पाकिस्तान दोस्ती के बहुत बड़े प्रशंसक बन गये और उन्होंने कई बार चीन की यात्रा भी की और चीन के शीर्ष अधिकारियों के साथ अपने संबंधों को सुधारने की कोशिश भी की, लेकिन सीपीईसी का काम रफ्तार के साथ आगे नहीं बढ़ा। सिंघुआ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय रणनीति संस्थान में अनुसंधान विभाग के निदेशक कियान फेंग ने कहा कि, पाकिस्तान में नवीनतम राजनीतिक परिवर्तन मुख्य रूप से राजनीतिक दल के संघर्ष और अर्थव्यवस्था और लोगों की आजीविका के मुद्दों के कारण होता है। कियान ने कहा कि, COVID-19 महामारी के प्रभाव के कारण, देश में कई लोगों का मानना है कि इमरान खान का प्रशासन आर्थिक स्थिति को बिगड़ने से रोकने में नाकामयाब रहा है।

इमरान शासन के मुकाबले बेहतर संबंध
ग्लोबल टाइम्स ने अपने विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि, 'सामान्य तौर पर पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति से चीन का कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन इमरान खान अभी एक उभरते हुए राजनीतिक दल से हैं, जबकि पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) या पाकिस्तान पीपुल्, पार्टी (पीपीपी) पाकिस्तान की पारंपरिक राजनीतिक पार्टियां हैं और इनके सत्ता में लौटने से चीन-पाकिस्तान सहयोग और भी बेहतर हो सकते हैं, क्योंकि, इन दलों के चीन के साथ घनिष्ठ और गहरे संबंध हैं'।

शरीफ परिवार से संबंध
जब शहबाज पाकिस्तान के पूर्वी प्रांत पंजाब के एक क्षेत्रीय नेता थे, उन्होंने स्थानीय बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास में सुधार के लिए सीधे चीन के साथ कई बेल्ट एंड रोड पहल सहयोग सौदों पर हस्ताक्षर किए, और उनके परिवार ने चीन के साथ लंबे समय से संबंध बनाए रखा है, क्योंकि उनके भाई नवाज शरीफ हैं। चीनी विशेषज्ञों ने कहा कि तीन बार के पूर्व प्रधान मंत्री और सीपीईसी परियोजना की शुरुआत करने वाले नेता थे। आपको बता दें कि, नवाज शरीफ ने एक मंझे हुए नेता के तौर पर हर देश के साथ संबंध बनाने की कोशिश की और नवाज शरीफ के व्यापार के भारत में भी होने के आरोप हैं। वहीं, आरोप ये भी लगते रहे हैं, कि सीपीईसी प्रोजेक्ट के जरिए पाकिस्तान के नेताओं और पाकिस्तान की सेना ने अरबों रुपये कमाए हैं, जबकि इमरान खान ने सीपीईसी प्रोजेक्ट को पाकिस्तानी नेताओं के लिए भ्रष्टाचार का अड्डा करार दिया था, हालांकि सत्ता में आने के बाद उन्होंने सीपीईसी प्रोजेक्ट को लेकर बोलना बंद कर दिया।

चीन ने गिराई सरकार?
इमरान खान ने अमेरिका पर सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि, इमरान खान ने असल में अमेरिका के खिलाफ एक भी काम किए ही नहीं, जबकि चीन सीपीईसी प्रोजेक्ट के रूकने से नाराज था और चीन की तरफ से पाकिस्तान की आर्मी पर सीपीईसी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का प्रेशर डाला गया। यहां एक बात और दिलचस्प है, कि सीपीईसी प्रोजेक्ट में जो पाकिस्तान के अधिकारी शामिल हैं, वो पाकिस्तान के नेता नहीं, बल्कि पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी हैं और जो सैन्य अधिकारी सीपीईसी प्रोजेक्ट से हटता है, वो सीधा पश्चिमी देश भाग जाता है ब्लैकमनी को ठिकाना लगाने। लेकिन, इमरान खान ने इस प्रोजेक्ट को ही रोक दिया, जिससे 'घी का दरिया' बहना बंद हो गया। वहीं, चीन ने पाकिस्तानी आर्मी पर इमरान सरकार को हटाने और सीपीईसी प्रोजेक्ट के समर्थक नेताओं को गद्दी पर बिठाने के लिए कहा और पाकिस्तान की 'परंपरागत' पार्टियां अब सरकार में आ चुकी हैं और चीन ने अपनी खुशी का इजहार भी कर दिया है।












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