चुनाव की तैयारियों के बीच चीन के नंबर-3 नेता जा रहे नेपाल, क्या अमेरिका की गोद में चला गया पड़ोसी?
काठमांडू, 04 सितंबरः चीन के तीसरे नंबर के माने जाने वाले नेता और नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (संसद) की स्थायी समिति के अध्यक्ष ली झान्शु अगले सप्ताह से शुरू होने वाले चार देशों के दौरे के दौरान रूस और नेपाल का दौरा करेंगे। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक झान्शु 7 से 17 सितंबर तक रूस, मंगोलिया, नेपाल और दक्षिण कोरिया का आधिकारिक दौरा करेंगे।

12 जनवरी को पहुंचेंगे नेपाल
झान्शु कोविड-19 के बाद से देश छोड़ने वाले सबसे वरिष्ठ चीनी नेता होंगे। इससे पहले आखिरी बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जनवरी 2020 में म्यांमार का दौरा किया था। जानकारी के मुताबिक ली झान्शु 12 सितंबर से नेपाल की आधिकारिक यात्रा पर आएंगे। इस दौरान वह नेपाल में तीन दिनों तक रहेंगे। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, वह राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी, प्रधान मंत्री शेर बहादुर देउबा और अध्यक्ष अग्नि प्रसाद सपकोटा सहित शीर्ष नेपाली नेतृत्व से शिष्टाचार भेंट करेंगे।

शी जिनपिंग के करीबी हैं ली झान्शु
उनके इस दौरे को हाल में चीन के कई बड़े नेताओं की हुई नेपाल यात्रा की कड़ी में ही देखा जा रहा है। वर्तमान शेर बहादुर देउबा सरकार के 14 महीनों के कार्यकाल में चीन के दो बड़े नेता पहले नेपाल की यात्रा कर चुके हैं। इस वर्ष मार्च में चीन के विदेश मंत्री वांग यी यहां आए थे। उसके बाद जुलाई में सीपीसी के विदेश विभाग के प्रमुख लिउ जियानचाओ ने काठमांडू की यात्रा की। लिउ ने यहां सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं से बातचीत की थी। खासकर कम्युनिस्ट नेताओं के साथ हुई उनकी वार्ताओं को यहां बहुत अहमियत दी गई थी।

अगले महीने होगा सीपीसी का 20वां महाधिवेशन
कूटनीतिक विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि ली की ये यात्रा चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं कांग्रेस से ठीक पहले हो रही है। सीपीसी की 20वीं कांग्रेस अगले 16 अक्टूबर से होगी, जिसमें संभावना है कि शी जिनपिंग को तीसरे कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति चुना जाएगा। आमतौर पर जब देशों के अंदर नेताओं की ऐसी राजनीतिक व्यस्तता हो, तो विदेश यात्राएं नहीं होती हैं। इसके अलावा नेपाल में भी इस समय 20 नवंबर को होने वाले आम चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं।

दो वामपंथी पार्टियों एकसाथ लाना चाहता है चीन
नेपाल पिछले काफी समय से अमेरिका और चीन के बीच अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने की चल रही होड़ का स्थल बना हुआ है। झान्शु को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का करीबी समझा जाता है। इसीलिए माना जा रहा है कि ली झान्शु की यात्रा पर कूटनीतिक विशेषज्ञों की खास नजर रहेगी। चीन चाहता है कि नेपाल के कम्युनिस्ट नेता एकजुट रहें। इसके लिए वह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) को साथ लाने का पूरा प्रयास करता रहा है। नेपाल में फिलहाल यूएमएल प्रमुख विपक्षी दल है, जबकि माओइस्ट सेंटर नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल है।

चीन गए थे नेपाल के विदेश मंत्री
इसके अलावा पिछले महीने नेपाल के विदेश मंत्री नारायण खड़का चीन यात्रा पर गए थे। उस समय ताइवान विवाद अपने चरम पर था। खड़का की चीन में विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हुई थी। इस दौरान खड़का ने वन चाइना पॉलिसी के प्रति नेपाल की वचन बद्धता दोहराई थी। इस बीच भारत के थल सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे रविवार को पांच दिन की आधिकारिक यात्रा पर नेपाल पहुंचे। यहां वह देश के शीर्ष सैन्य और असैन्य नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श करेंगे। जनरल पांडे को इस यात्रा के दौरान सोमवार को काठमांडू में एक समारोह में राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी नेपाली सेना के जनरल की मानद उपाधि प्रदान करेंगी।












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