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Video: क्या सच में मुस्लिमों को कैंपों में रखता है चीन? सिटिजन जर्नलिस्ट ने सीक्रेट कैमरे से दिखाया सच

सिटिजन जर्नलिस्ट ने कहा कि, वो बार बार इंटरनेशनल मीडिया में कैंपों के बारे में खबर पढ़ता था, लिहाजा वो सीक्रेट कैमरा लेकर असलियत का पता लगाने निकल पड़ा।

बीजिंग, नवंबर 21: क्या चीन वास्तव में इउइगर मुस्लिमों को प्रताड़ित करता है और क्या चीन के शिनजियांग शहर में वास्तव में कंसट्रेशन कैंप चलाए जाते हैं? पहली बार इसकी पड़ताल खुद चीन के एक नागरिक ने की है। चीन का एक सिटिजन जर्नलिस्ट अपनी जानपर खेलकर उस इलाके में पहुंचा, जहां इंटरनेशनल मीडिया लगातार कैंप्स होने के दावे करता रहा है। चीन का सिटिजन जर्नलिस्ट तहकीकात करना चाहता था, कि इंटरनेशनल मीडिया जिन कैंपों की बात करता है, वो वास्तव में हैं, या फिर चीन के खिलाफ झूठ बोला जाता है? चीन का सिटिजन जर्नलिस्ट बताता है कि, चीन की सरकार दावा करती है कि, शिनजियांग में एक भी कैंप नहीं है, लिहाजा वो हकीकत जानने के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर कैंपों की असलियत का पता लगाने शिनजियांग के उन इलाकों में पहुंच गया, जहां कैंप्स होने का दावा किया जाता रहा है, आईये जानते हैं, कि वास्तव में कैंप्स हैं या फिर चीन के खिलाफ झूठ बोला जाता है?

जान पर खेलकर पहुंचा शहर

जान पर खेलकर पहुंचा शहर

चीन के सिटिजन जर्नलिस्ट गुआन एक आम आदमी की तरह शिनजियांग के उस क्षेत्र में पहुंचे, जहां कैंप्स होने की बात कही जाती थी। गुआन सीक्रेट कैमरे से वीडियो बना रहे थे और वो वीडियो में कहते हैं, कि वो एक पर्यटक बनकर इस क्षेत्र में आए हैं। गुआन बताते हैं कि, इन क्षेत्रों में किसी भी विदेशी का आना प्रतिबंधित है। गुआन बताते हैं कि, उनके बैग में सीक्रेट कैमरा लगा हुआ है और वो जगह जगह चीन की पुलिस को देख रहे हैं। चीन के सिटिजन जर्नलिस्ट गुआन बताते हैं, कि वो उस क्षेत्र में दाखिल हो चुके हैं, जो प्रतिबंधित है और अगर उन्हें पकड़ा जाता है, तो फिर उन्हें भयानक सजा का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि अगर सही में 20 लाख से ज्यादा लोगों को कैंपों में रखा गया है, तो ये सच दिखाना उनकी जिंदगी पर बहुत भारी पड़ने वाला है।

''शिविरों के बारे में सिर्फ सुना था''

''शिविरों के बारे में सिर्फ सुना था''

चीन के सिटिजन जर्नलिस्ट गुआन बताते हैं कि, उन्होंने इन कैंपों के बारे में सिर्फ सुना था और इंटरनेशनल मीडिया से सुना था कि, उइगर मुस्लिमों को प्रताड़ित किया जाता है, उन्हें गुलाम बनाकर रखा जाता है और उनका नरसंहार किया जाता है और इस क्षेत्र में दाखिल होने के बाद उनके मन में सवाल आता है, कि अगर कुछ गलत नहीं है, तो फिर इस क्षेत्र को प्रतिबंधित क्यों किया गया है। गुआन अपने वीडियो में बताते हैं, कि कंसंट्रेशन कैंपों के बारे में पता लगाने के लिए वो शिनजियांग प्रांत के आठ शहरों का दौरा करते हैं और उच्च जोखिम वाली अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने 18 शिविरों को खोजने में कामयाबी हासिल की।

18 कंसंट्रेशन कैंप मिले

18 कंसंट्रेशन कैंप मिले

गुआन बताते हैं कि, वो 'जानलेवा' मिशन पर थे और जहां तक पहुंच सकते थे, वहां तक पहुंचने की कोशिश उन्होंने की है। उन्होंने कहा कि, 18 शिविरों को खोजने में उन्हें कामयाबी मिली है। जिसमें एक 1000 गज का एक ऐसा हिरासत शिविर भी उन्हें मिला है, जिसपर लिखा है, 'श्रम से सुधार'। उन्होंने कहा कि, कैंपों के दीवारों पर भयावह नारे लिखे हुए थे। गुआन लगातार वीडियो बना रहे थे और उन्होंने जेल की दीवारों के अंदर कांटेदार तार, गार्ड टावर, पुलिस चौकियों, सेना के बैरकों, सेना की गाड़ियों और रास्तों को अपने वीडियो में फिल्माया है। उन्होंने यूट्यूब पर पोस्ट किए गये 19 मिनट के वीडियो में चीन के तमाम झूठ को बेनकाब करके रख दिया है।

वीडियो में बेनकाब चीन

वीडियो में बेनकाब चीन

चीन के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता लिचानचाओ हान ने वीडियो देखने के बाद कहा कि, ''यह दिखाता है कि कैसे शिनजियांग दुनिया का सबसे बड़ा गुलाग बन गया है, जिसकी अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर मेगा जेलों, हिरासत केंद्रों और कंसंट्रेशन कैंप्स में करवाए जा रहे जबरन श्रम पर आधारित है, जो आतंक पर निर्भर है। यह चीन के अत्याचारों के ठोस और बढ़ते सबूतों को जोड़ता है।' आपको बता दें कि, ताइवान में पढ़ रहे एक चीन के एक कार्यकर्ता ने इस वीडियो को बनाया है, जिन्होंने वीडियो में अपना नाम 'गुआन' बताया है, जिसका चीन में मतलब 'छद्म नाम' होता है। उन्होंने कहा कि, बजफीड वेबसाइट पर बताया गया है कि, शिनजियांग में कम से कम 268 ऐसे कैंप्स हैं, जिनकी सिर्फ सैटेलाइट तस्वीरें हीं अभी भी बाहर हैं, लिहाजा वो असलियत जानने के लिए यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि, 'वेबसाइट पर प्रकाशित तस्वीरें सैटेलाइट तस्वीरें हैं। चिह्नित किए गए विशिष्ट भवन कहां हैं? असल जिंदगी में वे कैसी दिखती हैं? उनका परिवेश कैसा है? इन सवालों को ध्यान में रखते हुए, मैं फिर से शिनजियांग पहुंचा हूं।'

दिल में भरा था दहशत

दिल में भरा था दहशत

गुआन बताते हैं जब उन्हें पता चल गया है कि, इंटरनेशनल मीडिया जो दावे कर रहा है, वो सच है, तो फिर उसके दिल में दहशत भर गया है। उन्होंने कहा कै, ''मैं अब जान रहा हूं, कि अगर इन जेलों का वीडियो बनाते हुए या फिर इन कंसंट्रेशन कैंप्स का वीडियो बनाते हुए मुझे पकड़ा गया, तो मुझे खुद ऐसे ही किसी भयानक जगह रहना पड़ेगा''। उन्होंने कहा कि, ''जब मैं शिनजियांग प्रांत की राजधानी शिंशी पहुंचा, तो मैंने देखा कि, वहां जगह जगह सर्विलांस कैमरे लगे हुए हैं और वहां पर कई 'इंटरमेंट सेंटर्स' बने हुए हैं, जिन्हें कांटेदार तारों से घेरकर सुरक्षित किया गया है। वीडियो बनाते हुए गुआन एक और डिटेंशन कैंप के पास पहुंचते हैं, जहां पर हजारों लोगों को एक जेल में बंद किया गया है। गुआन एक ऊंचे जगह से छिपकर उन इमारतों का वीडियो बना रहे हैं, जिसमें रेजर तार और निगरानी करते हुए गार्ड्स देखे जा रहे हैं।

सिटिजन जर्नलिस्ट ने क्या देखा?

सिटिजन जर्नलिस्ट ने क्या देखा?

चीन के ही नागरिक 'गुआन' ने कहा कि, शिनजियांग क्षेत्र में उइउगर मुस्लिमों के नरसंहार की बात बिल्कुल सही है और सच में इस क्षेत्र में कंसंट्रेशन कैंप्स बने हुए हैं, जहां पता नहीं कितने लोगों को रखा गया है। इस क्षेत्र में काफी ज्यादा सुरक्षा है और कैंप के अंदर काफी सख्त निगरानी है।जिनमें से सभी में गार्ड द्वारा संचालित वॉचटावर हैं। उन्होंने कहा कि, ''बिल्डिंग में कांच के रोशनदान बने हुए हैं और शायद कैदियों को उसे से रोशनी मिलती है और शायद उन्हें इमारत के बाहर आने की इजाजत नहीं है''। इस वीडियो के आने के बाद एक विशेषज्ञ ने कहा कि, ''मेरी आंखों में पानी आ चुका है, क्योंकि गुआन ने अदम्य साहस दिखाया है और शिनजियांग के दक्षिण में स्थिति बंजर क्षेत्र की असलियत उसने दुनिया के सामने ला दी है''।

कैसा है इंटर्नमेंट सेंटर?

कैसा है इंटर्नमेंट सेंटर?

शिनजियांग प्रांत के दबनचेंग में बनाया गया नया इंटर्नमेंट सेंटर, मौजूदा शिविर के साथ कम से कम 10 हजार और दुर्भाग्यशाली नागरिकों को पकड़कर रखने के लिए बनाया गया है। यहां की इमारते करीब 25 फीट ऊंची है और दीवारों को कंक्रीट से काफी मजबूत बनाया गया है। यहां की इमारते करीब एक मील तक फैली हुई है और ऐसा माना जाता है कि, यहां पर इसकी क्षणता से तीन गुना से ज्यादा लोगों को कैद करके रखा गया है। इसके बाद चीन का सिटिजन जर्नलिस्ट दक्षिण में एक सैन्य अड्डे के पीछे कंसंट्रेशन केंद्रों के एक अन्य परिसर की यात्रा करता है, जिसे वह कोरला शहर के बाहर फिल्माता है।

सड़कों पर एक भी आदमी नहीं

इस दौरान वो उस क्षेत्र में बड़ी संख्या में चीन के 'एसएस' सैनिकों को देखता है। वो बताते हैं कि, सड़क से गुजरते हुए आप इन्हें नहीं देख सकते है। आपको बता दें कि, चीन ने हाल के वर्षों में सैकड़ों नजरबंदी शिविरों का निर्माण किया है और अपनी क्रूरता को लगातार आगे बढ़ा रहा है। जिससे बीजिंग बार-बार इनकार करता है। लेकिन, तमाम रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, मुस्लिम अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता और परंपराओं को कुचलने के लिए चीन दुनिया का सबसे दमनकारी तरीका अपना रहा है।

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