चीन की विशालकाय अर्थव्यवस्था का पानी उतरना शुरू, 5 प्वाइंट्स में समझिए इकोनॉमी के पतन की पूरी कहानी
China's Economic Crisis: चीन की अर्थव्यवस्था रॉकेट की रफ्तार से ऊपर बढ़ती गई और पिछले 30 सालों में चीन, अब अमेरिका को चुनौती देने की स्थिति में आ चुका है। लेकिन, पिछले 2 सालों में चीन जिस तरह से आर्थिक संकट में फंसा हुआ है, उसके बाद सवाल उठ रहे हैं, क्या चीन जितनी तेजी से आगे बढ़ा, क्या उतनी ही तेजी से चीन की अर्थव्यवस्था का पतन भी हो रहा है?
शी जिनपिंग को पिछले साल 2900 से ज्यादा, रबरस्टांप संसद के सांसदों ने वोट देकर लगातात तीसरी बार राष्ट्रपति बनाया था और चीन की सेना हो या कम्युनिस्ट पार्टी या फिर देश की सरकार, अब चीन की इन तीनों अंगों के प्रमुख राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं। लेकिन, तानाशाह बन चुके शी जिनपिंग के नीतिगत फैसलों ने देश की अर्थव्यवस्था को अब बर्बादी की तरफ मोड़ दिया है।

कारोबारी दिग्गजों पर अंकुश और नियंत्रण की उनकी नीतियों को कोविड के बाद आर्थिक संकट के तात्कालिक कारणों में से एक बताया जा रहा है।
कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने राजनीतिक सहयोगियों और चीन के व्यापारिक दिग्गजों को नुकसान पहुंचाकर, क्षेत्रीय असमानता और गरीबी को कम करने की शी जिनपिंग की कोशिश की कीमत, देश को चुकानी पड़ रही है।
काफी ज्यादा चिंताजनक मासिक आंकड़ों के जारी होने के बीच कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ने शी जिनपिंग के उस भाषण को जारी किया है, जिसमें उन्होंने "राष्ट्रीय कायाकल्प" की खोज में जनता से धैर्य और लचीलापन होने का आह्वान किया है। आइये पांच फैक्टर्स के जरिए समझते हैं, कि चीन की अर्थव्यवस्था का बुरा हाल क्यों हो गया है?
ज़ीरो कोविड पॉलिसी
दुनिया के बाकी देशों के विपरीत, चीन लंबे समय से महामारी से निपटने के लिए 'ज़ीरो कोविड' नीति पर अड़ा रहा। इस दौरान करीब डेढ़ सालों तक देश के अलग अलग क्षेत्रों में अत्यंय सख्त लॉकडाउन लगाया जाता रहा। जिसका परिणाम ये हुआ, कि चीन की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कोविड वायरस के संपर्क में नहीं आया, लेकिन इस दौरान अर्थव्यवस्था का इंजन बैठने लगा।
जैसे ही देश में ज़ीरो कोविड पॉलिसी को खत्म किया गया, ठीक वैसे ही पूरा देश एक साथ कोविड की चपेट में आ गया, जिससे कई लाख लोगों की मौत हो गई। यानि, शी जिनपिंग की नीति, ना तो देश की अर्थव्यवस्था को ही बचा पाई और ना ही लोगों के जीवन को।
बार-बार लॉकडाउन ने देश के मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री और कॉमर्शियल एक्टिविटीज को गंभीर नुकसान पहुंचाया, जिससे कारखानों और कंपनियों में अस्थिरता पैदा हुई और इसका असर कर्मचारियों, नियोक्ताओं और उद्योगों पर पड़ा। इसका उपभोग, पर्यटन और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ा, जिससे पूरे देश में मंदी आ गई।
टेक-टॉनिक शिफ्ट
साल 2020 से ही, शी जिनपिंग प्रशासन, देश की डेटा सुरक्षा को बनाए रखने और व्यावसायिक हित पर राष्ट्रीय हित को वरीयता देते हुए अली बाबा और टेनसेंट जैसे तकनीकी दिग्गजों पर सख्ती बरत रहा है, और उन्हें "पूंजी का अव्यवस्थित विस्तार, क्रूर विकास, दोहरी कमी और आध्यात्मिक अफीम" जैसे शब्दों से मार रहा है।"
"सामान्य समृद्धि" चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) का नया मूलमंत्र बन गया, जिसने नियामक कार्रवाई के बीच तकनीकी और निजी क्षेत्रों को अधर में डाल दिया। चीन ने उपभोक्ताओं की जानकारी के दुरुपयोग और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन का हवाला देते हुए, अरबों डॉलर का कारोबार करने वाली इन कंपनियों की नाक में नकेल डाल दिया और इनपर अरबों डॉलर के जुर्माने लगाए गये।
कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि 'शंघाई गैंग' का आदमी बताकर अलीबाबा के संस्थापक जैक मा को कई महीनों तक नजरबंद रखा गया और आखिरकार जैक मा अपनी कंपनी और कारोबार छोड़कर जापान में निर्वासित जीवन जी रहे हैं, हालांकि उन्होंने आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा नहीं की है, लेकिन अलीबाबा का सीईओ किसी और को बना दिया गया है और जैक मा कई महीनों से चीन से दूर रह रहे हैं।
शी जिनपिंग की तानाशाही भरे इस फैसले ने चीन में कारोबार कर रहे नाइकी रन क्लब ऐप, अमेज़ॅन किंडल ई-बुक्स, माइक्रोसॉफ्ट के स्वामित्व वाले लिंक्डइन और एयरबीएनबी जैसे दिग्गजों का बड़े पैमाने पर पलायन करने पर मजबूर कर दिया, लिहाजा देश में निवेश आना कम होने लगा।
रियल एस्टेट सेक्टर औंधे मुंह गिरा
चीन की घरेलू संपत्ति में रियल एस्टेट उद्योग का 59 प्रतिशत हिस्सा है और शी जिनपिंग की नीतियों की वजह से रियल एस्टेट सेक्टर औंधे मुंह गिर चुका है। एक दिन पहले ही चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी एवरग्रांडे ने अमेरिका में दिवालिया होने का एप्लीकेशन सौंपा है, जिसे 300 अरब डॉलर से ज्यादा का ऋण चुकाना है।
चीन में जैसे ही 2021 के मध्य में ऋण संकट सामने आया, चीनी घर की बिक्री में 40% हिस्सेदारी रखने वाली कई कंपनियां डिफॉल्ट हो गईं, उनमें से ज्यादातर निजी प्रॉपर्टी डेवलपर्स हैं।
जिसका नतीजा ये हुआ, कि आधे से ज्यादा हाउसिंग प्रोजेक्ट अधूरे रह गये हैं, जिससे लोगों में भारी गुस्सा है, वहीं प्रॉपर्टी डेवलपर्स अब बैंकों का ऋण चुकाने की स्थिति में नहीं हैं, लिहाजा बैंकों की 11 प्रतिशत संपत्ति एनपीए हो गई है।
इसके अलावा, छोटे लेनदारों ने अपना भुगतान प्राप्त करने के लिए अदालतों का रुख किया है। जैसे सनैक होल्डिंग्स और जियायुआन इंटरनेशनल समूह ने पिछले साल समापन याचिकाएं दायर की हैं। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग ने बुधवार को कहा, कि अगर चीन का सबसे बड़ा डेवलपर कंट्री गार्डन आधिकारिक तौर पर डिफॉल्ट होता है, तो स्थिति अत्यधिक बुरी हो जाएगी।

भारी-भरकम कर्ज में स्थानीय सरकारें
चीन की अर्थव्यवस्था में आई इस संकट के पीछे एक अन्य कारक स्थानीय सरकारी ऋण है, जो कोविड महामारी के बाद बढ़ रहा है और अब तक नियंत्रित नहीं किया जा सका है। जमीन की बिक्री में तेजी से गिरावट के कारण, उनके पास पैसे की कमी हो गई है।
स्थानीय सरकारी ऋण चीन के लगभग 49 ट्रिलियन डॉलर के ऋण का एक तिहाई है।
चीन में स्थानीय सरकारों का ऋण 2022 में 92 ट्रिलियन युआन ($12.8 ट्रिलियन) या आर्थिक उत्पादन का 76% तक पहुंच गया, जो 2019 में 62.2% था। ऋण में योगदान देने वाले स्थानीय सरकारी वित्त वाहन (एलजीएफवी) थे, जिनका उपयोग शहर बुनियादी परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के लिए करते थे।
रोजगार संकट
इन सभी फैक्टर्स का नतीजा सीधे तौर पर जॉब मार्केट पर पड़ा और चीन में 16 से 24 साल की उम्र वाले युवाओं में बेरोजगारी दर 21.3 प्रतिशत हो गई है, जो जून महीने में रिकॉर्ड पर पहुंच गई है।
पिछले साल लगभग 10 मिलियन युवाओं ने बाजार में प्रवेश किया और यह संभावना नहीं है कि उन सभी को नौकरियां मिल गईं। चीन में पिछले साल एक करोड़ नये युवा नौकरी के लिए लाइन में लगे, लेकिन अब उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है।
स्थिति ये हो गई है, कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने इस महीने से रोजगार डेटा को जारी करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, कंपनियों ने 35 साल की उम्र वाले लाखों कार्यरत युवाओं को नौकरी से निकाल दिया है और ये वो उम्र है, जहां ज्यादातर युवा शादी शुदा हो जाते हैं, लिहाजा चीन का समाज ही टूटने के कगार पर पहुंच गया है, क्योंकि रोजगार ना होने की स्थिति में घर बर्बाद होने लगे हैं।
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