जानिए कैसे चीन की एक कंपनी अपने साथ दुनिया की अर्थव्यवस्था को ले डूबेगी? अलर्ट पर अमेरिका
पिछले दो सालों से चीन में रियल एस्टेट इंडस्ट्री भारी तनाव से गुजर रही है और देश के कॉरपोरेट इंडस्ट्पी को नियंत्रण में रखने की कोशिश ने इस कारोबार को जमीन पर गिराने का पूरा बंदोबस्त कर लिया है।
बीजिंग, नवंबर 10: बड़े कारोबारियों को सजा देने के चक्केर में चीन का रियल एस्टेट इंडस्ट्री बहुत बुरी तरह से चरमरा गया है और माना जा रहा है कि बहुत जल्द चीन में प्रॉपर्टी व्यवसाय ढह सकता है, जिसकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था ही चरमराकर ताश के पत्तों की तरह गिर सकती है। अगर आप सोच रहे होंगे, कि इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन को भला सिर्फ प्रॉपर्टी कारोबार के गिरने से क्या नुकसान होगा, तो आपको बता दें कि, चीन की अर्थव्यवस्था में रियल एस्टेट इंडस्ट्री का योगदान करीब 30 फीसदी है और एवरग्रांडे ग्रुप अपने साथ पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को डूबोने के लिए पूरी तरह से तैयार है। (सभी तस्वीर फाइल)

चीन में रियल स्टेट कारोबार
पिछले दो सालों से चीन में रियल एस्टेट इंडस्ट्री भारी तनाव से गुजर रही है और देश के कॉरपोरेट इंडस्ट्पी को नियंत्रण में रखने की कोशिश ने इस कारोबार को जमीन पर गिराने का पूरा बंदोबस्त कर लिया है और विश्लेषकों का कहना है कि, कम्युनिस्ट पार्टी की कब्जे वाली नीति की वजह से पूरे देश की अर्थव्यवस्था औंधे मुंह गिर सकती है। कुछ हफ्ते पहले तक वैश्विक बाजार चीन के एवरग्रांडे ग्रुप की संभावित विफलता से परेशान था, जो दुनिया का सबसे अधिक कर्जदार संपत्ति डेवलपर बना हुआ है। और अर्थव्यवस्था के जानकारों का कहना है कि, यदि शी जिनपिंग की सरकार एवरग्रांडे ग्रुप को बेल ऑउट पैकेज नहीं देने के अपने जिद पर अड़ी रहती है, तो चीन की अर्थव्यवस्था पर 300 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज आ जाएगा।

रिएल स्टेट में उथल-पुथल से दहशत
दरअसल, ऐसी रिपोर्ट है कि, शी जिनपिंग की सरकार ने व्यापार में पारदर्शिता लाने को लेकर एक बयान देने वाले प्रसिद्ध कारोबारी जैक मा और एवरग्रांडे ग्रुप पर फंदा कसना शुरू किया, जिसका नतीजा चीन के हर सेक्टर पर दिखाई दे रहा है और बाजार में डर है। मल्टीमिलियन-डॉलर के बॉन्ड पर भुगतान किए जाने के बाद एवरग्रांडे में उथल-पुथल हाल ही में समाप्त होती दिखाई दी। लेकिन इसके वित्तीय संकट ने पहले ही एक व्यापक दहशत पैदा कर दी है जिसने अन्य डेवलपर्स के बीच भारी डर का माहौल है और उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है। रियल एस्टेट कंपनियों को बाजार से पैसा मिलना काफी मुश्किल हो गया है, क्योंकि उधार लेने की लागत बढ़ गई है, चीन में कम लोग अपार्टमेंट खरीद रहे हैं और प्रॉपर्टी सेक्टर में कीमत काफी गिर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, प्रॉपर्टी कंपनियों को अगले दो महीनों में अकेले विदेशी निवेशकों को 40 अरब डॉलर का भुगतान करना है।

कंपनियों पर अभूतपूर्व दबाव
6 साल पहले विदेशी कर्ज को चुकाने से चूकने वाली चीन के रियल एस्टेट डेवलपर 'कैसा ग्रुप' ने पिछले हफ्ते अपने निवेशकों से कहा है कि, वो "अभूतपूर्व दबाव" का सामना कर रहा है। चीनी डेवलपर्स के लिए तनाव इतना ज्यादा है कि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने इस सप्ताह एक रिपोर्ट में इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए संभावित जोखिम के रूप में चिह्नित किया है। चूंकि चीनी रियल एस्टेट डेवलपर्स अपने सबसे बुनियादी वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं, लिहाजा विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि एवरग्रांडे की समस्याओं का खतरनाक स्पिलओवर प्रभाव होना शुरू हो गया है। एवरग्रांडे और बीजिंग गोपनीयता के पर्दे के तहत कंपनी के संघर्षों का मैनजमेंट कर रहे हैं, जिससे बिना कोई तारीख बताए पैसों का भुगतान शामिल है, लेकिन इसका निगेटिव असर हो रहा है।

मुश्किल में एवरग्रांडे ग्रुप
चीन के प्रॉपर्टी कारोबार विश्लेषक और एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के डायरेक्टर मैथ्यू चाउ ने कहा कि, "एवरग्रांडे के लिए मूलभूत स्थिति वास्तव में नहीं बदली है।" उन्होंने कहा कि, "हमें यकीन है कि एवरग्रांडे ग्रुप का डिफॉल्ट लगभग निश्चित है।" इसके साथ ही एवरग्रांडे के लिए एक और संभावित विनाशकारी समय सीमा बुधवार को आ रही है, जब 150 मिलियन डॉलर मूल्य के बांड भुगतान पर बॉंड ड्यूरेशन समय सीमा खत्म हो जाएगी। लेकिन, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि, एवरग्रांडे ग्रुप अपने हालिया भुगतानों के लिए आवश्यक धन कहां से लाएगा। जब कंपनी के पास नकद नहीं है और उसके उसके अपार्टमेंट्स को कोई खरीद नहीं रहा है और लेनदान कंपनी के दरवाजे पर घंटी बजा रहे हैं, तो फिर कंपनी का डूबना तय है। इसके साथ ही करीब 10 लाख ऐसे लोग हैं, जो अपने अधूरे घर के लिए एवरग्रांडे ग्रुप का दरवाजा खटखटा रहे हैं, और कंपनी के पास अधूरे घरों को बनाने के लिए पैसे नहीं हैं।

कंपनी के बैठने का असर
एवरग्रांडे ग्रुप पर 300 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज है, जो चीन की जीडीपी के 2 फीसदी के बराबर है और चीन की ये सबसे बड़ी रियल स्टेट कंपनी है। इसके साथ ही चीन की अर्थव्यवस्था में रियल स्टेस सेक्टर का योगदान करीब 30 फीसदी के करीब है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि, अगर चीन में रियल स्टेट कारोबार ढहता है, तो चीन की अर्थव्यवस्था पर क्या असर हो सकता है। इसके साथ ही तमाम अर्थव्यवस्था विशेषज्ञ चेतावनी भी जारी कर रहे हैं कि, चीन का बढ़ता विशालकाय कर्ज एक बहुत बड़ा खतरा विश्व की अर्थव्यवस्था के ऊपर है।

दुनिया पर बुरा असर
पिछले साल मार्च के बाद से ही चीन रियल एस्टेट कारोबार को लेकर दुनिया से झूठ बोलता आ रहा था और अब जाकर पता चला है कि, चीन के 70 बड़े शहरों में औसत हाउसिंग कीमतों में भारी गिरावट आ गई है और एवरग्रांडे ग्रुप, कैसा ग्रुप समेत कुछ और रियल एस्टेट इंडस्ट्री में शामिल कंपनियों को अगर सरकार फौरन नहीं संभालती है, तो उनका डूबना तय है और ये कंपनियां अपने साथ विश्व की कई कंपनियों को लेकर डूब जाएंगी। इसका असर चीन की अर्थव्यवस्था पर तो पड़ेगा ही, लेकिन वैसे देश, जो कोरोना संकट के बाद से पहले से ही अर्थव्यवस्था संकट से गुजर रहे हैं, उनकी स्थिति और ज्यादा खराब होने की आशंका लगाई जा रही है।
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