China News: टेक्नोलॉजी चुराते चुराते पायलट्स चुराने लगा चीन, Five Eyes की रिपोर्ट से माथा पीट रहा अमेरिका
China Stealing Pilots: अमेरिका की लापरवाही की वजह से चीन ने टेक्नोलॉजी की चोरी करते-करते आज खुद को इतना मजबूत बना चुका है, कि आज वो अमेरिका के लिए ही भस्मासुर बन चुका है। अब ऐसी रिपोर्ट है, कि अपने पायलट्स को ट्रेनिंग देने और पश्चिमी देशों की रणनीतियों को जानने के लिए चीन उनके पायलटों की चोरी कर रहा है।
'फाइव आइज' पार्टनर्स, जिनमें अमेरिका के साथ साथ यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड है, उसने एक संयुक्त बयान जारी किया हगै, जिसमें कहा गया है, कि चीन, इन देशों के पायलट्स की भर्ती कर रहा है, जो एक बड़ा खतरा है। फाइव आइज की तरफ से ये बुलेटिन 5 जून को जारी किया गया है।

विदेशी पायलटों की क्यों भर्ती कर रहा चीन?
इस बुलेटिन में कहा गया है, कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के पूर्व लड़ाकू पायलटों को दक्षिण अफ्रीका और चीन की निजी कंपनियों के माध्यम से PLA वायु सेना (PLAAF) और PLA नौसेना (PLAN) में कैडेट पायलटों को ट्रेनिंग देने के लिए भर्तियां कर रहा है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी की एक शाखा नेशनल काउंटरइंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी सेंटर के प्रमुख माइकल केसी के मुताबिक, "अपनी कमियों को दूर करने के लिए, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी अपने एविएटर्स को ट्रेनिंग देने के लिए आक्रामक रूप से विदेशी पायलट्स की भर्ती कर रही है।"
और इस रिपोर्ट ने फाइव आइज देशों की नींद उड़ा दी है और पेंटागन की उप प्रेस सचिव सबरीना सिंह ने कहा, कि "हम उम्मीद करते हैं कि हमारे पायलट उन मानकों को बनाए रखेंगे, जिनके तहत उन्हें प्रशिक्षित किया गया है और वे अपने प्रशिक्षण को संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए विशिष्ट रखेंगे।"
माना जा रहा है, कि पश्चिमी देशों के पायलट्स की भर्ती करने की सबसे बड़ी वजह यह है, कि चीन पश्चिमी देशों की लड़ाई लड़ने की मानसिकता को समझना चाहता है। उदाहरण के लिए, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, कि चीनी पायलट पश्चिमी देशों में ट्रेंड पायलटों से हवाई युद्ध की रणनीति से लेकर विमानवाहक पोत पर उतरने तक की क्षमता, कुछ भी सीख सकते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी पायलट चीनी पायलट्स को ये भी सिखा सकते हैं, कि आखिर कैसे युद्ध के समय पश्चिमी देशों की स्ट्रैटजी को फेल किया जाए।
बुलेटिन में आशंका जताई गई है, कि "PLA इन पायलट्स की विशेषज्ञता का बेहतरीन इस्तेमाल करना चाहता है और अपनी हवाई क्षमता का सुधार करना चाहता है। इसके साथ ही, ये पायलट्स चीन को ये भी सिखा सकते हैं, कि नये पायलट्स की भर्ती कैसे की जाए, उन्हें युद्ध के माहौल में कैसे ढाला जाए और सबसे अहम बात ये, कि पश्चिमी देश जिन लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करते हैं, उन विमानों के खिलाफ चीन कैसे डिफेंस तैयार करे।"
पायलट्स की कैसे भर्ती करता है चीन?
पश्चिमी देशों के पायलट्स की भर्ती करने के लिए चीन अलग अलग तरीकों से विदेशों में भर्ती विज्ञापन निकालता है, जिसे आम लोग समझ नहीं पाते हैं। चीनी कंपनियां इस काम में काफी मजबूत भूमिका निभाती हैं और वो बहुत आसानी से पायलट्स तक पहुंच जाती हैं। और फिर उन्हें आरामदायक जिंदगी और स्पेशल पैकेज का ऑफर दिया जाता है।
फाइव आइज ने कहा है, कि चीन में सबसे ज्यादा डिमांड एयरफोर्स पायलट्स, फ्लाइट इंजीनियर और एयर ऑपरेशन सेंटर के कर्मचारियों की है। चीनी कंपनियों ने पायलट्स की भर्ती के लिए सिंगापुर, लाओस और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में सेंटर्स बनाए हैं। ऐसी रिपोर्ट है, कि दर्जनों पश्चिमी देशों के पायलट्स इस वक्त चीन में ट्रेनिंग दे रहे हैं।
पायलट्स की चोरी से अमेरिका में चिंता
पिछले कुछ सालों में आई कई रिपोर्ट्स में साफ तौर पर कहा गया है, कि चीन अपने कैडेट पायलटों को प्रशिक्षित करने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी से पश्चिमी लड़ाकू पायलटों को अपने जाल में फंसा रहा है। हालांकि, यह चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि बीजिंग अपनी चाल में लगातार कामयाब हो रहा है।
2022 के बाद से रिटायर्ट अमेरिकी, ब्रिटिश और जर्मन लड़ाकू पायलट, चीनी वायु सेना और नौसेना के साथ काम कर रहे हैं और वो अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ाने के लिए अपनी विशेषज्ञता चीनी पायलट्स को प्रदान कर रहे हैं।
पूर्व अमेरिकी मरीन पायलट डैनियल डुग्गन को 2022 में ऑस्ट्रेलिया में चीनी सैन्य पायलटों को अमेरिकी हथियार नियंत्रण कानून का उल्लंघन करते हुए एयरक्राफ्ट कैरियर पर उतरने की ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि अगर कोई पायलट NATO फोर्स में काम कर चुका है, तो वो चीन के लिए अनमोल हीरा बन जाता है, क्योंकि वो पायलट ना सिर्फ अमेरिका, बल्कि नाटो के 30 देशों की एयरफोर्स के बारे में बहुमूल्य जानकारियां चीन को प्रदान कर सकता है। ऐसे पायलट्स टेक्नोलॉजी के साथ साथ उनकी एयरपोर्स की संचालन क्षमता, विशेषज्ञता और तकनीकी प्रक्रियाओं के बारे में भी अनमोल जानकारियां चीन को दे सकता है।
लिहाजा, अब पश्चिमी देशों ने बीजिंग के इस अभियान का मुकाबला करने के लिए तेजी से कदम उठाने शुरू किए हैं। उदाहरण के लिए, जून 2023 में, अमेरिकी सरकार ने चीनी सरकार से कथित तौर पर जुड़े दर्जनों व्यवसायों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इस लिस्ट में दक्षिण अफ्रीका की टेस्ट फ्लाइंग एकेडमी और फ्रंटियर सर्विसेज ग्रुप शामिल है, जो चीनी राज्य के स्वामित्व वाली कंपनी है और ये दोनों ही कंपनियां अमेरिकी पायलट्स की भर्ती कर रही थी।
वहीं, ब्रिटेन ने सितंबर 2023 में घोषणा की थी, कि उसके सशस्त्र बलों के पूर्व सदस्य, जिन्होंने चीनी पायलटों को प्रशिक्षित किया है, उन्हें कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा और यहां तक कि, एक विरोधी देश के साथ सैन्य रणनीतियों का आदान-प्रदान करने के लिए उनके खिलाफ मुकदमा भी चलाया जाएगा।
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